बुल्ले शाह दरगाह में तोड़फोड़: ‘सौहार्द के प्रतीकों को तोड़ना, ग़रीबी और बेरोज़गारी पर सवालों के जवाब देने से आसान है’

उत्तराखंड के मसूरी में 18वीं सदी के पंजाबी सूफ़ी संत, कवि और समाज सुधारक बाबा बुल्ले शाह की करीब सौ साल पुरानी दरगाह में शनिवार देर रात कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई. इसकी निंदा करते हुए जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि सौहार्द के प्रतीकों को तोड़ना, बढ़ती ग़रीबी, बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी और युवा पीढ़ी के निराशाजनक भविष्य पर उठ रहे सवालों का जवाब देने से कहीं ज़्यादा आसान है.

मसूरी में बुल्ले शाह दरगाह में तोड़फोड़ के वीडियो का स्क्रीनग्रैब

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने मसूरी में 18वीं सदी के सूफ़ी कवि और दार्शनिक बाबा बुल्ले शाह की दरगाह में हुई तोड़फोड़ की निंदा करते हुए भाजपा नेताओं पर जानबूझकर पाखंड करने का आरोप लगाया है.

रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के मसूरी में 18वीं सदी के पंजाबी सूफ़ी संत, कवि और समाज सुधारक बाबा बुल्ले शाह की करीब सौ साल पुरानी दरगाह में शनिवार देर रात (24 जनवरी) कथित तौर पर तोड़फोड़ की गई. इस मामले में तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.

अधिकारियों के अनुसार, हमले में पास की दो अन्य दरगाहें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि दान पेटी भी तोड़ दी गई. इस मामले में 25 से 30 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है.

महबूबा मुफ़्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, ‘भाजपा नेता विदेशों में मस्जिदों में पोज़ देते हैं और मध्य-पूर्वी शेख़ों के लिए रेड कार्पेट बिछाते हैं. लेकिन अपने देश में वे सूफ़ी कवि बाबा बुल्ले शाह की दरगाह में तोड़फोड़ होते हुए खुशी-खुशी देखते हैं. यह पाखंड संयोग नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया है.’

उन्होंने आगे कहा कि सौहार्द के प्रतीकों को तोड़ना, बढ़ती ग़रीबी, बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी और युवा पीढ़ी के निराशाजनक भविष्य पर उठ रहे सवालों का जवाब देने से कहीं ज़्यादा आसान है.

इस मामले में हथौड़ों और लोहे की छड़ों से दरगाह को नुकसान पहुंचाने के आरोप में हरिओम, शिवायुन और श्रद्धा नामक तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है.

एफआईआर के अनुसार, मसूरी के विनबर्ग-एलेन स्कूल परिसर में स्थित इस दरगाह को हथौड़ों और लोहे की छड़ों से निशाना बनाया गया. ढांचे के भीतर रखी धार्मिक ग्रथों को भी नुकसान पहुंचाया गया.

आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, जो सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने, सार्वजनिक शांति भंग करने और किसी धर्म का अपमान करने की नीयत से पूजा स्थल को अपवित्र करने से संबंधित हैं. फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है.

घटना के तुरंत बाद बाबा बुल्ले शाह समिति के सदस्य मौके पर पहुंचे और इसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की सोची-समझी कोशिश बताया. समिति के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा, ‘यह घटना सिर्फ एक धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने की नहीं है, बल्कि मसूरी के शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की साजिश है.’

उन्होंने कहा, ‘दरगाह एक निजी स्कूल की जमीन पर स्थित है और स्कूल प्रशासन ने वर्षों पहले इसके निर्माण की अनुमति दी थी. प्रशासनिक जांच में पहले ही यह स्पष्ट हो चुका है कि यहां किसी तरह का अतिक्रमण नहीं है.’

बुल्ले शाह को व्यापक रूप से सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. ईटीवी भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने मसूरी स्थित दरगाह के विस्तार का विरोध किया था और इसे सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बताया था, हालांकि दरगाह समिति ने इन आरोपों को खारिज किया था.

पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मनमोहन सिंह ने इस तोड़फोड़ को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मसूरी लंबे समय से भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं शहर की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और प्रशासन से दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों.

बाबा बुल्ले शाह के अनुयायियों ने इस कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि यह दरगाह हमेशा प्रेम, मानवता और भाईचारे का संदेश देती रही है और विभिन्न धर्मों के लोग यहां श्रद्धा के साथ आते हैं.

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे.

इस बीच, हिंदू रक्षा दल के प्रमुख पिंकी चौधरी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर उत्तराखंड इकाई की ‘सराहना’ करते हुए दरगाह में तोड़फोड़ की घटना का वीडियो साझा किया. उन्होंने लिखा, ‘मेरी हिंदू रक्षा दल की टीम ने आज बुल्ले शाह को, जो 70 वर्षों से देवभूमि में थे, वापस पाकिस्तान भेज दिया.’

बता दें कि पाकिस्तान के कसूर में स्थित बाबा बुल्ले शाह की दरगाह में भी दुनिया भर से अनुयायी पहुंचते हैं.