अब महात्मा गांधी का हवाला देते हुए बोले असम सीएम- ‘मिया’ के ख़िलाफ़ असहयोग की ज़रूरत

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा लगातार बांग्ला भाषी मुसलमानों को निशाना बनाते रहे हैं. अब उन्होंने महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा और असहयोग का हवाला देते हुए कहा कि 'उनके लिए ऐसा माहौल बनाया जाए कि वे असम में रह न सकें. उन्हें ज़मीन मत दो, उन्हें वाहन मत दो, उन्हें रिक्शा मत दो, उन्हें ठेले मत दो. तब बांग्लादेशी खुद ही चले जाएंगे.'

हिमंता बिस्वा शर्मा. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने बांग्ला भाषी मुसलमानों, जिन्हें वह बांग्लादेश से अवैध रूप से आए हुए लोग बताते हैं, के खिलाफ अपने बयानों को जारी रखते हुए बुधवार (4 जनवरी) को महात्मा गांधी के ‘सविनय अवज्ञा और असहयोग’ हवाला दिया.

उन्होंने कहा कि ‘असहयोग’ और ‘सविनय अवज्ञा’ ऐसे तरीके हैं जिनसे ऐसा माहौल बनाया जा सकता है कि वे असम में रह ही न सकें.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शिवसागर ज़िले में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘हर दिन हम 20 या 30 लोगों को बाहर भेजते हैं. लेकिन हम उन्हें लाइन में खड़ा करके ट्रेन में बिठा कर बांग्लादेश नहीं भेज सकते… हमारे भेजने के बजाय ऐसा इंतज़ाम होना चाहिए कि वे खुद ही चले जाएं. अब हमने 1.5 लाख बीघा ज़मीन पर अतिक्रमण हटाया है. उन्हें ज़मीन नहीं मिलेगी, तो उन्हें असम छोड़कर जाना ही पड़ेगा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मेरा विचार है कि ऐसा माहौल बनाया जाए कि वे असम में रह न सकें. उन्हें ज़मीन मत दो, उन्हें वाहन मत दो, उन्हें रिक्शा मत दो, उन्हें ठेले मत दो. तब बांग्लादेशी खुद ही चले जाएंगे… हर दिन 20–25 लोगों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है; किसी में अदालत जाने की हिम्मत नहीं है.’

उन्होंने कहा कि नीति लोगों को बांग्लादेश की ओर ‘धकेलने’ की है. ‘और जो लोग अभी अंदर हैं, उनके लिए ऐसा तंत्र बनाओ कि वे यहां रह ही न सकें. यही महात्मा गांधी की सविनय अवज्ञा और असहयोग है. महात्मा गांधी ने हमें दो चीज़ें सिखाईं: असहयोग और सविनय अवज्ञा. जब असम के लोग असहयोग और सविनय अवज्ञा करेंगे, तो वे अपने-आप चले जाएंगे. रिक्शे पर बैठने से पहले सोचो कि किसका रिक्शा ले रहे हो.’

इसके बाद उन्होंने ‘मिया’, जिन्हें वह बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी बताते हैं और मुसलमानों के बीच अंतर करने की बात कही.

उल्लेखनीय है कि ‘मिया’ बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल होने वाला एक अपमानजनक शब्द है. असम की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी अक्सर इस समुदाय को ‘घुसपैठिए’ कहती रही है. इन पर आरोप लगाया जाता रहा है कि वे मूल निवासियों के संसाधनों, नौकरियों और ज़मीन पर कब्ज़ा कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘मेरा तरीका सविनय अवज्ञा और असहयोग है. अगर मिया बांग्लादेशी हैं, तो उन्हें शरण मत दो. मिया और मुसलमान में फर्क समझो. मिया के नाम पर मुसलमानों को परेशान मत करो, मुसलमानों के नाम पर मियाओं को संरक्षण मत दो. और जो मिया बांग्लादेश से आते हैं, उनसे हमें कोई संबंध नहीं रखना चाहिए.’

लगातार बांग्ला भाषी मुसलमानों को निशाना बनाते रहे हैं हिमंता बिस्वा शर्मा

बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा लगातार बांग्ला भाषी मुसलमानों पर निशाना साधते रहे हैं. मुख्यमंत्री ने पहले दावा किया था कि राज्य के मूल निवासी समुदाय ‘एक धर्म’ के लोगों के ‘आक्रमण’ का सामना कर रहे हैं, जो कथित तौर पर अलग-अलग इलाकों की ज़मीनों पर अतिक्रमण कर उन इलाकों की जनसांख्यिकी बदलने की कोशिश कर रहे हैं.

शर्मा ने इसी हफ्ते 27 जनवरी को कहा था, ‘कांग्रेस मुझे जितना चाहे गाली दे, मेरा काम मिया लोगों की ज़िंदगी मुश्किल बनाना है.’ उन्होंने लोगों से समुदाय को किसी भी तरह परेशान करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा था, ‘रिक्शा में अगर किराया 5 रुपये है, तो उन्हें 4 रुपये दीजिए. जब तक उन्हें परेशानी नहीं होगी, वे असम नहीं छोड़ेंगे… ये कोई मुद्दे नहीं हैं.’

29 जनवरी को शर्मा ने कहा था कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विशेष पुनरीक्षण (एसआर) प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग (ईसी) के पास 5 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘अवैध विदेशियों के खिलाफ हमारा रुख बिल्कुल साफ है. इसी वजह से हमारे कार्यकर्ताओं ने 5 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की हैं. नहीं तो वे सभी ‘स्वदेशी’ (नागरिक) बन जाते. असम में ऐसा कोई इलाका नहीं है जो अवैध विदेशियों से सुरक्षित हो.’

उनके नफरती बयानों को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उसके बाद मुख्यमंत्री ने हर्ष मंदर खिलाफ सौ मुकदमे करने की धमकी दी थी.

शर्मा ने 25 जनवरी 2026 को दावा किया कि राज्य में केवल ‘मिया’ यानी बांग्ला भाषी मुसलमानों को ही बेदखली अभियान ते तहत निशाना बनाया जा रहा है, असमिया लोगों को नहीं.

इससे पहले बीते साल जुलाई में उन्होंने कहा था कि जनगणना में असमिया की बजाय बांग्ला भाषा चुनने वालों से बांग्लादेशियों की पहचान में मदद मिलेगी. यह बात उन्होंने राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय के एक वर्ग द्वारा बांग्ला को जनगणना में अपनी मातृभाषा के रूप में सूचीबद्ध करने की मांग का जवाब देते हुए कहा था.

जुलाई 2025 में धुबरी ज़िला प्रशासन ने धुबरी ज़िले के बिलाशीपारा में असम सरकार द्वारा प्रस्तावित 3,400 मेगावाट के थर्मल पवार प्लांट स्थल पर 2,000 से ज़्यादा मिया मुसलमानों के घरों को गिरा दिया. शर्मा ने अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ ‘लड़ाई’ को उचित ठहराया था, भले ही वे ‘विदेशी’ न हों, जब उन्होंने एक एक्स पोस्ट में लिखा था, ‘हमें अपने हक़ के लिए लड़ने से मत रोको. हमारे लिए यह हमारे अस्तित्व की आखिरी लड़ाई है.’

इससे पहले उसी साल मई में हिमंता के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने मुस्लिम बहुल इलाकों में रहने वाले ‘मूल निवासियों’ को बंदूक के लाइसेंस देने की योजना लाई थी. इस कदम को उचित ठहराते हुए, शर्मा ने कहा था, ‘बंदूक ज़रूरी है. बंदूक के बिना, आप दक्षिण सलमारा और मनकाचर जैसी जगहों पर कैसे रह पाएंगे? जब आप वहां जाएंगे तो आपको समझ आ जाएगा.’

फरवरी 2025 में असम विधानसभा ने 90 वर्षों से चली आ रही मुस्लिम विधायकों को शुक्रवार (जुमे) को नमाज पढ़ने के लिए दिए जाने वाले दो घंटे के ब्रेक को खत्म कर दिया था.

जुलाई 2023 में असम में सब्जियों की बढ़ी कीमतों के लिए ‘मिया’ लोगों को दोषी ठहराने के लिए हिमंता बिस्वा शर्मा की काफी आलोचना की गई थी. उन्होंने कथित तौर पर सब्जियों की आसमान छूती कीमतों के लिए ‘मिया’ किसानों और व्यापारियों के एकाधिकार को जिम्मेदार ठहराया था. साथ ही असमिया युवाओं से ‘मिया’ को व्यवसाय से बाहर करने के लिए खेती और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को अपनाने का आग्रह किया था.