नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में प्रदेश सरकार खुद अपनी ही फ़ज़ीहत कराती नज़र आ रही है. दूषित पानी से हुई मौतों की संख्या और पीड़ित परिवारों को दिए गए मुआवज़े में अंतर को लेकर अब शासन -प्रशासन अपने ही आंकड़ो में उलझता दिखाई दे रहा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर में दूषित पानी पीने से मौत के मामले में 18 परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि आधिकारिक तौर पर मरने वालों की संख्या आठ है.
मालूम हो कि इंदौर के भागीरथपुरा में 24 दिसंबर से 6 जनवरी के बीच गंभीर उल्टी और दस्त के कारण कई लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया.
इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस ने सरकारी रिकॉर्ड के हवाले से बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने 18 लोगों के परिवारों को 2 लाख रुपये के चेक दिए हैं, जबकि इसी सप्ताह की शुरुआत में सरकार ने अदालत को बताया था कि दूषित पानी पीने से आठ लोगों की मौत हुई है.
उल्लेखनीय है कि इस मामले की शुरुआत में संदेह था कि पुलिस चौकी के शौचालय में सेप्टिक टैंक न होने के चलते पानी दूषित हुआ है, लेकिन अब अधिकारी स्थानीय बोरवेल कनेक्शनों की जांच कर रहे हैं, जिनसे पेयजल दूषित हो सकता है.
इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार (7 जनवरी) को कहा कि ध्यान इस बात पर नहीं होना चाहिए कि कितने लोगों की मौत हुई है, क्योंकि एक भी जान का जाना ‘बेहद दुखद’ होता है.
उन्होंने आगे कहा,’इसलिए, हम आंकड़ों में नहीं उलझते. प्रशासन द्वारा अपनी प्रक्रियाओं का पालन करना अलग बात है. सामान्यतः, केवल उन्हीं मामलों को वैध आंकड़े माना जाता है जिनमें पोस्टमार्टम किया गया हो.’
मालूम हो कि हाल ही में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भागीरथपुरा क्षेत्र के दूषित पानी मामले में सुनवाई करते हुए सरकार, नगर निगम और जिला प्रशासन के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए इसे असंवेदनशील बताया था.
अदालत ने सुनवाई के दौरान पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताते हुए कहा था कि स्वच्छता में नंबर वन बताए जाने वाले इंदौर में इस तरह की घटना होना अपने आप में चौंकाने वाली बात है.
कोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन की उस स्टेटस रिपोर्ट पर भी नाराजगी जाहिर की थी, जिसमें मृतकों की वास्तविक संख्या को लेकर प्रशासनिक चुनौतियों का हवाला दिया गया था. कोर्ट ने संबंधित विभागों को फटकार लगाते हुए कहा था कि इस तरह की रिपोर्ट से मामले की गंभीरता कम नहीं हो जाती.
अखबार ने एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा, ‘मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जैसे वरिष्ठ नेताओं सहित स्थानीय प्रशासन ने अंतिम रिपोर्ट की प्रतीक्षा किए बिना सभी दर्ज मृत्यु मामलों में चेक देने का निर्णय लिया. इसलिए चेक वितरित किए गए. वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए इसका ऑडिट चल रहा है.’
गौरतलब है कि इंदौर शहर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी दूषित हो गया था. 3 जनवरी को नगर निगम द्वारा जीवाणु परीक्षण के लिए भागीरथपुरा से एकत्र किए गए 51 नमूनों में से 35 में मल कोलीफॉर्म जीवाणु की मात्रा पाई गई.
अखबार के अनुसार, यह मात्रा 13 से 360 प्रति मिलीलीटर तक थी. जबकि भारतीय मानकों के अनुसार सुरक्षित मानी जाने वाली संख्या शून्य है. इस संबंध में आईएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भागीरथपुरा में पाया गया दूषण स्तर सुरक्षित माने जाने वाले स्तर से कहीं अधिक है.
