नई दिल्ली: केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने रविवार को राज्य के कुछ निजी स्कूलों द्वारा कैंपस में क्रिसमस समारोह रोकने की खबरों पर चिंता जताई और चेतावनी दी कि राज्य सरकार ‘उत्तर भारत की तरह धर्म और आस्था पर आधारित बंटवारे वाले मॉडल’ को बर्दाश्त नहीं करेगी.
मंत्री ने उन घटनाओं का जिक्र किया, जहां स्कूल प्रबंधन ने वर्षांत समारोह के लिए छात्रों से जुटाई गई राशि को आरएसएस से जुड़े समूहों के दबाव के कारण वापस कर दिया.
शिवनकुट्टी ने कहा, ‘कई अभिभावकों, छात्रों और शिक्षकों ने मुझसे शिकायत की है. सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है. उन स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई चल रही है, जिन्होंने आरएसएस की धमकियों के कारण क्रिसमस समारोह रद्द कर दिए.’
मंत्री ने आरएसएस पर ईसाई और मुस्लिम जैसी अल्पसंख्यक समुदायों को धार्मिक उत्सव मनाने से रोकने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘आरएसएस राज्य सरकार की छुट्टियों को धर्म से जोड़ने की कोशिश कर रहा है ताकि समाज में सांप्रदायिक दरारें पैदा की जा सकें. उन्होंने केरल के स्कूलों को अपने विभाजनकारी एजेंडे के आसान निशाने के रूप में चुन लिया है.’
शिवनकुट्टी ने कहा कि आरएसएस केरल में अपने ‘उत्तर भारतीय’ मॉडल को दोहराने की कोशिश कर रहा है, जिसमें अल्पसंख्यकों को अलग-थलग किया जाता है, लेकिन राज्य सरकार ऐसी किसी भी कोशिश का विरोध करेगी.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा, ‘केरल जैसे राज्य में- जो अपनी धर्मनिरपेक्ष संस्कृति के लिए जाना जाता है, ऐसी हरकतें पहले कभी नहीं सुनी गईं… हमारे स्कूल ऐसी जगहें हैं जहां बच्चे जाति और धार्मिक विचारों से ऊपर उठकर एक साथ सीखते और बढ़ते हैं. हम उन्हें सांप्रदायिक लैब नहीं बनने देंगे.’
उन्होंने कहा, ‘किसी भी कट्टरपंथी संगठन द्वारा स्कूलों को धार्मिक विभाजन के दमघोंटू केंद्रों में बदलने की किसी भी कोशिश का सरकार कड़ा विरोध करेगी. कम उम्र में धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात करना एक मानवीय और धर्मनिरपेक्ष समाज की नींव रखता है.’
मंत्री ने कहा कि सभी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त या अन्य, की जिम्मेदारी है कि वे भारत के संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों को बनाए रखें. किसी भी संस्थान या संगठन का नाम लिए बिना उन्होंने चेतावनी दी कि जो कोई भी स्कूलों को ‘संकीर्ण राजनीतिक और सांप्रदायिक हितों की रक्षा करने वाली जगहों’ में बदलने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले केरल डाक विभाग के क्रिसमस समारोह को रद्द कर दिया गया था, क्योंकि कर्मचारियों ने कार्यक्रम के हिस्से के रूप में आरएसएस का एक गीत गाने से इनकार कर दिया था.
आरएसएस से संबद्ध भारतीय डाक प्रशासनिक कार्यालय कर्मचारी संघ (बीपीएओईयू) ने समारोह के हिस्से के रूप में ‘आरएसएस गणगीतम’ गाने और क्रिसमस व नए साल के समारोह में गणपति स्तुति शामिल करने की मांग की थी. केरल के विभिन्न डाकघरों में 18 दिसंबर को होने वाले ये समारोह अंततः रद्द कर दिए गए.
