मणिपुर: कुकी-नगा तनाव जारी, संगठनों ने शांति बनाए रखने की अपील की

मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले में नगा और कुकी-ज़ो समूहों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. 26 जनवरी को यह तब और भड़क गया, जब कुकी-ज़ो के कुछ घरों को जला दिया गया. एक नगा उग्रवादी संगठन के धड़े - ज़ेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट - ने इसकी ज़िम्मेदारी ली. दोनों समुदायों के संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर शांति बनाए रखने और समुदायों के बीच किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील की है.

(प्रतीकात्मक फोटो: X/@manipur_police)

नई दिल्ली: पिछले ढाई साल से हिंसाग्रस्त मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले में नगा और कुकी-ज़ो समूहों के बीच तनाव बना हुआ है और दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. इसी बीच मंगलवार को दोनों समुदायों की दो ‘शीर्ष निकायों’ की बैठक हुई, जिसके बाद एक संयुक्त बयान जारी कर शांति बनाए रखने और समुदायों के बीच किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील की गई.

कांगपोकपी ज़िला, जिसे 2016 में सेनापति ज़िले से अलग किया गया था, मणिपुर के प्रमुख कुकी-ज़ो बहुल ज़िलों में से एक है, हालांकि यहां विभिन्न नगा जनजातियों की आबादी भी रहती है.

इस महीने ज़िले में नगा और कुकी-ज़ो समूहों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है. 26 जनवरी को यह तब और भड़क गया, जब कुछ कुकी-ज़ो घरों को जला दिया गया. एक नगा उग्रवादी संगठन के धड़े – ज़ेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट – ने इसकी ज़िम्मेदारी ली. संगठन का दावा है कि उसने उन इमारतों को जलाया, जिनका कथित तौर पर अवैध अफीम (पोपी) की खेती के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.

यह घटना उस समय हुई, जब नगा गांवों द्वारा दो सप्ताह से एक सड़क की नाकेबंदी की जा रही थी. यह सड़क कुकी-ज़ो लोगों के लिए दो प्रमुख कुकी-ज़ो बहुल ज़िलों – कांगपोकपी और चूड़ाचांदपुर – के बीच आवागमन का मार्ग है. कांगपोकपी में दोनों समुदायों के समूह एक-दूसरे पर अपनी-अपनी पैतृक भूमि पर अतिक्रमण करने के आरोप लगा रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को सेनापति स्थित यूनाइटेड नगा काउंसिल (यूएनसी) और कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम) के कार्यकारी सदस्यों ने चूड़ाचांदपुर में बैठक की. बताया गया कि यह बैठक दो नगा विधायकों — भाजपा के डिंगांगलुंग गंगमेई और नगा पीपुल्स फ्रंट के अवांगबो न्यूमाई – की पहल पर हुई.

बैठक के बाद दोनों संगठनों के अध्यक्षों द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि वे ’26 जनवरी, 2026 को ज़ेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट – कामसन समूह द्वारा दिनदहाड़े के. सोंगलुंग (भाग-द्वितीय) गांव में घरों को जलाने की घटना की कड़ी निंदा करते हैं, जिससे पीड़ितों को संपत्ति का नुकसान हुआ और दहशत फैली.’

बयान में आगे कहा गया, ‘दोनों शीर्ष निकायों ने आम जनता और सभी संबंधित पक्षों से शांति बनाए रखने और समुदायों के बीच किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील करती हैं. साथ ही सभी आदिवासी भाइयों-बहनों को आगाह किया जाता है कि वे ऐसे निराधार अफवाहें और झूठा प्रचार लिखने या पोस्ट करने से बचें, जो समुदायों के बीच दुश्मनी और तनाव पैदा करे.’

हालांकि, कांगपोकपी स्थित कुकी-ज़ो नागरिक संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू) के एक नेता ने कहा कि वे मंगलवार और बुधवार की मध्यरात्रि से 24 घंटे के ज़िला बंद की अपनी योजना पर आगे बढ़ेंगे. वहीं, फ़ुटहिल्स नगा कोऑर्डिनेशन कमेटी (एफएनसीसी) के एक नेता ने कहा कि वे अपने आंदोलन और सड़क नाकेबंदी को जारी रखेंगे.

नई सड़क तनाव का कारण

अखबार के अनुसार, दरअसल, दोनों पक्षों का दावा है कि क्षेत्र में तनाव की शुरुआत उसी सड़क के निर्माण से हुई, जिसे मणिपुर में संघर्ष शुरू होने के बाद कुकी-ज़ो समूहों ने चूड़ाचांदपुर और कांगपोकपी को जोड़ने के लिए बनाया था, ताकि मेईतेई-बहुल इलाकों से होकर जाने से बचा जा सके. संघर्ष से पहले जो मार्ग था, वह मेईतेई-बहुल घाटी से होकर गुजरता था.

एफएनसीसी के प्रवक्ता अखुई न्गाओमाई ने कहा, ‘उस सड़क का निर्माण अवैध रूप से किया गया है और वह नगा पैतृक भूमि से होकर गुजरती है. ऐसा करके वे हमारी ज़मीन पर दावा कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने कोई अनुमति नहीं ली. इसी वजह से हम इसके विरोध में हैं.’

उन्होंने दावा किया कि मौजूदा तनाव में बढ़ोतरी की एक वजह कुकी उग्रवादियों का हथियारों और वर्दी के साथ नगा इलाकों में खुलेआम घूमना है.

उन्होंने कहा, ‘कुकी और मेईतेई समुदायों के बीच चल रहे इस संघर्ष में हम एक तटस्थ समुदाय रहे हैं, लेकिन हमें उन इलाकों में इतने उग्रवादियों की बेरोकटोक आवाजाही पर चिंता है, जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आते. इस महीने की शुरुआत में उन्होंने इरेंग नगा गांव के एक नेता को धमकी भी दी थी, इसी कारण हमने यह नाकेबंदी शुरू की.’

दूसरी ओर, सीओटीयू के नेता नगा समूहों पर समस्या खड़ी करने का आरोप लगाते हैं और कहते हैं कि वे मेईतेई समूहों के साथ मिलीभगत में हैं.

सीओटीयू के प्रवक्ता थांगटिनलेन हाओकिप ने कहा, ‘अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर वे गांवों को तबाह कर रहे हैं. पिछले एक महीने में हमारे गांव वालिंटयर्स के खिलाफ भी कई घटनाएं हुई हैं. ऐसा लगता है कि ज़ेलियांग्रोंग यूनाइटेड फ्रंट नगाओं और हमारे बीच अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है, ताकि वे मेईतेई समूहों के साथ मिलकर हमें परेशान कर सकें. हमारे गांवों को निशाना बनाकर वे हमारी ज़मीन पर कब्ज़ा करना चाहते हैं.’

इन तमाम तनावों और शांति की अपील वाले संयुक्त बयान के बीच, दोनों पक्षों के नेताओं ने स्वीकार किया कि कई मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं, लेकिन फिलहाल सबसे बड़ी चिंता तनाव को और भड़कने से रोकना है.

जहां यूएनसी के एक नेता ने कहा कि कुकी-ज़ो समूहों द्वारा ज़मीन पर किए जा रहे दावे उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं, वहीं केआईएम के एक नेता ने कहा कि सड़क नाकेबंदी को लेकर उनकी प्रमुख चिंता अब भी बनी हुई है.