नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के बलौद जिले के जवारतला गांव में कुछ साल पहले ईसाई धर्म अपना चुके एक व्यक्ति के शव को गांव वालों ने गांव के कब्रिस्तान में दफनाने नहीं दिया. अस्थायी रूप से मॉर्चरी में रखे जाने के बाद शव को दूसरे गांव के कब्रिस्तान में दफ़नाया गया.
गांव में रोका गया शव, प्रशासन बेबस
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रमन साहू और उनका परिवार कुछ वर्ष पहले ईसाई धर्म अपना चुका था. हाल ही में रमन साहू की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई. जब शव को उनके पैतृक गांव जवारतला (रायपुर से लगभग 90 किलोमीटर दूर) लाया गया, तब गांववालों ने उसे गांव में प्रवेश नहीं करने दिया.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ग्रामीणों ने शव को गांव की सीमा पर ही रोक दिया और शर्त रखी कि अंतिम संस्कार केवल गांव के पारंपरिक (हिंदू) रीति-रिवाजों से ही किया जा सकता है.
स्थिति बिगड़ने की आशंका के चलते पुलिस बल तैनात किया गया. हालांकि प्रशासन की कोशिशों के बावजूद गांववाले अपने फैसले पर अड़े रहे और अंततः शव को गांव से दूर संकरा गांव के कब्रिस्तान में रविवार (9 नवंबर) को दफनाया गया.
गांववालों के अड़े रहने के कारण प्रशासन ने शव को अस्थायी रूप से मॉर्चरी में रखवाया था.
बलौद ज़िले के पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘गांववालों ने ईसाई धर्म अपनाने के कारण रमन साहू के परिवार को दफनाने की जगह देने से इनकार कर दिया. आख़िरकार रविवार को परिवार को मजबूरन जवारतला गांव से दूर संकरा कब्रिस्तान में शव को दफनाना पड़ा.’
‘संविधानिक अधिकारों का हनन’
छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘ईसाइयों से उनके अपने गांवों में सम्मानजनक अंतिम संस्कार का संवैधानिक अधिकार छीन लिया जा रहा है. प्रशासन भीड़ के सामने बेबस दिखा. जबकि कानून के मुताबिक उस क्षेत्र में दफनाने की जमीन पहले से निर्धारित है. संविधान का अनुच्छेद 19 भेदभाव और हिंसा को बढ़ावा देने पर रोक लगाता है.’
कांकेर में भी हुई थी समान घटना
इससे पहले, कांकेर ज़िले के कोडेकुर्से गांव में भी धर्म परिवर्तन कर चुके एक व्यक्ति के शव को दफनाने से रोक दिया गया था.
25 वर्षीय मनोज निषाद की 5 नवंबर को रायपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. मनोज ने कुछ महीने पहले ही ईसाई धर्म अपनाया था.
लेकिन गांववालों ने उनके परिवार को निजी ज़मीन पर भी दफनाने की अनुमति नहीं दी. इसके विरोध में ईसाई समुदाय के लोगों ने स्थानीय थाने में प्रदर्शन किया और मांग की कि शव को गांव में ही दफनाने की अनुमति दी जाए.
स्थिति तनावपूर्ण होने पर कोडेकुर्से के ग्रामीणों ने घोषणा की कि अगर निषाद परिवार ‘धर्म त्याग’ कर वापस अपने पुराने धर्म में लौट आए, तो उन्हें अंतिम संस्कार की अनुमति दे दी जाएगी.
