नई दिल्ली: महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के एक गांव के एक किसान ने साहूकारों से 50,00 रुपये का कर्ज लिया था, जो बढ़कर 75 लाख रुपये हो गया. आखिर में उन्हें अपनी किडनी भी बेचनी पड़ी.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला अब पुलिस जांच के केंद्र में है. बुधवार को अधिकारियों ने बताया कि डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि किसान के शरीर में केवल एक ही किडनी है.
रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि 29 वर्षीय किसान रोशन कुदे की चंद्रपुर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में स्वास्थ्य जांच की गई, जहां डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि उनकी एक किडनी नहीं है.
कुदे ने इससे पहले पुलिस को बताया था कि उसने उधार लिए गए पैसे का कुछ हिस्सा चुकाने के लिए अपनी किडनी बेचने को मजबूर होना पड़ा. इसी बयान के बाद पुलिस ने जांच शुरू की.
आरोपी साहूकारों के खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है. जांच के दौरान छह साहूकारों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से पांच को 20 दिसंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.
नागभीड़ तहसील के मिंथुर गांव का निवासी कुदे चार एकड़ जमीन का मालिक है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कुदे मंगलवार को ब्रह्मपुरी थाने पहुंचे और साहूकारों के एक समूह द्वारा लंबे समय से किए जा रहे उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई.
अपने बयान में कुदे ने आरोप लगाया कि 2021 से जून 2023 के बीच छह आरोपियों – मनीष पुरुषोत्तम घाटबंधे, किशोर रामभाऊ बावनकुले, लक्ष्मण पुंडलिक उरकुले, प्रदीप रामभाऊ बावनकुले, संजय विठोबा बल्लारपुरे और सत्यवान रामरत्न बोरकर – जो सभी ब्रह्मपुरी के निवासी हैं, ने आपसी मिलीभगत से अवैध साहूकारी का धंधा चलाया.
कुदे ने आरोप लगाया कि उनसे पैसे वसूलने की कोशिशों के तहत उन्हें लगातार आर्थिक शोषण, मानसिक उत्पीड़न और शारीरिक दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा.
पुलिस शिकायत के अनुसार, कुले के पास चार एकड़ खेती की जमीन थी और प्राकृतिक आपदाओं के कारण बार-बार फसल खराब होने से सालों से उनकी खेती की आय कम हो गई, जिससे औपचारिक लोन के रास्ते बंद होने के बाद उन्हें साहूकारों से पैसे उधार लेने पड़े.
खेती में नुकसान होने के बाद उन्होंने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए डेयरी व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया और गायें खरीदीं, इस उम्मीद में कि इससे उसे नियमित आय होगी.
अखबार के अनुसार, कुदे ने 2021 में अपने छोटे डेयरी व्यवसाय में बीमार गायों के इलाज के लिए एक साहूकार से 50 हजार रुपये उधार लिए. पहले साहूकार ने अत्यधिक ऊंची ब्याज दरें वसूलीं. किसी तरह कुले ने यह रकम लौटा दी, लेकिन साहूकार ने दावा किया कि मूलधन अब भी बकाया है और उसे दूसरे साहूकार के पास ले गया. वहां कुदे को पहले साहूकार का पैसा चुकाने के लिए और अधिक ब्याज दर पर नया कर्ज लेने के लिए मजबूर किया गया.
जल्द ही कुले साहूकारों के एक गिरोह के जाल में फंस गया, जिन्होंने मूलधन पर 40 प्रतिशत मासिक ब्याज वसूलना शुरू कर दिया. खेती से उपज भी खराब होने लगी, जिससे उसकी देनदारियां तेज़ी से बढ़ती चली गईं.
शिकायत के अनुसार, जो कर्ज शुरुआत में मामूली था, वह अत्यधिक ब्याज दरों के कारण बढ़ते-बढ़ते कथित तौर पर 74 लाख रुपये तक पहुंच गया. जैसे-जैसे कर्ज बढ़ता गया, साहूकार कथित रूप से बार-बार कुले के घर आने लगे और उन्हें परेशान करने लगे. कुले का आरोप है कि साहूकारों ने उससे पैसा वसूलने के लिए उसे बंधक बनाकर रखा और बुरी तरह पीटा.
कर्ज के जाल से निकलने की हताश कोशिश में किसान ने अपनी दो एकड़ जमीन, अपना ट्रैक्टर और घरेलू सामान तक बेच डाला, लेकिन इसके बावजूद वह अपना कर्ज चुकाने में नाकाम रहा.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, आरोपी साहूकारों में से एक ने सुझाव दिया कि वह कर्ज का कुछ हिस्सा चुकाने के लिए अपनी किडनी बेच दे. इसके बाद कुदे ने इंटरनेट पर सर्च की और एक एजेंट के संपर्क में आया, जो उसे कोलकाता ले गया. वहां मेडिकल जांच के बाद कुदे कंबोडिया गया, जहां उनकी किडनी निकाल दी गई. उन्होंने पुलिस को बताया कि इसके बदले उन्हें 8 लाख रुपये मिले.
चंद्रपुर के पुलिस अधीक्षक सुदर्शन मुम्माका ने बुधवार को कहा, ‘हमने कुदे से सभी जानकारियां देने को कहा है. हमने उसके वित्तीय लेनदेन की जांच की है और पाया कि उसने कई साहूकारों से पैसे उधार लिए थे.’
बता दें कि हाल ही में सरकार ने बताया था कि महाराष्ट्र में 2025 के पहले नौ महीनों में कर्ज, फसल खराब होने और बहुत ज़्यादा बारिश की वजह से 781 किसानों ने आत्महत्या की है.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, देश में हुए हर दो किसान आत्महत्याओं में से एक महाराष्ट्र में हुई. महाराष्ट्र में अब तक दर्ज 6,669 किसान आत्महत्याओं में से 4,150 किसान और 2,519 कृषि मज़दूर थे.
