छत्तीसगढ़: बस्तर में शव दफ़नाने को लेकर विवाद के बाद सांप्रदायिक हिंसा, कई पुलिसकर्मी घायल

छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले के बड़ेतेवड़ा गांव के ईसाई धर्म अपना चुके एक व्यक्ति के 70 वर्षीय पिता के शव को दफ़नाने को लेकर हुए विवाद के बाद हिंसक झड़पें हुईं जिसमें 20 पुलिसकर्मी समेत कई लोग घायल हो गए. बताया गया है कि भीड़ ने गांव में हिंसा और तोड़फोड़ भी की है.

(प्रतीकात्मक फोटो: फेसबुक/@SaranPolice)

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले में शव दफ़नाने को लेकर हुए विवाद के बाद भीड़ ने हिंसा और तोड़फोड़ की, जिसमें कई लोग – पुलिसकर्मी और आम नागरिक – घायल हो गए. इससे एक बार फिर बस्तर में दफ़नाने के अधिकारों को लेकर लंबे समय से चले आ रहे तनाव सामने आ गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तनाव 16 दिसंबर को तब शुरू हुआ जब बस्तर इलाके के कांकेर ज़िले की आमाबेड़ा तहसील के बड़ेतेवड़ा गांव के सरपंच राजमन सलाम ने अपने 70 साल के पिता के शव को अपनी निजी ज़मीन पर दफ़नाने की कोशिश की. सलाम, जो ईसाई धर्म अपना चुके हैं, चाहते थे कि उनके गैर-ईसाई पिता को ईसाई रीति-रिवाजों से दफ़नाया जाए, लेकिन गांव वालों ने इसका विरोध किया.

इसके बाद सलाम ने अपने पिता को ईसाई रीति-रिवाजों से दफ़नाया, जिससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया.

अखबार के अनुसार, उन्होंने दावा किया, ‘मैंने कहा कि मैं अंतिम संस्कार में शामिल होना चाहता हूं. लेकिन मेरे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया, यह कहते हुए कि वे मुझे इसमें शामिल नहीं होने देंगे.’

उन्होंने कहा, ‘इसके बाद मेरे प्रतिद्वंद्वी ने दूसरे गांवों से दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं को इकट्ठा किया, शव को कब्र से निकालने की मांग की और एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने दूसरे गांवों के पुरुषों और महिलाओं को उकसाया और उन्हें यहां ले आए. पुलिस ने भी मुझसे तनाव बढ़ने से बचने के लिए शव को कब्र से निकालने की इजाज़त देने को कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया.’

इससे 16 और 17 दिसंबर को झड़पें हुईं, जिसके बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया. 18 दिसंबर को तनाव तब और बढ़ गया जब लाठियों से लैस भीड़ पुलिस का घेरा तोड़कर बड़ेतेवड़ा में घुस गई, जिससे एक और झड़प हुई.

एक प्रेस नोट में कांकेर पुलिस ने कहा, ‘गांव वालों की शिकायत के आधार पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने कानूनी प्रावधानों के अनुसार शव को कब्र से निकालने का आदेश जारी किया है. पंचनामा और पोस्टमार्टम किया जाएगा, जिसके बाद ज़रूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस मुद्दे से गांव में तनावपूर्ण स्थिति बन गई. गांव वालों के समूह एक-दूसरे के सामने आ गए, जिसके परिणामस्वरूप पत्थरबाज़ी हुई.’

एक चश्मदीद ने बताया कि इसके तुरंत बाद एक गुस्साई भीड़ ने एक प्रार्थना हॉल में तोड़फोड़ की. इस घटना में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अंतागढ़ आशीष बंछोर सहित बीस पुलिसकर्मी घायल हो गए. अधिकारियों ने कहा कि स्थिति अब नियंत्रण में है.

लगातार हो रही हैं समान घटनाएं 

बता दें कि हाल के वर्षों में बस्तर में दफ़नाने के अधिकार एक गंभीर मुद्दा रहा है. छत्तीसगढ़ में ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों का बहिष्कार करने और उनके शवों को गांव में दफनाने का विरोध करने के कई मामले सामने आए हैं.

जनवरी में बस्तर के एक पादरी के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपने पिता को गांव के कब्रिस्तान या अपनी निजी ज़मीन पर ईसाई रीति-रिवाजों से दफनाने की इजाज़त मांगी थी. याचिका खारिज कर दी गई, लेकिन कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को पूरे राज्य में ईसाइयों को दफनाने के लिए खास जगहें कब्रिस्तान के तौर पर तय करने का निर्देश दिया. आखिरकार, शव को उनके घर से करीब 25 किलोमीटर दूर एक ईसाई कब्रिस्तान में दफनाया गया.

पिछले महीने छत्तीसगढ़ के बालौद जिले के जवारतला गांव में कुछ साल पहले ईसाई धर्म अपना चुके एक व्यक्ति के शव को गांव वालों ने गांव के कब्रिस्तान में दफनाने नहीं दिया था. अस्थायी रूप से मॉर्चरी में रखे जाने के बाद शव को दूसरे गांव के कब्रिस्तान में दफ़नाया गया था.

इससे पहले कांकेर ज़िले के कोडेकुर्से गांव में भी धर्म परिवर्तन कर चुके एक व्यक्ति के शव को दफनाने से रोक दिया गया था. 25 वर्षीय मनोज निषाद की 5 नवंबर को रायपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. मनोज ने कुछ महीने पहले ही ईसाई धर्म अपनाया था. लेकिन गांववालों ने उनके परिवार को निजी ज़मीन पर भी दफनाने की अनुमति नहीं दी. इसके विरोध में ईसाई समुदाय के लोगों ने स्थानीय थाने में प्रदर्शन किया और मांग की कि शव को गांव में ही दफनाने की अनुमति दी जाए.

मई 2024 में जगदलपुर के छिंदबाहर गांव के रहने वाले ईश्वर की मृत्यु हो गई थी. ग्रामीणों ने उनके ईसाई होने की वजह से गांव में अंतिम संस्कार करने विरोध किया था. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बाद ईश्वर के शव को आख़िरकार उनके गांव में ही दफ़नाया जा सका था.

नवंबर 2023 में छत्तीसगढ़ के ब्रेहेबेड़ा गांव की 13 वर्षीय सुनीता की नारायणपुर के जिला अस्पताल में टाइफाइड से मौत हो गई थी. जब उसका शव घर लाया गया तो बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने परिवार को किशोरी के शव को गांव की जमीन पर ईसाई रीति-रिवाज से दफनाने से रोक दिया था.