मणिपुर: बिष्णुपुर में आईईडी विस्फोटों में दो नागरिक घायल, एनआईए करेगा जांच

हिंसाग्रस्त मणिपुर में कुकी-ज़ो-बहुल चूड़ाचांदपुर ज़िले की सीमा से लगे फौगाकचाओ थाने के पास एक सुनसान घर में धमाके हुए. जिस घर में धमाके हुए, उसके मालिक मई 2023 में हिंसा शुरू होने के बाद से राहत शिविर में रह रहे हैं. मेईतेई और कुकी संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे शांति प्रक्रिया के लिए गंभीर ख़तरा बताया है.

मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में हुए धमाकों के बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने सुरक्षा बलों के बंकरों को तोड़ दिया. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मणिपुर के मेईतेई-बहुल बिष्णुपुर जिले में सोमवार (5 जनवरी) सुबह लगातार हुए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) विस्फोटों में कम से कम दो नागरिक घायल हो गए. इस घटना ने हिंसा-ग्रस्त राज्य में पहले से नाज़ुक सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंताएं बढ़ा दीं.

इस बीच, अधिकारियों ने मंगलवार (6 जनवरी) को बताया कि इन दोहरे धमाकों की जांच एनआईए को सौंप दी गई है.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, ये धमाके कुकी-ज़ो-बहुल चूड़ाचांदपुर जिले की सीमा से लगे फौगाकचाओ पुलिस स्टेशन के तहत सैतों-नगानुखोंग इलाके में एक सुनसान घर में सुबह 5.40 बजे से 5.45 बजे के बीच हुए. तीसरा धमाका सुबह करीब 8.45 बजे हुआ, जो पहले धमाके वाली जगह से लगभग 200 मीटर दूर था.

घायलों की पहचान सनातोंबा सिंह और इंदुबाला देवी के रूप में हुई है. पहले धमाके के बाद घटनास्थल का मुआयना करते समय उनके दाहिने पैरों में छर्रे लगे. दोनों का एक सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.

जिस घर में धमाके हुए, वह एक ऐसे निवासी का है जो 3 मई 2023 को मेईतेई-कुकी समुदायों के बीच हिंसा शुरू होने के बाद से राहत शिविर में रह रहे हैं. इस जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इस बीच, राज्य पुलिस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, मामले को आगे की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भेज दिया गया है.

इसमें कहा गया है, ‘आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, और हिंसा को और बढ़ने से रोकने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है. धमाकों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए जांच और ऑपरेशनल प्रयास जारी हैं.’

मेईतेई और कुकी-ज़ो संगठनों ने घटना की निंदा की

टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार के विस्फोट ऐसे समय में हुए हैं जब प्रशासन आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों को उनके मूल गांवों में पुनर्वासित करने का प्रयास कर रहा है. मेईतेई और कुकी-जो – दोनों संगठनों ने इस हिंसा की निंदा करते हुए इसे शांति प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताया है.

इंडिजिनस पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन और ऑल मणिपुर स्टूडेंट्स यूनियन सहित कई संगठनों ने धमाके के विरोध में बुधवार (7 जनवरी) को सुबह 12 बजे से पूरे राज्य में 24 घंटे के बंद का आह्वान किया है.

मेईतेई नागरिक संगठन कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (कोकोमी) ने धमाकों की तत्काल, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की है.

हिंसा की इस ताज़ा कड़ी से क्षेत्र में तनाव फैल गया. नाराज़ स्थानीय लोगों ने पास के एक सीआरपीएफ बंकर को तोड़ दिया और अर्धसैनिक बल पर हमले को रोकने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. अधिकारियों ने बताया कि स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है.

16 दिसंबर को इसी सीमा क्षेत्र में चूड़ाचांदपुर की ओर से अज्ञात बंदूकधारियों ने बिष्णुपुर के मेईतेई बस्तियों पर गोलीबारी की थी, जिसके बाद अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए थे.

मेईतेई हेरिटेज सोसाइटी (एमएचएस) ने एक बयान में हमले के लिए ‘संदिग्ध चिन-कुकी उग्रवादी/सशस्त्र समूहों’ को ज़िम्मेदार ठहराया. एमएचएस ने कहा, ‘और भी अधिक चिंताजनक यह है कि यह हमला उस समय किया गया जब पास में केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात थे. इससे मौजूदा सुरक्षा स्थिति और सशस्त्र समूहों द्वारा बेखौफ होकर काम करने पर गंभीर सवाल उठते हैं.’

16 दिसंबर को हुई गोलीबारी का उल्लेख करते हुए एमएचएस ने कहा, ‘ताज़ा हमला भय पैदा करने, पुनर्वास को पटरी से उतारने और नाज़ुक सामान्य स्थिति को नुकसान पहुंचाने के लिए की गई सुनियोजित कोशिशों की श्रृंखला का हिस्सा है. नागरिकों को निशाना बनाना न केवल अमानवीय है, बल्कि राज्य के अधिकार और उसकी सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी कमजोर करता है.’

एमएचएस ने राज्यपाल से दोषियों के खिलाफ ‘त्वरित, निर्णायक और मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई’ सुनिश्चित करने का आग्रह किया.

वहीं, कुकी-जो काउंसिल (केजेडसी) ने भी विस्फोटों की निंदा की. केजेडसी के अनुसार, ये विस्फोट गामनोमफाल गांव के पास सुबह 5:40 से 8 बजे के बीच हुए, जिनमें कथित तौर पर ‘कई लोग’ घायल हुए.

हिंसा को ‘बेहद परेशान करने वाली और शांति व सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा’ बताते हुए केजेडसी ने कहा कि यह घटना एक तय बफर ज़ोन में या उसके आसपास हुई – यह एक सीमांकित क्षेत्र है जिसे सुरक्षा बल समुदायों के बीच झड़पों को रोकने के लिए बनाए रखते हैं.

केजेडसी ने कहा, ‘बफर ज़ोन की शुचिता हर समय बनाए रखी जानी चाहिए.’ और जोड़ा कि यह घटना क्रिसमस-नववर्ष के मौसम के दौरान हुई, जो शांति और सुलह का समय होता है, इसलिए ऐसी घटना होना मुख्य  रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है.

केजेडसी ने मामले की गहन और निष्पक्ष जांच तथा दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की.

बता दें कि फरवरी 2025 से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है, जब मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कुकी और मेईतेई समुदायों के बीच जातीय हिंसा से निपटने के लिए अपने प्रशासन की आलोचनाओं के बीच इस्तीफा दे दिया था.

द टेलीग्राफ के अनुसार, ये विस्फोट उस उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के दो दिन बाद हुए, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में की थी. बैठक में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला, राज्य के डीजीपी राजीव सिंह और सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह शामिल थे.