नई दिल्ली: पिछले कुछ हफ्तों में ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत तेज़ी से गिरती गई है. अल जज़ीरा के मुताबिक, इसकी वजह से ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया है. रविवार को जब विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, तब एक अमेरिकी डॉलर के बदले लगभग 14 लाख 20 हज़ार रियाल मिल रहे थे, जबकि एक साल पहले यह दर लगभग 8 लाख 20 हज़ार रियाल थी.
दशकों से पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से जूझ रही ईरान की अर्थव्यवस्था पर सितंबर के अंत से और दबाव बढ़ गया है. उस समय संयुक्त राष्ट्र ने देश के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया, जिन्हें 10 साल पहले हटा लिया गया था.
कैसे शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन?
रविवार को जब ईरानी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, तो तेहरान के ग्रैंड बाज़ार के दुकानदारों ने हड़ताल की. इसके बाद कराज, हमेदान, क़ेश्म, मलार्ड, इस्फ़हान, केरमानशाह, शीराज़ और यज़्द जैसे शहरों में भी प्रदर्शन होते दिखे. बीबीसी के मुताबिक, कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करते हुए भी देखा गया.
ईरानी सरकार ने कहा है कि वह ‘धैर्य के साथ’ लोगों की बात सुनेगी, भले ही उसे कड़ी आवाज़ों का सामना क्यों न करना पड़े.
सोमवार देर रात राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लिखा कि उन्होंने गृह मंत्री को निर्देश दिया है कि वे प्रदर्शनकारियों के ‘प्रतिनिधियों’ से बातचीत करें, ताकि समस्याओं के समाधान और जिम्मेदारी से कार्रवाई के लिए कदम उठाए जा सकें.
उन्होंने ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर मोहम्मदरेज़ा फ़रज़ीन का इस्तीफ़ा भी स्वीकार कर लिया और उनकी जगह पूर्व अर्थ एवं वित्त मंत्री अब्दुलनासिर हेम्मती को नियुक्त किया.
शांतिपूर्ण प्रदर्शन वैध लेकिन…
ईरान के सरकारी मीडिया में बुधवार को प्रकाशित बयानों में ईरान के मुख्य अभियोजक मोहम्मद मोवाहेदी-आज़ाद ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन वैध हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अस्थिरता पैदा करने की किसी भी कोशिश पर कड़ी प्रतिक्रिया होगी.
मोवाहेदी-आज़ाद ने कहा, ‘रोज़ी-रोटी से जुड़े शांतिपूर्ण विरोध सामाजिक जीवन की वास्तविकता हैं और उन्हें समझा जा सकता है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘आर्थिक विरोध प्रदर्शनों को असुरक्षा फैलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या बाहर से तैयार किए गए किसी एजेंडे को लागू करने का ज़रिया बनाने की कोई भी कोशिश क़ानूनी, संतुलित और निर्णायक कार्रवाई के साथ जवाब पाएगी.’
दरअसल, विरोध प्रदर्शनों में सरकार विरोधी नारे भी लगा रहे हैं, जिनमें ‘तानाशाह को मौत’ जैसे नारे भी शामिल हैं. बीबीसी के मुताबिक, यह नारा ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के संदर्भ में है, जिनके पास देश की अंतिम सत्ता है. कुछ प्रदर्शनकारियों को 1979 की इस्लामी क्रांति में अपदस्थ किए गए दिवंगत शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी के बेटे के समर्थन में नारे लगाते हुए भी सुना गया, जैसे ‘शाह ज़िंदाबाद’.
इसके जवाब में, अमेरिका में निर्वासन में रह रहे रज़ा पहलवी ने एक्स पर लिखा, ‘मैं आपके साथ हूं. जीत हमारी होगी, क्योंकि हमारा उद्देश्य न्यायपूर्ण है और हम एकजुट हैं.” उन्होंने आगे कहा, “जब तक यह शासन सत्ता में रहेगा, देश की आर्थिक स्थिति लगातार बदतर होती जाएगी.’
कई तरह की चुनौतियां
ईरान की आर्थिक स्थिति बेहद गंभीर है. देश में महंगाई दर करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और मुद्रा लगातार कमजोर हो रही है.
लेकिन ये समस्याएं ही ईरान की इकलौती चुनौतियां नहीं हैं. देश एक गहराते ऊर्जा संकट से भी जूझ रहा है. वहीं, गंभीर जल संकट के बीच तेहरान और कई अन्य बड़े शहरों को पानी देने वाले अधिकांश बांध लगभग खाली पड़े हैं.
इसके अलावा, ईरान दुनिया के सबसे सख्त इंटरनेट नियंत्रण वाले देशों में भी शामिल है.
ईरानी सरकारी मीडिया ने विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग में इस बात पर जोर दिया है कि इनका मुख्य कारण रियाल की बेकाबू गिरावट है, न कि 1979 की क्रांति के बाद से देश पर शासन कर रही धार्मिक सत्ता व्यवस्था के प्रति व्यापक असंतोष.
ईरान में आखिरी बार देशव्यापी विरोध प्रदर्शन 2022 और 2023 में हुए थे. ये प्रदर्शन उस समय भड़क उठे थे, जब 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी. उन पर हिजाब से जुड़े सख्त इस्लामी कानूनों का पालन न करने का आरोप लगाया गया था.
इन प्रदर्शनों के दौरान सैकड़ों लोगों की मौत हुई, 20 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया और कई लोगों को फांसी दी गई.
