नई दिल्ली: राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने बुधवार (21 जनवरी) को घोषणा की कि वह राज्य विधानसभा के आगामी बजट सत्र में एक विधेयक पेश करेगी, जिसके ज़रिये सरकार को राज्य के कुछ इलाकों को ‘अशांत क्षेत्र (डिस्टर्ब्ड एरिया)’ घोषित करने, ‘जनसांख्यिकीय असंतुलन’ से निपटने और संपत्तियों की ‘मजबूरन बिक्री’ को रोकने का अधिकार मिलेगा.
इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान कांग्रेस ने प्रस्तावित कानून को संविधान के खिलाफ बताया है और आरोप लगाया है कि भाजपा राजस्थान में ‘गुजरात मॉडल’ लागू कर धर्म के आधार पर नफ़रत फैलाने की कोशिश कर रही है.
फिलहाल पड़ोसी राज्य गुजरात में ऐसा ही एक कानून लागू है, जिसका इस्तेमाल समय-समय पर मुस्लिम परिवारों को हिंदू-बहुल इलाकों में बसने से रोकने के लिए किए जाने के आरोप लगते रहे हैं.
‘पूर्व अनुमति के बिना संपत्ति का कोई भी हस्तांतरण शून्य माना जाएगा’
बुधवार को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद राजस्थान के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने पत्रकारों को बताया कि प्रस्तावित विधेयक का नाम द राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविज़न फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम द प्रिमाइसेज़ इन डिस्टर्ब्ड एरियाज़ बिल, 2026 रखा गया है.
पटेल ने कहा, ‘राज्य के कई क्षेत्रों में किसी विशेष समुदाय की आबादी बढ़ने, जनसांख्यिकीय असंतुलन, सांप्रदायिक तनाव और सार्वजनिक सौहार्द की कमी का असर देखने को मिल रहा है. कई इलाकों में दंगे, भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाएं होती हैं, जिससे अशांति फैलती है और लंबे समय से रहने वाले लोग मजबूरी में अपनी संपत्ति बेहद कम दामों पर बेचने को विवश हो जाते हैं. इससे क्षेत्र की जनसंख्या संरचना बदल रही है.’
पटेल ने दावा किया कि इन समस्याओं से निपटने के लिए विशेष कानून की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी.
उन्होंने कहा, ‘सभी की यह राय थी कि सरकार को सांप्रदायिक तनाव, जनसांख्यिकीय असंतुलन जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून लाना चाहिए. आज माननीय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है.’
पटेल के मुताबिक, यह विधेयक सरकार को यह अधिकार देगा कि वह दंगे, भीड़ द्वारा अशांति, सार्वजनिक प्रशासन में बाधा, जनसांख्यिकीय असंतुलन या अनुचित बसावट जैसे कारणों के आधार पर किसी क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित कर सके.
उन्होंने कहा, ‘अगर एक बार किसी इलाके को अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया गया, तब वहां बिना पूर्व अनुमति के संपत्ति का कोई भी हस्तांतरण शून्य माना जाएगा. यदि कोई व्यक्ति संपत्ति का हस्तांतरण करना चाहता है, तो उसे कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी, आमतौर पर ज़िला कलेक्टर (डीएम), से अनुमति लेनी होगी. यह अनुमति आवेदन और जांच के बाद दी जा सकेगी.’
पटेल ने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून का उल्लंघन करने पर तीन से पांच साल तक की सज़ा का प्रावधान है और ऐसे अपराध गैर-जमानती होंगे.
पटेल ने इस विधेयक को ‘प्रगतिशील’ करार देते हुए बताया, किसी क्षेत्र को तीन साल के लिए अशांत घोषित किया जाएगा. जांच के बाद तीन साल से पहले भी यह दर्जा हटाया जा सकता है या फिर जांच के बाद इसे आगे बढ़ाया जा सकता है.
राजस्थान सरकार इस कानून का ज़ोरदार समर्थन कर रही है, लेकिन गुजरात में ऐसा कानून पिछले 40 वर्षों से लागू है, जो अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के घेट्टोकरण (ghettoisation) को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.
द वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में गुजरात की एक 15 वर्षीय मुस्लिम किशोरी ने आत्महत्या कर ली थी. बताया गया था कि अपने ही मोहल्ले में घर खरीदने के बाद उसके परिवार को महीनों तक गुजरात के डिस्टर्ब्ड एरियाज़ एक्ट के नाम पर उत्पीड़न, हिंसा और धमकियों का सामना करना पड़ा था.
परिजनों का आरोप था कि पड़ोसी इस कानून के तहत उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दे रहे थे, जिससे वे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से भी हिचकते रहे और डर व उत्पीड़न का माहौल बना रहा.
‘सरकार की नाकामी छिपाने के लिए गुजरात मॉडल का डर ला रहे हैं’
विपक्षी दल कांग्रेस ने राजस्थान सरकार के इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर राज्य में गुजरात मॉडल लागू किया जा रहा है.
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, ‘यह सरकार पर्ची से बनी सरकार है. मैं बार-बार कहता हूं कि यह सरकार अपनी अंतरात्मा से काम नहीं करती. इन्हें पर्ची मिलती है और पिछले दो साल से वही पर्ची पढ़ी जा रही है. यह गुजरात मॉडल की पर्ची है जो दिल्ली से आई है. यह न तो सरकार की भाषा है और न ही संविधान की, बल्कि एक राजनीतिक एजेंडे की भाषा है.’
दिसंबर 2023 में भाजपा के सत्ता में आने और पहली बार विधायक बने भजनलाल शर्मा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व दिल्ली से राजस्थान की सरकार चला रहा है. इसी संदर्भ में कांग्रेस ‘पर्ची सरकार’ शब्द का इस्तेमाल करती रही है.
भाजपा सरकार राजस्थान जैसे शांति प्रिय प्रदेश को अशांत बनाने के इरादे से डर, भय और असंवैधानिक कार्यों वाला ‘गुजरात मॉडल’ यहां थोपने पर आमादा है।
जिस प्रदेश में संविधान और कानून है, भाजपा वहां डर और धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए एवं निजी संपत्तियों पर प्रशासन को बैठाने के लिए काला… pic.twitter.com/f7cc2ajULg
— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) January 21, 2026
डोटासरा ने सवाल उठाया, ‘आप अशांत क्षेत्र कैसे तय करेंगे? जनसांख्यिकी का फैसला कैसे करेंगे? यह किस संविधान में लिखा है? आप शांति का माहौल नहीं, बल्कि डर का माहौल बनाना चाहते हैं. आप दंगे रोकना नहीं, बल्कि भड़काना चाहते हैं. सरकार की नाकामी छिपाने के लिए गुजरात मॉडल का डर ला रहे हैं, जहां न शांति है और न ही संविधान. आज कहेंगे इलाका अशांत है, कल ज़िला अशांत कहेंगे और परसों पूरी लोकतंत्र को अशांत घोषित कर देंगे. उनकी यह कोशिश संविधान के खिलाफ है.’
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून संविधान के अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन है, जो हर व्यक्ति को संपत्ति का अधिकार देता है, और अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन है जो समानता का अधिकार सुनिश्चित करता है.
डोटासरा ने कहा, ‘दंगे रोकने के लिए पहले से ही कानून मौजूद हैं, आईपीसी और सीआरपीसी में प्रावधान हैं. इसके बावजूद आप किसी व्यक्ति की संपत्ति पर फैसला करने के लिए नौकरशाह को बैठाना चाहते हैं.’
उनका आरोप है कि इस कानून से निवेशक राजस्थान आने से कतराएंगे, अशांत घोषित इलाकों में विकास रुकेगा, ज़मीन के दाम गिरेंगे और सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचेगा.
डोटासरा ने कहा, ‘इनका मकसद सिर्फ धार्मिक हिंसा फैलाना और उससे राजनीतिक फ़ायदा उठाना है.’
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
