भारत ने बांग्लादेश में तैनात भारतीय राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया

भारत ने बांग्लादेश को ‘नॉन-फैमिली’ राजनयिक तैनाती श्रेणी में शामिल कर लिया है, जिसके तहत वहां सेवारत भारतीय अधिकारी परिवार के बिना सेवा देंगे. यह फैसला ऐसे समय आया है जब शेख़ हसीना के सत्ता से हटने, कूटनीतिक तनातनी और क्रिकेट संबंधी विवादों के चलते भारत-बांग्लादेश संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं.

बांग्लादेश के झंडे की फ़ाइल तस्वीर. (फोटो: मोस्ताक चौधरी/फ़्लिकर. CC BY 2.0.)

नई दिल्ली: भारत ने इस साल की शुरुआत से बांग्लादेश को ‘नॉन-फैमिली’ (परिवार के बिना) राजनयिक तैनाती की श्रेणी में शामिल कर लिया है. इसके तहत बांग्लादेश में सेवारत भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों को अब अपने जीवनसाथी और बच्चों के बिना ही सेवा देनी होगी.

इस फैसले के साथ बांग्लादेश उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां भारतीय कर्मियों को परिवार साथ रखने की अनुमति नहीं होती. अब तक विदेश मंत्रालय ने यह व्यवस्था केवल उच्च जोखिम वाले देशों, जैसे- इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और दक्षिण सूडान पर लागू की थी.

इस कदम की पहली जानकारी बीबीसी हिंदी ने दी थी. द वायर को भी सूत्रों ने पुष्टि की है कि यह निर्णय 1 जनवरी से प्रभावी हो चुका है. इसके तहत बांग्लादेश में तैनात अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर अपने परिवारों की भारत वापसी की व्यवस्था करने को कहा गया था. जिन अधिकारियों के बच्चे स्कूल में पढ़ रहे थे, उन्हें कुछ अतिरिक्त समय दिया गया.

पिछले सप्ताह ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और बांग्लादेश के चार वाणिज्य दूतावासों में तैनात भारतीय अधिकारियों के एक दर्जन से अधिक परिवार भारत लौट चुके हैं. इस पूरे घटनाक्रम पर न तो भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक सार्वजनिक घोषणा की गई है और न ही बांग्लादेश सरकार की तरफ़ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है.

भारत-बांग्लादेश संबंधों में यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब दोनों देशों के रिश्तों में पहले से ही तनाव बना हुआ है. छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था, जिसके बाद वे भारत आ गई थीं और फिलहाल यहीं रह रही हैं. बांग्लादेश में 12 फरवरी को नए सरकार के गठन के लिए चुनाव प्रस्तावित हैं.

तनाव दिसंबर 2025 में और बढ़ गया, जब दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब करने जैसे जवाबी कदम उठाए. भारत ने ढाका में भारत-विरोधी प्रदर्शनों के बीच अपने मिशनों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के चलते बांग्लादेश के उच्चायुक्त को दो बार तलब किया. इसके जवाब में बांग्लादेश ने भारत में अपने राजनयिक ठिकानों पर हुए हमलों को लेकर भारत के राजदूत को बुलाया.

कूटनीतिक खींचतान के बीच खेल कूटनीति भी तनाव का कारण बनी. बांग्लादेश ने इस साल भारत में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के मैच खेलने से इनकार कर दिया. यह फैसला भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा कोलकाता नाइट राइडर्स फ्रेंचाइज़ी से बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्ताफ़िज़ुर रहमान को गैर-क्रिकेट कारणों से रिलीज़ किए जाने के बाद लिया गया. इसके बाद ढाका ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए टूर्नामेंट को श्रीलंका में आयोजित करने की मांग की.

इन तमाम घटनाक्रमों के बीच बांग्लादेश को ‘नॉन-फैमिली’ तैनाती की श्रेणी में डालने का भारत का फैसला दोनों देशों के रिश्तों में बढ़ती दूरी का एक और संकेत माना जा रहा है.