नई दिल्ली: असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग के खेरेनी क्षेत्र में मंगलवार को भड़की ताज़ा हिंसा में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए. इसके चलते कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग दोनों जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं.
इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से पुष्टि की कि कार्बी समुदाय के एक व्यक्ति की मौत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई में हुई, जबकि बंगाली समुदाय के एक व्यक्ति की मौत खेरेनी मुख्य बाज़ार में लगी आगजनी के दौरान हो गई. आम नागरिकों के घायलों की सही संख्या स्पष्ट नहीं है, लेकिन कम से कम 58 पुलिसकर्मी – जिनमें डीजीपी, आईजीपी और एक अन्य आईपीएस अधिकारी शामिल हैं – घायल हुए बताए जा रहे हैं.
असम के डीजीपी हरमीत सिंह, जो मौके पर मौजूद हैं, ने कहा, ‘मैं खुद भीड़ से सीधे बात करने गया था. लेकिन अब वे दो दिशाओं से पुलिस पर हमला कर रहे हैं. करीब 38 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं… कल इन्होंने वादा किया था कि वे अब कोई दुकान नहीं जलाएंगे. उन्होंने दुकानों से सिलेंडर निकालकर फोड़ दिए. वे तीर और पत्थरों से हमला कर रहे हैं. इस तरह कोई समाधान नहीं निकल सकता.’
क्षेत्र में हिंसा बढ़ने के बाद असम सरकार के गृह विभाग ने, यह कहते हुए कि ‘सार्वजनिक शांति और सौहार्द बिगड़ने की गंभीर आशंका’ है, आदेश जारी कर दोनों जिलों में तत्काल प्रभाव से इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं रोक दीं. आदेश के अनुसार, आशंका जताई गई है कि सोशल मीडिया और इंटरनेट का उपयोग भड़काऊ संदेश और अफवाहें फैलाने के लिए किया जा सकता है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है.
मंगलवार को राज्य के कैबिनेट मंत्री रानोज़ पेगू ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया. अपने दौरे के बाद उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने अनशन समाप्त करने का फैसला किया है.
उन्होंने कहा, ‘मैं खेरेनी फेलांगपी में कार्बी समुदाय के सदस्यों से मिला, जो अन्य मुद्दों के साथ-साथ खेरेनी वीजीआर/पीजीआर की ज़मीनों से अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर अनशन पर थे. मेरी अपील के बाद आंदोलनकारियों ने अनशन समाप्त करने पर सहमति जताई और कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद तथा असम सरकार के साथ त्रिपक्षीय वार्ता के लिए तैयार हो गए. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा 26 दिसंबर को इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे.’
हालांकि मंत्री के लौटने के बाद क्षेत्र में फिर से हिंसा भड़क उठी.
असम ट्रिब्यून के अनुसार, यह हिंसा प्रदर्शनकारियों के दो गुटों के बीच झड़प के बाद हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों को उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले दागने पड़े.
रिपोर्ट के अनुसार, धारा-163 जैसे निषेधाज्ञा आदेश लागू रहने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग, जिनमें वे महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे जिनकी दुकानें सोमवार को भीड़ द्वारा जला दी गई थीं, हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए बाहर आ गए. वहीं, आदिवासी क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी भी खेरेनी बाज़ार क्षेत्र में इकट्ठा हो गए.
क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों ने उन्हें शांत करने की कोशिश की, लेकिन अचानक दोनों तरफ से पत्थरबाज़ी शुरू हो गई, जिसमें कई प्रदर्शनकारी, पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मी घायल हो गए.
वहीं, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा कि अशांति के दौरान हुई मौतों से वे गहरे दुखी हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, ‘मैं पश्चिम कार्बी आंगलोंग की स्थिति पर लगातार नज़र रख रहा हूं. आज की अशांति के दौरान दो लोगों की मौत होना बेहद पीड़ादायक है.’
उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने के लिए बुधवार को खेरेनी क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे. शर्मा ने कहा, ‘स्थिति को सामान्य करने और बातचीत के ज़रिए समस्या सुलझाने के लिए हम लगातार सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में हैं. शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं. सरकार सभी प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर जरूरी सहायता प्रदान करेगी.’
ज्ञात हो कि पश्चिम कार्बी आंगलोंग एक आदिवासी बहुल पहाड़ी जिला है, जो संविधान की छठी अनुसूची के तहत कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद के अधिकार क्षेत्र में आता है.
ज़िले में तनाव उन नौ लोगों के आमरण अनशन से जुड़ा है, जो पिछले दो हफ्तों से परिषद क्षेत्र के प्रोफेशनल ग्रेज़िंग रिज़र्व (पीजीआर) और विलेज ग्रेज़िंग रिज़र्व (वीजीआर) (आरक्षित चरागाह भूमि) पर बेदखली की मांग को लेकर फेलांगपी में धरने पर बैठे हैं, जो कार्बी आदिवासी संगठनों की लंबे समय से चली आ रही मांग है.
तनाव तब बढ़ गया जब सोमवार को अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों को फेलांगपी से हटाकर ले जाया गया. पुलिस ने कहा था कि उन्हें ‘मेडिकल कारणों से’ गुवाहाटी ले जाया गया क्योंकि 15 दिन के अनशन के बाद उनकी हालत बिगड़ सकती थी.
