नई दिल्ली: सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए होते हैं, न कि किसी वैचारिक समूह के मंच के रूप में काम करने के लिए. फिर भी इस वर्ष केरल में आधिकारिक क्रिसमस समारोह के दौरान एक विवाद सामने आया– वहां ‘आरएसएस गणगीतम’ गाने का अनुरोध किया गया, जो आमतौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक गाते हैं.
यह अनुरोध आरएसएस से जुड़े संगठन और भारतीय मज़दूर संघ से संबद्ध भारतीय पोस्टल एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसेज एम्प्लॉइज यूनियन (बीपीएओईयू) की ओर से आया था. बुधवार (18 दिसंबर) को केरल के विभिन्न डाकघरों में क्रिसमस समारोह आयोजित होने थे, लेकिन कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर उस गीत को गाने से इनकार करने के कारण उन्हें रद्द कर दिया गया.
गीत की मांग और उसके बाद समारोह रद्द होने से चिंता और नाराज़गी दोनों बढ़ी हैं.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिट्टास ने केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को लिखे एक पत्र में कहा कि भारत में क्रिसमस केवल सांस्कृतिक अवसर नहीं है, बल्कि यह आस्था, समावेशन और सद्भावना की अभिव्यक्ति है.
17 दिसंबर को भेजे गए इस पत्र में – जो समारोह से एक दिन पहले भेजा गया – ब्रिट्टास ने मंत्री से हस्तक्षेप कर ‘भारतीय पोस्टल एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसेज एम्प्लॉइज यूनियन द्वारा आधिकारिक क्रिसमस कार्यक्रम में आरएसएस गणगीतम गाने के अनुरोध’ को स्वीकार न करने का आग्रह किया.
यह पत्र डाक विभाग के सचिव और केरल सर्किल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल को भी भेजा गया. ब्रिट्टास ने अपने पत्र में कहा कि किसी सरकारी कार्यालय में किसी ‘पक्षपाती वैचारिक संगठन से जुड़े गीत’ को शामिल करने की कोशिश न केवल अनुचित है, बल्कि अत्यंत असंवेदनशील है और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है.
केरल के अखबार मातृभूमि की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरएसएस गणगीतम के साथ-साथ बीपीएओईयू ने केरल डाक विभाग से क्रिसमस और नए साल के समारोह में ‘गणपति स्तुति’ भी शामिल करने का अनुरोध किया था.
अखबार के अनुसार, सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज ऑर्गनाइजेशन (सीसीजीईडब्ल्यू) के महासचिव जीआर प्रमोद ने डाक विभाग द्वारा समारोह रद्द करने के निर्णय को ‘सांप्रदायिक शक्तियों के सामने समर्पण’ और ‘केंद्र सरकार के संस्थानों की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं पर हमला’ बताया.
ब्रिट्टास ने भी अपने पत्र में संघ से जुड़े इस संगठन की मांग पर उठी चिंताओं का ज़िक्र किया और केंद्रीय मंत्री सिंधिया से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की. पत्र में कहा गया कि लक्ष्य विभाग के सभी कर्मचारियों के लिए क्रिसमस समारोह की गरिमा को बनाए रखना है.
उन्होंने लिखा, ‘संघ के पत्र की सामग्री, जिसमें ‘देशभक्ति’ का बार-बार जिक्र किया गया है, विशेष रूप से चिंताजनक है. देशभक्ति किसी वैचारिक संगठन से जुड़ाव से नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा से उत्पन्न होती है.’
उन्होंने जोर देकर कहा कि कर्मचारियों द्वारा आरएसएस स्वयंसेवकों के गीत गाने के विरोध का मुद्दा सिर्फ गीत चयन का नहीं है – यह संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता से टकराता है और अल्पसंख्यक समुदायों की आस्था का अपमान तथा धार्मिक आयोजन को वैचारिक एजेंडे से ढंकने का प्रयास समझा जा सकता है.
Government offices are not ideological platforms. Introducing “RSS Ganageetham” into an official Christmas celebration violates constitutional secularism and insults minority faiths. It was a deliberate attempt to appropriate or overshadow a religious celebration with an… pic.twitter.com/LJRRZxqd0T
— John Brittas (@JohnBrittas) December 18, 2025
सिंधिया को लिखे पत्र के साथ एक्स पर किए गए एक पोस्ट में ब्रिट्टास ने लिखा कि मुद्दे को सुलझाने या अनुचित मांग को खारिज करने के बजाय प्रशासन ने क्रिसमस समारोह ही रद्द कर दिया. जिन कर्मचारियों ने आवाज उठाई, अब वे इसके नतीजे भुगत रहे हैं.
उन्होंने कहा कि ‘ताकतवर को खुश करने और कमजोरों को अनुशासित करने की कोशिश में प्रशासन ने कर्मचारियों के एक बड़े त्योहार को मनाने के अधिकार को दरकिनार कर दिया. इससे फायदा किसे हुआ – एजेंडा थोपने वाले बीएमएस से जुड़े संगठन को, या उन कर्मचारियों को जो सिर्फ सम्मानपूर्वक क्रिसमस मनाना चाहते हैं?’
उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकारी जगहें वैचारिक संघर्ष का मैदान बन जाती हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान उन आम लोगों को होता है जो सबकी आस्था का सम्मान करते हुए काम करना चाहते हैं.
इस बीच छात्र संगठन डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीवाईएफआई) ने भी डाक विभाग के इस फैसले की आलोचना की और कहा कि ‘गैरकानूनी या सांप्रदायिक गतिविधियों को डाक विभाग में अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.’
भले ही भाजपा, जिसका वैचारिक स्तंभ आरएसएस है, केरल के ईसाई मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अक्सर उसके सहयोगी संगठनों और सदस्यों की कार्रवाइयों के कारण विरोध का सामना करना पड़ा है. पिछले क्रिसमस पर भी कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिए गए निमंत्रण को लेकर विवाद हुआ था.
केंद्र सरकार 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से क्रिसमस सप्ताह (19 दिसंबर से 25 दिसंबर) को ‘सुशासन सप्ताह’ के रूप में भी मनाती है. 25 दिसंबर पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती है.
2024 में नागरिकों ने क्रिसमस के दौरान उत्सवों पर कथित तौर पर हिंदुत्व से जुड़े समूहों और व्यक्तियों द्वारा किए गए हमलों के विरोध में प्रदर्शन किए थे. ऐसे हमलों की घटनाएं पिछले सालों में भी रिपोर्ट किए गए हैं.
