इंदौर: दूषित पानी से हुई मौतों के बाद आरएसएस की बैठक में शामिल हुए कलेक्टर व मेयर, विवाद

दूषित पेयजल से लोगों की मौत को लेकर विवादों के बीच इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा और मेयर पुष्यमित्र भार्गव बुधवार देर रात शहर के आरएसएस कार्यालय में एक बैठक में शामिल हुए. कांग्रेस ने इस दौरे को प्रशासनिक निष्पक्षता का उल्लंघन बताते हुए सवाल किया है कि क्या अब प्रशासन जनता की बजाय आरएसएस के प्रति जवाबदेह हो गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: इंदौर में गुरुवार को उस समय एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जब कलेक्टर शिवम वर्मा और मेयर पुष्यमित्र भार्गव बुधवार देर रात शहर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यालय में एक बैठक में शामिल होते देखे गए.

यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ दिन पहले भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल के कारण कम से कम 18 लोगों की मौत हो चुकी है और प्रशासनिक अधिकारी जांच के घेरे में हैं.

इस घटनाक्रम को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गुरुवार को कहा कि कलेक्टर शिवम वर्मा भाजपा कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं.

उधर इंडियन एक्सप्रेस ने भार्गव के हवाले से बताया है, ‘एक स्वयंसेवक के रूप में मैं अक्सर आरएसएस कार्यालय जाता हूं. इसका मौजूदा संकट से कोई लेना-देना नहीं है.’ कलेक्टर वर्मा ने इस बैठक पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

अखबार के अनुसार, आरएसएस की मालवा प्रांत इकाई के मुख्यालय, सुदर्शन रोड स्थित कार्यालय में हुई बंद कमरे की चर्चा से परिचित लोगों ने बताया कि यह बैठक आरएसएस मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन द्वारा बुलाई गई थी. सूत्रों के अनुसार, चर्चा का केंद्र संकट प्रबंधन में हुई चूक थी.

कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक निष्पक्षता की धज्जियां उड़ाने का मामला बताया

जहां भाजपा ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे दोनों अधिकारियों की एक नियमित दौरा बताया, वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मेयर का आरएसएस कार्यालय के बाहर खड़े होने का एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, ‘जब इंदौर के नलों से ज़हर बह रहा हो, जब निर्दोष नागरिकों की मौत से घर-घर मातम पसरा हो, जब सरकार विफल हो चुकी हो, तब क्या कलेक्टर को मैदान में, अस्पतालों में, प्रभावित परिवारों के बीच नहीं होना चाहिए – या आरएसएस कार्यालय के भीतर?’

पटवारी ने कहा कि इंदौर के कलेक्टर और मेयर का देर रात पहुंचना कोई सामान्य दौरा नहीं था. उन्होंने इसे ‘प्रशासनिक निष्पक्षता की धज्जियां उड़ाने’ का मामला बताया.

पटवारी ने कहा, ‘भार्गव वर्मा को आरएसएस दफ्तर ले गए. कलेक्टर ने दिखा दिया है कि वह प्रशासनिक अधिकारी नहीं हैं. वह भाजपा सदस्य के तौर पर काम कर रहे हैं. अगर आप ड्यूटी पर रहते हुए राजनीतिक पार्टियों के दफ्तर जाएंगे.’

उन्होंने कहा, ‘कलेक्टर को अपने दफ्तर में काम करना चाहिए, मुख्य सचिव से मिलना चाहिए और मंत्रियों और अधिकारियों के साथ मामलों पर चर्चा करनी चाहिए. इंदौर में लोग मर रहे हैं, हर जगह दूषित पानी है, और भ्रष्टाचार का स्तर अकल्पनीय है. लेकिन, कलेक्टर काम नहीं कर रहे हैं.’

पटवारी ने आरोप लगाया, ‘वह भाजपा के लिए अपनी हाजिरी लगाने आरएसएस ऑफिस जा रहे हैं.’

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह इस दौरे को लेकर प्रशासनिक निष्पक्षता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा के खिलाफ कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग में शिकायत दर्ज कराएगी.

इस दौरे को प्रशासनिक तटस्थता की खुली अवहेलना बताते हुए पटवारी ने कहा, ‘क्या अब प्रशासन जनता की बजाय आरएसएस के प्रति जवाबदेह हो गया है? क्या संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारी बंद कमरे में सत्तारूढ़ दल से जुड़ी एक संस्था से निर्देश ले रहे हैं?’

उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना से साफ है कि प्रशासन अब स्वतंत्र नहीं रहा और जनहित गौण हो गया है.

भाजपा ने कहा- शिष्टाचार भेंट

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इन आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने कहा, ‘यह एक शिष्टाचार भेंट थी, इसमें कुछ भी गलत नहीं था. क्या अधिकारी लोगों से मिल नहीं सकते? कांग्रेस को बैठक को लेकर गलत जानकारी फैलाना बंद करना चाहिए.’

सूत्रों के अनुसार, चर्चा में समन्वय की कमी, प्रतिक्रिया तंत्र में देरी और संचार विफलताओं जैसे मुद्दे सामने आए, जिनके कारण दूषित पानी के संकट को लेकर नकारात्मक जनधारणा बनी.

एक भाजपा पदाधिकारी ने कहा, ‘आरएसएस को बताया गया कि प्रदूषण कैसे हुआ, फाइलें समय पर आगे क्यों नहीं बढ़ीं और पूरे मामले को कैसे संभाला गया. यह केवल एक शिष्टाचार बैठक थी. यह नहीं कहा जा सकता कि अधिकारियों को आरएसएस के प्रति जवाबदेह बनाया जा रहा था.’

एक अन्य पदाधिकारी ने कहा, ‘इस बात पर सहमति बनी कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए. नौकरशाही और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी पर चर्चा हुई और इसे दूर करने के उपायों पर बात की गई. यह भी कहा गया कि सरकारी अधिकारियों को नागरिकों के अधिक संपर्क में रहना चाहिए और बढ़ती दूरी को कैसे पाटा जाए, ताकि ऐसी घटनाएं फिर न हों.’

वहीं, भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि आरएसएस कार्यालय जाने में कोई आपत्तिजनक बात नहीं है. उन्होंने कहा कि केवल वही लोग आरएसएस कार्यालय जाते हैं जो राष्ट्रसेवा और ‘भारत माता की जय’ के नारे में विश्वास रखते हैं.

उन्होंने कहा, ‘आरएसएस को केवल राष्ट्र और उसके ध्वज की चिंता है. यदि कोई कलेक्टर, एसपी, नेता या नागरिक संघ कार्यालय जाता है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. कांग्रेस नेताओं को भी जाना चाहिए – उन्हें कौन रोक रहा है?’

इस बैठक ने संस्थागत प्रोटोकॉल को लेकर बहस को और तेज कर दिया है. जिला कलेक्टर, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी के रूप में राज्य सरकार के अधीन कमान श्रृंखला में काम करते हैं, जबकि मेयर नगर निगम कानूनों के तहत कार्य करते हैं.