मध्य प्रदेश: गणतंत्र दिवस के मौक़े पर सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को कागज़ पर खाना परोसा गया

मध्य प्रदेश के मैहर ब्लॉक के भटगांव सरकारी हाई स्कूल में गणतंत्र दिवस के अवसर पर छात्रों को पुरानी किताबों से फाड़े गए पन्नों पर पूरी और हलवा परोसा गया. इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ज़िला प्रशासन ने स्कूल के वरिष्ठ अधिकारियों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

वायरल वीडियो का स्क्रीन ग्रैब. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के मैहर ज़िले से हैरान करने करने वाली ख़बर सामने आई है. यहां स्कूली बच्चों को मिड-डे मील योजना के तहत जमीन पर टाट पर बैठाकर किताबों के फटे पन्नों पर खाना परोसा गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार,यह घटना मैहर ब्लॉक के भटगांव सरकारी हाईस्कूल की है, जहां से सामने आए एक वीडियो में जमीन पर बैठे छात्रों को पुरानी किताबों से फाड़े गए पन्नों पर पूरी और हलवा परोसा गया.

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ज़िला प्रशासन हरकत में आया और स्कूल के वरिष्ठ अधिकारियों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए.

इस संबंध में मैहर जिले की कलेक्टर रानी बटाड ने बताया कि दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी गई है. अख़बार ने बटाड के हवाले से कहा, ‘हमने घटना का संज्ञान लिया है. संबंधित अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई शुरू कर दी गई है और स्कूल के प्रधानाचार्य को निलंबित करने का प्रस्ताव भेजा गया है.’

सतना और मैहर के जनसंपर्क अधिकारी राजेश सिंह के अनुसार, विस्तृत जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है.

राजेश सिंह ने बताया, ‘जिला परियोजना समन्वयक विष्णु त्रिपाठी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट के आधार पर, भटगांव सरकारी हाई स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य सुनील कुमार त्रिपाठी को निलंबित करने का प्रस्ताव रीवा मंडल आयुक्त को भेज दिया गया है.’

सिंह ने आगे कहा, ‘अनुबंध कर्मचारी और ब्लॉक संसाधन समन्वयक प्रदीप सिंह का एक महीने का वेतन काट लिया गया है.’

वहीं, ज़िला परियोजना समन्वयक विष्णु त्रिपाठी ने कहा कि विद्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह के लिए की गई व्यवस्था बुनियादी नियमों का उल्लंघन थी और इसकी जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन की थी.

त्रिपाठी के मुताबिक, ‘प्रारंभिक जांच से स्पष्ट है कि मध्याह्न भोजन की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रधानाचार्य की थी. गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर ऐसी लापरवाही अस्वीकार्य है.’

उन्होंने आगे बताया कि ज़िला प्रशासन को एक रिपोर्ट सौंपी गई है, जिसमें सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश में इस तरह का मामला सामने आया है. इससे पहले भी बीते साल श्योपुर के विजयपुर में भी इसी तरह फटे कागजों पर खाना परोसा गया था.

तब भी जांच और कार्रवाई का दावा किया गया था, लेकिन बावजूद कुछ नहीं बदला.

ज्ञात हो कि 2023 के विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने घोषणापत्र में मिड-डे मील की गुणवत्ता में सुधार करने का वादा किया था. पंचायत, महिला एवं बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभागों ने बच्चों को संतुलित पोषण सुनिश्चित करने के प्रस्ताव पर चर्चा की थी और पौष्टिक भोजन के साथ टेट्रा-पैक्ड दूध देने की बात कही थी.

हालांंकि, पौष्टिक आहार का वादा करने वाली सरकार अब बच्चों को एक साफ प्लेट तक उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रही है.