नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत में 93,000 से अधिक स्कूल स्थायी रूप से बंद हो गए हैं. यह जानकारी लोकसभा में दी गई.
राजस्थान के सीकर से सीपीआई (एम) सांसद अमरा राम के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सोमवार (2 फरवरी) को लोकसभा में बताया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 93,000 से अधिक स्कूल बंद हुए हैं, जिनमें से अधिकांश पहले छह वर्षों में बंद हुए.
सरकार द्वारा संसद में दिए गए लिखित जवाब के मुताबिक, दशक के पहले अवधि में स्कूल बंद होने की संख्या सबसे अधिक रही. 2014-15 से 2019-20 के बीच 70,000 से ज्यादा स्कूल बंद हुए – जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. इसके बाद 2020-21 से 2024-25 के बीच 18,727 और स्कूल बंद हुए.
2014-15 से 2019-20 के बीच उत्तर प्रदेश में 24,590 स्कूल बंद हुए – जो देश में सबसे ज्यादा हैं. इसके बाद मध्य प्रदेश में 22,438 स्कूल बंद हुए, जो दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भी बड़ी संख्या में स्कूल बंद हुए.
आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 और 2019-20 के बीच सबसे ज़्यादा स्कूल बंद होने के साथ झारखंड में 5,000 से ज़्यादा, राजस्थान में 2,500 से ज़्यादा और महाराष्ट्र में लगभग 2,000 स्कूल बंद हुए.
इसी तरह पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में 2014-15 और 2019-20 के बीच लगभग 1,000 स्कूल बंद हुए.
जबकि जम्मू और कश्मीर में 2020-21 के बीच 4,000 से ज़्यादा स्कूल बंद हुए, पश्चिम बंगाल में 1,200 से ज़्यादा और महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में 2020-21 और 2024-25 के बीच 600 से ज़्यादा स्कूल बंद हुए.
2020-21 और 2024-25 के बीच मध्य प्रदेश के बाद जम्मू-कश्मीर में सबसे ज़्यादा स्कूल बंद हुए, इसके बाद ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 1,000 से ज़्यादा स्कूल बंद हुए.
ख़बरों के अनुसार, बंद हुए स्कूल मुख्य रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में दर्ज की गईं, जहां छात्र नामांकन में लगातार गिरावट देखी जा रही है.
सरकार का कहना है कि स्कूल बंद होने के प्रमुख कारणों में छात्रों की कम संख्या, तर्कसंगत नीतियों के तहत स्कूलों का विलय और ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन जैसे जनसांख्यिकीय बदलाव शामिल हैं. कई मामलों में संसाधनों का बेहतर उपयोग करने, बुनियादी ढांचे में सुधार और शिक्षकों की बेहतर तैनाती सुनिश्चित करने के लिए पास-पास के स्कूलों को आपस में मिला दिया गया.
निजी स्कूलों की संख्या बढ़ी
शिक्षा मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जहां सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार घट रही है, वहीं निजी (अनुदान-रहित) स्कूलों की संख्या बढ़ रही है.
आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में देशभर में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हो गए, जबकि सिर्फ़ एक साल में निजी स्कूलों की संख्या 8,475 बढ़ गई.
सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने भारत में सरकारी स्कूलों की घटती संख्या पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 18,000 से अधिक सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं.
राज्यसभा में पेश सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए ब्रिटास ने इस रुझान को देश की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सरकारी शिक्षा सिमट रही है. निजी स्कूली शिक्षा फैल रही है.
आंकड़े दिखाते हैं कि सरकारी स्कूलों का ढांचा धीरे लेकिन लगातार सिमट रहा है, जबकि ये स्कूल खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में सस्ती शिक्षा की रीढ़ माने जाते रहे हैं.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में सरकारी स्कूलों की कुल संख्या 2020-21 में 10,32,049 थी, जो 2024-25 में घटकर 10,13,322 रह गई. इसका मतलब है कि पांच साल की अवधि में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हो गए.
यह कमी देशभर में सार्वजनिक स्कूल नेटवर्क के धीरे-धीरे सिमटने को दिखाती है, जिससे खासकर उन छात्रों के लिए सस्ती शिक्षा तक पहुंच को लेकर चिंता बढ़ रही है जो ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आते हैं और मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों पर निर्भर रहते हैं.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, निजी अनुदान-रहित स्कूलों की संख्या 2023-24 में 3,31,108 थी, जो 2024-25 में बढ़कर 3,39,583 हो गई. यानी सिर्फ एक साल में 8,475 नए निजी स्कूल जुड़े.
