महाराष्ट्र निकाय चुनावों में मार्कर पेन विवाद के बाद न मिटने वाली स्याही का इस्तेमाल करेगा राज्य चुनाव आयोग

महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में मार्कर पेन की स्याही मिटने के विवाद के बाद राज्य चुनाव आयोग ने अब आगामी स्थानीय चुनावों के लिए बोतलों वाली पारंपरिक स्याही इस्तेमाल करने का फैसला किया है. विपक्षी दलों द्वारा धांधली की आशंका जताने और जांच की मांग के बाद प्रशासन ने मैसूर पेंट्स को स्याही की लाखों बोतलों का ऑर्डर दिया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

मुंबई: हाल ही में महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में मतदाताओं की उंगली पर ‘मार्कर पेन’ से निशान बनाने को लेकर हुई आलोचना के बाद राज्य चुनाव आयोग ने आगामी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए शीशी में आने वाली अमिट स्याही (indelible ink) खरीदने के आदेश दिए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने बताया कि साल 2011 से इस मार्कर पेन का उपयोग किया जा रहा था ताकि स्याही लगाना आसान हो सके और कांच की बोतलों के टूटने या स्याही गिरने जैसी समस्याओं से बचा जा सके. उनका कहना था कि इन मार्कर की स्याही भी आसानी से नहीं मिटती है.

उल्लेखनीय है कि बीते सप्ताह 15 जनवरी को, नौ साल में पहली बार हुए, 29 नगर निगमों के लिए हुए मतदान के दौरान मतदाताओं और विपक्षी दलों ने चिंता जताई थी कि इस मार्कर पेन की स्याही के निशान आसानी से मिटाए जा सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यदि स्याही एक बार मिट जाए, तो इससे मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी हो सकती है.

हालांकि सत्ताधारी गठबंधन और चुनाव आयोग ने मतदान के दिन इन दावों का खंडन किया था.

वाघमारे ने कहा है कि स्याही के निशान के साथ छेड़छाड़ करना एक संज्ञेय अपराध है और उन्होंने मतदाताओं से अफवाहों पर ध्यान न देने का आग्रह किया.

अब इस विवाद को सुलझाते हुए राज्य चुनाव आयोग ने मैसूर पेंट्स को 5-सीसी की स्याही की 1.5 लाख बोतलों और 10-सीसी स्याही की 75,000 बोतलों का ऑर्डर दिया है. इनका उपयोग फरवरी में होने वाले पंचायत चुनावों में किया जाएगा.

यह निर्णय नगर निगम चुनावों के बाद और राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग पर समय रहते कार्रवाई न करने के आरोपों के बीच लिया गया है. हाल ही में संपन्न नगर निगम चुनावों में भाजपा और उसके सहयोगियों ने अधिकांश सीटों पर जीत हासिल की है.

उधर, आम आदमी पार्टी (आप) के नेता विजय कुंभार ने नई स्याही के इस्तेमाल के फैसले को ‘देर से लिया गया कदम’ बताया और कहा कि स्याही के जल्दी मिटने की खबरें व्यापक स्तर पर मिली थीं. उन्होंने मार्कर पेन को दी गई शुरुआती मंजूरी और इसके संभावित दुरुपयोग की गहन जांच की मांग की है.