असम सीएम के वीडियो पर आक्रोश, कांग्रेस बोली- सीधे तौर पर नरसंहार का आह्वान

भाजपा की असम इकाई द्वारा पोस्ट वीडियो में सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया था. व्यापक निंदा के बाद इस वीडियो को हटा लिया गया है. कांग्रेस नेताओं ने वीडियो को ‘संविधान के सीने पर गोली’ क़रार दिया है.

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि नरेंद्र मोदी से इसकी निंदा करने की या कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, लेकिन न्यायपालिका को कदम उठाना चाहिए. (साभार: एक्स/@BJP4Assam)

नई दिल्ली: एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मलेशिया की यात्रा पर हैं, जहां का आधिकारिक धर्म इस्लाम है, वहीं दूसरी तरफ उसके ठीक एक दिन पहले उनकी पार्टी की असम इकाई ने एक ऐसा वीडियो पोस्ट किया, जिसमें राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा को मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया था.

यह वीडियो राज्य की मुस्लिम आबादी के खिलाफ शर्मा की पहले से चली आ रही सांप्रदायिक बयानबाज़ी को एक असाधारण और गैरकानूनी स्तर तक ले जाने को दर्शाता है.

वीडियो में शर्मा को एयर राइफल संभालते हुए दिखाया गया है, जो असली फुटेज जैसा लगता है. इसके साथ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई) से बनाए गए क्लिप जोड़े गए हैं, जिनमें एयर राइफल से चली गोलियां टोपी और दाढ़ी वाले पुरुषों की तस्वीरों को निशाना बनाती दिखाई देती हैं, जो साफ़ तौर पर उनकी धार्मिक पहचान को दर्शाने के संकेत हैं.

इसमें शर्मा को एक वेस्टर्न फ़िल्म के नायक की तरह पेश किया गया है और उनकी तस्वीर के साथ लिखा है, ‘विदेशी मुक्त असम.’ ख़बरों के मुताबिक, वीडियो में असमिया भाषा में ‘कोई दया नहीं,’ ‘पाकिस्तान क्यों नहीं चले गए?’ और ‘बांग्लादेशियों को माफ़ी नहीं’ जैसे वाक्य भी दिखाए गए हैं.

वीडियो के साथ कैप्शन दिया गया था, ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट.’ इस वीडियो के पोस्ट होने के बाद इसकी निंदा शुरू हो गई थी. व्यापक आलोचना के बाद अब इस वीडियो को सोशल मीडिया से हटा लिया गया है. 

असम भाजपा द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो के कुछ स्क्रीनग्रैब.

सेवानिवृत्त आईएएस, आईएफएस और आईपीएस अधिकारियों के समूह ‘कॉन्स्टिट्यूशनल कंडक्ट ग्रुप’ ने एक बयान में कहा, ‘देश भर में, ख़ासकर चुनाव के समय, राजनेताओं द्वारा लगातार दिए जा रहे नफ़रत भरे भाषणों के बावजूद, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा का हालिया बयान देश के नागरिकों को झकझोर देता है.’

समूह ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह शर्मा के नफ़रत भरे बयानों पर स्वतः संज्ञान ले, क्योंकि ये अदालत के पहले के आदेशों का सीधा उल्लंघन और अवमानना हैं.

तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने लिखा कि यह गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के अंतर्गत स्पष्ट अपराध है.

उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘भाजपा असम ने यूएपीए के तहत अपराध किया है और हिंसा के लिए खुला उकसावा दिया है. इस विज्ञापन को हटाकर भी बचा नहीं जा सकता. यह बीएनएस की धाराएं 152, 156 और 192 के अंतर्गत भी आता है. इस मामले में मिसाल कायम करने वाली सज़ा दी जानी चाहिए.’

शर्मा पहले भी कह चुके हैं कि उनका काम ‘मिया लोगों को तकलीफ़ देना’ है. इसके बाद उन्होंने यह भी कहा था कि असम में मुसलमानों को वोट नहीं करने दिया जाएगा. उन्होंने दावा किया था कि राज्य में ‘चार से पांच लाख’ मुस्लिम वोट हटाए जाएंगे. राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं.

उन्होंने कहा था, ‘जो भी उन्हें किसी भी तरह से परेशानी दे सकता है.. दे. रिक्शा में किराया 5 रुपये हो तो 4 रुपये दीजिए. जब उन्हें परेशानी होगी, वे असम छोड़ देंगे. हिमंता बिस्वा शर्मा और भाजपा सीधे तौर पर मियाओं के खिलाफ हैं.’

गौरतलब है कि ‘मिया’ शब्द असम के बांग्ला-भाषी और पूर्वी बंगाल मूल के मुस्लिम समुदाय के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जहां शर्मा जैसे नेता इस शब्द का अपमानजनक अर्थ में इस्तेमाल करते हैं, वहीं समुदाय ने इस शब्द को अपनाया है और अपनी पहचान के तौर पर उपयोग करता है.

कुछ दिन पहले हीरेन गोहेन के नेतृत्व में असम के 43 प्रमुख लेखकों, बुद्धिजीवियों, पेशेवरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख किया था. उन्होंने शर्मा के बार-बार दिए जा रहे नफ़रत भरे भाषणों, मतदाता सूची के संशोधन में कार्यपालिका के हस्तक्षेप और अन्य संवैधानिक उल्लंघनों पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी.

कांग्रेस ने पूछा: अदालतें और संस्थाएं कहां हैं?

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘भाजपा के एक आधिकारिक हैंडल ने अल्पसंख्यकों की ‘पॉइंट-ब्लैंक’ हत्या दिखाने वाला वीडियो पोस्ट किया. यह सीधे तौर पर नरसंहार का आह्वान है, एक सपना जिसे यह फासीवादी शासन दशकों से संजोए हुए है. यह कोई मामूली ट्रोल वीडियो नहीं है. यह ज़हर सबसे ऊपर से फैलाया गया है और इसके नतीजे होने चाहिए. नरेंद्र मोदी से इसकी निंदा करने की या कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, लेकिन न्यायपालिका को कदम उठाना चाहिए और किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए.’

कांग्रेस नेता और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भाजपा पर ‘जनसंहारक’ होने का आरोप लगाया.

उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘जिस वीडियो में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा को ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ कैप्शन के साथ मुस्लिम पुरुषों पर गोली चलाते दिखाया गया, उसे महज हटाना काफ़ी नहीं है. यही भाजपा की असली पहचान है- जनसंहारक. यह ज़हर, नफ़रत और हिंसा आपके खाते में जाती है, श्रीमान मोदी. क्या अदालतें और अन्य संस्थाएं सो रही हैं?’

कांग्रेस की केरल इकाई ने कहा, ‘भाजपा ने अब दिखावा भी छोड़ दिया है और आधिकारिक तौर पर अल्पसंख्यकों के नरसंहार की खुली अपील शुरू कर दी है, और वह भी संवैधानिक शपथ ले चुके मुख्यमंत्री को मुसलमानों को गोली मारता हुआ दिखाकर.’ 

पार्टी ने इस वीडियो पोस्ट को प्रधानमंत्री मोदी की मलेशिया यात्रा से जोड़ते हुए पूछा, ‘मोदी के लिए रेड कार्पेट बिछाने वाले मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, मलेशिया की जनता और भारत व दुनिया भर के मुसलमानों को मोदी क्या संदेश दे रहे हैं?”

पार्टी ने हिमंता बिस्वा शर्मा को बर्खास्त करने और उनसे माफी मंगवाने की मांग की है.

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस वीडियो को ‘संविधान के सीने पर गोली’ करार दिया.

उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘प्रिय प्रधानमंत्री जी, आपका दुलारा मुख्यमंत्री अपने चुनावी विज्ञापन में सीधे मुसलमानों के सीने पर जो गोली मार रहा है वो दरअसल संविधान की छाती पर मार रहा है, ऐसी ही एक गोली गोडसे ने महात्मा गांधी के सीने पर मारी थी. अब भले ही ये वीडियो डिलीट कर दिया गया हो लेकिन मोदी जी सवाल तो आपसे है कि आप ये सब तो देख ही रहे रहे होंगे ना ?’

शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा, ‘भाजपा असम प्रदेश के एक्स हैंडल ने ‘पॉइंट ब्लैंक शॉट’ शीर्षक से नफ़रत से भरा और सीधे तौर पर निशाना साधने वाला एक वीडियो पोस्ट किया. विरोध के बाद इसे हटा दिया गया है, लेकिन यह इतनी देर तक ऑनलाइन रहा कि कई लोगों ने इसे डाउनलोड कर आगे फैला दिया है. बेशर्मी से चुनाव आयोग इस सबसे घिनौने रूप की नफ़रत और राजनीतिक निशानेबाज़ी को नज़रअंदाज़ करेगा. भाजपा के सामने वह पूरी तरह बेअसर और निष्प्रभावी नज़र आता है.’