राजस्थान के सरकारी स्कूलों के 56% कमरे असुरक्षित या जर्जर: रिपोर्ट

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 65,308 सरकारी स्कूलों में से 3,768 स्कूल पूरी तरह जर्जर हैं और उन्हें उपयोग के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है. इन 65,308 स्कूलों में कुल 5,40,126 कमरे हैं, जिनमें से 2,36,441 कमरे सुरक्षित पाए गए. वहीं 83,783 कमरे पूरी तरह जर्जर और उपयोग के लिए असुरक्षित हैं, जबकि शेष 2,19,902 कमरों को बड़े पैमाने पर मरम्मत की जरूरत है.

(प्रतीकात्मक फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: राजस्थान के सरकारी स्कूलों के कुल कमरों में से 56 प्रतिशत से अधिक या तो जर्जर होकर उपयोग के लायक नहीं हैं या उन्हें बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को राजस्थान विधानसभा में कोटा दक्षिण से भाजपा विधायक संदीप शर्मा द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में शिक्षा विभाग ने कहा कि सभी सरकारी स्कूलों का तकनीकी ऑडिट संबंधित जिला कलेक्टरों के माध्यम से कराया गया है.

ऑडिट के अनुसार, राज्य के 65,308 सरकारी स्कूलों में से 3,768 स्कूल पूरी तरह जर्जर हैं और उन्हें उपयोग के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है. इन 65,308 स्कूलों में कुल 5,40,126 कमरे हैं, जिनमें से 2,36,441 कमरे सुरक्षित पाए गए. वहीं 83,783 कमरे पूरी तरह जर्जर और उपयोग के लिए असुरक्षित हैं, जबकि शेष 2,19,902 कमरों को बड़े पैमाने पर मरम्मत की जरूरत है.

इस तकनीकी ऑडिट से पहले एक प्रारंभिक ऑडिट भी किया गया था, जिसमें भी राज्य के लिए लगभग ऐसे ही आंकड़े सामने आए थे. ये दोनों ऑडिट झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद कराए गए.

गौरतलब है कि पिछले साल 25 जुलाई को राजस्थान के झालावाड़ में एक सरकारी स्कूल की छत गिर गई थी, जिसमें सात छात्रों की मौत हो गई थी और आठ घायल हो गए थे. इस घटना के बाद भजनलाल शर्मा सरकार ने जांच के आदेश दिए और पांच सरकारी शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया. इस घटना के कुछ ही दिनों बाद जैसलमेर में एक स्कूल का मुख्य गेट गिरने से एक छात्र की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए थे.

झालावाड़ घटना के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जिला कलेक्टरों के जरिए स्कूलों का सर्वे कराने के आदेश दिए थे और निर्देश दिया था कि जो इमारतें जर्जर पाई जाएं, उन्हें गिराने के लिए चिन्हित किया जाए और कक्षाएं चलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए.

इसके अलावा, सभी जर्जर और मरम्मत योग्य इमारतों को एक जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) आधारित ऐप से जोड़ने की योजना बनाई गई. सरकार ने निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए एक सेल भी गठित किया.

राजस्थान हाईकोर्ट ने भी इस मामले में स्वतःसंज्ञान लेते हुए अगले आदेश तक राज्य सरकार को जर्जर स्कूल भवनों और कमरों के उपयोग से रोक दिया है.

पूरी तरह जर्जर और अनुपयोगी घोषित किए गए 3,768 स्कूलों में से जिला समितियों ने 2,558 स्कूलों को जर्जर घोषित करने के आदेश जारी कर दिए हैं. इनमें से अब तक केवल 1,129 स्कूलों को ही गिराया गया है. 2,248 स्कूलों के लिए नए भवन निर्माण के प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन सिर्फ 123 मामलों में ही मंजूरी दी गई है.

इसके अलावा, जिन 45,365 स्कूलों में बड़े पैमाने पर मरम्मत की जरूरत है, उनमें से केवल 4,187 मामलों में ही मंजूरी दी गई है.

शिक्षा विभाग ने बताया कि मरम्मत कार्य के लिए 174 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है. साथ ही, बाढ़ और भारी बारिश से क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) के तहत जिला कलेक्टरों ने 20,383 स्कूलों में मरम्मत कार्य को मंजूरी दी है.