नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में लगातार दूसरे दिन भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उद्धृत पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे के भारत-चीन संघर्ष पर लिखे गए अप्रकाशित संस्मरण को लेकर हंगामा देखने को मिला.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हंगामे के मद्देनज़र मंगलवार (3 फरवरी) को लोकसभा में आठ कांग्रेस सांसदों को अनुशासनहीनता के लिए निलंबित कर दिया गया. इसे लेकर कांग्रेस ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया है.
VIDEO | Parliament Budget Session: Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, Congress MP Priyanka Gandhi, and other leaders stage a protest at the Parliament premises over the resolution suspending eight Opposition members for the remaining part of the session.
(Full video available on PTI… pic.twitter.com/XPA0dJCcS4
— Press Trust of India (@PTI_News) February 3, 2026
मालूम हो कि यह विवाद कारवां पत्रिका में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ पर आधारित लेख की सामग्री से जुड़ा हुआ है, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख के उस विवरण का जिक्र है, जिसमें यह सुझाव दिया गया था कि 2020 में भारत और चीन के बीच टकराव के दौरान राजनीतिक नेतृत्व अनिर्णायक प्रतीत हुआ था.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को भी सदन में कारवां पत्रिका के लेख का हवाला देने की कोशिश की, जिस पर सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति जताई गई.
इस दौरान राहुल गांधी ने कहा, ‘राष्ट्रपति के भाषण में एक बहुत ही ज़रूरी बात राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है- पाकिस्तानियों, चीनियों और हमारे बीच संबंध के बारे में है. इस लेख में एक बहुत ही ज़रूरी बात है जिसे मैंने प्रमाणित किया है. इसमें पीएम के रिएक्शन के बारे में बताया गया है. हमारे राष्ट्रपति का भाषण उस रास्ते के बारे में था जो भारत को अपनाना है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘विदेश मामलों में मुख्य मुद्दा चीन और अमेरिका के बीच टकराव है. यह हमारे राष्ट्रपति के भाषण का मुख्य हिस्सा है. मैं बस इतना कह रहा हूं कि मुझे चीन और भारत के बीच जो हुआ और हमारे पीएम ने उस पर कैसे रिएक्ट किया, उसके बारे में एक बयान देने दीजिए. मुझे क्यों रोका जा रहा है?’
मंगलवार को जब राहुल गांधी सदन में बिना सीधे पत्रिका को कोट किए बोलने की कोशिश कर रहे थे, तभी आसन पर बैठे तेलुगु देशम पार्टी के सांसद कृष्णा प्रसाद तेनेत्ती ने आपत्ति जताई और अगले विपक्षी नेता को बोलने के लिए कहा. इस बीच विपक्षी सदस्यों को विरोध में नारे लगाते और कागज़ फेंकते देखा गया, जिसके बाद सदन को दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
जब दोपहर 3 बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई, तो आसन पर बैठे भारतीय जनता पार्टी सांसद दिलीप सैकिया ने कहा कि कांग्रेस सांसदों- अमरेंद्र सिंह राजा वारिंग, गुरदीप सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पाडोले, किरण कुमार रेड्डी, एस. वेंकटरमन और मणिक्कम टैगोर ने नारे लगाए और सदन के वेल में कागज़ के फटे हुए टुकड़े फेंके.
इसके बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन सदस्यों को सस्पेंड करने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया और सदन को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया.
सदन को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए: किरेन रिजिजू
राहुल गांधी के ऐसा बोलने के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदन को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए. इस मुद्दे पर कल चेयर ने फैसला दिया था. और जब फैसला दिया जा चुका है तो ये बार-बार उसी मुद्दे का हवाला नहीं दे सकते हैं.
इसके बाद पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस और जोरदार हंगामे के बाद सदन को स्थगित कर दिया गया.
संसद परिसर के बाहर रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी की वजह से बाकी सांसदों को बोलने का मौका नहीं मिल पा रहा है और राहुल गांधी जिस मुद्दे पर बोलना चाह रहे हैं उस पर स्पीकर का फैसला आ चुका है.
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी विषय पर नहीं आते हैं और अप्रकाशित किताब का हवाला देने पर तुले हुए हैं.
#WATCH | Delhi: Union Minister Kiren Rijiju says, “I have just told the leaders of Congress that LoP Rahul Gandhi can continue his speech. However, what the former army chief did not say, what is not true, and what is not permitted under the rules should not be forced upon the… pic.twitter.com/svTN5g4oF0
— ANI (@ANI) February 3, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी ट्रेड डील में देश बेच दिया है: राहुल गांधी
इसके बाद संसद के बाहर राहुल गांधी ने पत्रकारों से कहा, ‘मैं तीन चीज़ें बोलना चाहता हूं. मोदी जी घबराए हुए हैं. जो ट्रेड डील चार महीने से रुकी हुई थी, किसी न किसी कारण नरेंद्र मोदी जी ने उस डील को साइन कर दिया. नरेंद्र मोदी जी पर भयंकर प्रेशर है. हज़ारों करोड़ों रुपयों का जो नरेंद्र मोदी जी की इमेज का गुब्बारा है वो फूट सकता है. मुख्य बात यह है कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने सुलह कर ली है.’
PM Modi is Compromised.
PM is too afraid to let me speak in Parliament about Naravane, Epstein Files and how he has surrendered on Tariffs. pic.twitter.com/V1J6yxZDM2
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 3, 2026
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी ट्रेड डील में देश बेच दिया है. उन्होंने कहा, ‘हिंदुस्तान के जो किसान हैं, आप सब समझिए कि इस ट्रेड डील में आपकी मेहनत को, खून-पसीने को बेच दिया है, क्योंकि वे कॉम्प्रोमाइज्ड हैं.’
राहुल ने आगे कहा- ‘नरेंद्र मोदी डरे हुए हैं, क्योंकि जिन्होंने उनकी इमेज बनाई वे अब यह इमेज तोड़ रहे हैं. अमेरिका में अडानी पर केस है, यह असल में मोदी पर केस है. वो मोदी जी के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर को टारगेट कर रहे हैं.’
राहुल ने आरोप लगाया कि एपस्टीन फाइल्स में और भी बहुत कुछ है जो अमेरिका ने अभी तक रिलीज नहीं किया है. उसकी वजह से भी पीएम पर प्रेशर है. ये दो प्रेशर पॉइंट्स हैं. देश को यह समझना चाहिए कि प्रधानमंत्री कॉम्प्रोमाइज्ड हैं.
राहुल ने कहा कि इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति के भाषण पर नेता विपक्ष को बोलने नहीं दिया गया है. जनता को इस बारे में सोचने की जरूरत है.
सोमवार को भी सदम में हंगामा हुआ था
गौरतलब है कि इससे पहले भी लोकसभा में सोमवार (2 फरवरी) को काफी हंगामा देखने को मिला था. यह हंगामा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कारवां पत्रिका में प्रकाशित एमएम नरवणे की किताब से जुड़े कुछ अंश पढ़ने को लेकर शुरू हुआ था.
उल्लेखनीय है कि जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा के प्रकाशन को फिलहाल रोक दिया गया है.
पहले यह किताब दिसंबर 2023 में प्रकाशित होने वाली थी, फिर बताया गया कि 15 जनवरी 2024 को रिलीज़ होगी, लेकिन जनवरी 2024 में अमेज़ॉन वेबसाइट पर इसकी रिलीज़ की तारीख़ 30 अप्रैल के आसपास दिखाई देने लगी. तब द वायर ने एक रिपोर्ट में बताया था कि इस किताब में कई ख़ुलासे शामिल हैं, इसलिए इसकी समीक्षा रक्षा और विदेश मंत्रालय द्वारा की जा रही है.
ख़बरों के अनुसार, किताब में कई रहस्योद्घाटन शामिल हैं, जिनमें पूर्व सेना प्रमुख नरवणे विस्तार से बता रहे हैं कि कैसे उन्हें अगस्त 2020 में चीनी सेना की मूवमेंट से निपटने वाली कठिन परिस्थितियां सौंपी गई थीं और कैसे अग्निपथ योजना ने सशस्त्र बलों को आश्चर्य में डाल दिया था.
जनरल नरवणे 30 अप्रैल 2022 को सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे और तब से उन्होंने पटियाला के पंजाबी विश्वविद्यालय से रक्षा और रणनीतिक अध्ययन में पीएचडी पूरी की है.
