नई दिल्ली: अमेरिका के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थान जॉन एफ. कैनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में इस साल ब्लैक हिस्ट्री मंथ (Black History Month) से जुड़ा कोई भी आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा.
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति कई कार्यक्रमों के रद्द होने और कलाकारों द्वारा अपने इवेंट्स अन्य स्थानों पर शिफ्ट किए जाने के बाद सामने आई है.
रिपोर्ट बताती है कि फरवरी की शुरुआत के साथ ही अमेरिका भर के संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र ब्लैक हिस्ट्री मंथ के लिए अपने कार्यक्रमों की घोषणा करते हैं, लेकिन कैनेडी सेंटर की आधिकारिक ऑनलाइन कैलेंडर में इस साल ऐसे किसी भी कार्यक्रम का उल्लेख नहीं है. पहले यह संस्थान ब्लैक इतिहास से जुड़े संगीत कार्यक्रमों, श्रद्धांजलि समारोहों और अफ्रीकी-अमेरिकी कलाकारों के प्रदर्शन के लिए जाना जाता था.
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, हाल के महीनों में कैनेडी सेंटर में बड़े प्रशासनिक और संरचनात्मक बदलाव हुए हैं. फरवरी 2025 में गठित नए बोर्ड द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप को जॉन एफ. कैनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स का अध्यक्ष चुना गया था.
ट्रंप के चेयरमैन बनने के बाद यह पहला वर्ष है, जब ब्लैक हिस्ट्री मंथ के दौरान केंद्र में कोई भी आधिकारिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा रहा है. इस कारण यह फैसला केवल सांस्कृतिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व भी हासिल कर लेता है.
कब कार्यक्रम रद्द होने शुरू हुए?
दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नियुक्त ट्रस्टीज़ के बोर्ड ने संस्थान के नाम में ‘डोनाल्ड जे. ट्रंप’ जोड़ने का प्रस्ताव दिया था, जिसके बाद कई कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने अपने कार्यक्रम रद्द कर दिए या उन्हें अन्य स्थानों पर ले जाने का फैसला किया.
हालांकि, अब संस्थान का पूरा नाम ‘डोनाल्ड जे. ट्रंप एंड द जॉन एफ. कैनेडी मेमोरियल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स’ हो गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि परंपरागत रूप से कैनेडी सेंटर में होने वाला ‘Living the Dream’ कॉन्सर्ट, जो मार्टिन लूथर किंग जूनियर की विरासत से जुड़ा एक अहम कार्यक्रम रहा है, इस साल केंद्र के बाहर आयोजित किया जा रहा है. इसी तरह, हावर्ड गॉस्पेल कॉयर और अन्य संस्थानों ने भी अपने कार्यक्रम कैनेडी सेंटर से हटाकर वाशिंगटन डीसी के अन्य सांस्कृतिक स्थलों पर स्थानांतरित कर दिए हैं.
कैनेडी सेंटर प्रशासन ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज़ किया है. हालांकि, संस्थान के प्रमुख डेबोरा रटर पहले यह कह चुकी हैं कि केंद्र अब ऐसे लोकप्रिय और व्यावसायिक कार्यक्रमों पर ज़्यादा ध्यान देना चाहता है, जिनके लिए प्रायोजक आसानी से उपलब्ध हों.
वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, इन घटनाक्रमों ने अमेरिका में सांस्कृतिक संस्थानों की भूमिका, कला की राजनीति और ब्लैक इतिहास के सार्वजनिक प्रतिनिधित्व को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. आलोचकों का कहना है कि ब्लैक हिस्ट्री मंथ जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर किसी राष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र का चुप रहना एक गंभीर संदेश देता है.
