सदन में ‘पीएम को ख़तरे’ पर महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा- बेबुनियाद, मानहानिकारक आरोप

कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उन्होंने सत्तारूढ़ भाजपा के दबाव में उन पर आरोप लगाए. ओम बिरला ने 5 फरवरी को सदन में कहा था कि उन्होंने पीएम को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने के लिए सदन में न आने की सलाह दी थी, क्योंकि उन्हें जानकारी मिली थी कि कांग्रेस की महिला सांसद पीएम की सीट के पास इकट्ठा थीं और कोई अप्रिय घटना हो सकती थी.

बजट सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सदन की कार्यवाही संचालित करते हुए. (फोटो: संसद टीवी के माध्यम से पीटीआई)

नई दिल्ली: कांग्रेस की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उन पर लगाए गए आरोपों पर गहरी पीड़ा जताई है, जिन्हें उन्होंने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दबाव में लगाया गया बेबुनियाद और मानहानिकारक आरोप बताया है.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 5 फरवरी को सदन में कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने के लिए सदन में न आने की सलाह दी थी. बिरला ने कहा था कि उन्हें जानकारी मिली थी कि कांग्रेस की महिला सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी के आसपास इकट्ठा हो गई थीं और कोई अप्रिय घटना हो सकती थी.

बिरला ने सदन में कहा था, ‘जब प्रधानमंत्री को बोलना था, तब मुझे सूचना मिली कि कांग्रेस सांसद उनकी सीट के आसपास इकट्ठा हो गए हैं और कोई भी अप्रिय घटना हो सकती थी. अगर ऐसा होता तो यह देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को तोड़ देता. इसी कारण मैंने उन्हें सदन में न आने की सलाह दी और उन्होंने मेरी सलाह मानी तथा इस अप्रिय स्थिति से दूर रहे.’

इसके बाद उन्होंने यह भी कहा था, ‘देश ने देखा है कि महिला सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गईं थी. इसकी कोई जरूरत नहीं थी और यह संसद की गरिमा के खिलाफ था.’

अपने बयान में महिला सांसदों ने कहा है कि लोकसभा अध्यक्ष संसद की परंपराओं की रक्षा करने में विफल रहे हैं. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया, ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों को निलंबित किया गया और एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी करने की अनुमति दी गई. सांसदों ने कहा कि प्रधानमंत्री संसद में किसी विरोध के कारण नहीं, बल्कि डर के चलते नहीं आए. 

सांसदों ने अध्यक्ष से निष्पक्षता बरतने, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने, संसद की गरिमा बहाल करने और राजनीतिक दबाव का विरोध करने की अपील की.

इस पत्र पर एस. जोथिमणि, सुधा रामकृष्णन, प्रियंका गांधी, वर्षा गायकवाड़, ज्योत्सना महंत और गेनीबेन ठाकोर के हस्ताक्षर हैं.

पूरा पत्र नीचे पढ़ सकते हैं:

माननीय अध्यक्ष महोदय,

विषय: महिला सांसदों के खिलाफ लगाए गए निराधार आरोपों और विपक्ष को संसदीय अधिकारों से वंचित किए जाने के संबंध में

हम यह पत्र गहरी पीड़ा और संवैधानिक जिम्मेदारी की भावना के साथ लिख रहे हैं. यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकसभा के माननीय अध्यक्ष और इस गरिमामय सदन के संवैधानिक संरक्षक के रूप में आपसे सत्तारूढ़ दल ने विपक्ष, विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ झूठे, निराधार और मानहानिकारक आरोप लगवाए.

महोदय, अध्यक्ष का पद संसद की गरिमा की रक्षा, निष्पक्षता सुनिश्चित करने और पार्टियों से ऊपर उठकर सभी सदस्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए होता है. राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान स्थापित संसदीय परंपरा यह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को बोलने का अवसर दिया जाता है, और इसके बाद प्रधानमंत्री जवाब देते हैं. लेकिन पिछले लगातार चार दिनों से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने का अवसर नहीं दिया गया. यह अभूतपूर्व और पूरी तरह अनुचित है.

इसके विपरीत, सत्तारूढ़ दल के इशारे पर ‘इंडिया’ गठबंधन के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया गया, जबकि एक भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ अश्लील और आपत्तिजनक भाषा में बोलने की अनुमति दी गई. 

जब हमने आपसे मिलकर न्याय की मांग की, जिसमें उस भाजपा सांसद (निशिकांत दुबे) के निलंबन की मांग भी शामिल थी, तब आपने माना कि एक गंभीर गलती हुई है और हमें शाम 4 बजे दोबारा आने को कहा. दोबारा मिलने पर आपने बताया कि आप इस मुद्दे पर सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे हैं, जिससे यह संकेत मिला कि अब इस मामले में निर्णय लेने की शक्ति आपके पास नहीं है. इससे लोकसभा अध्यक्ष के रूप में आपके अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

इसके बाद शाम 5 बजे, स्थापित प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए प्रधानमंत्री का लोकसभा में भाषण निर्धारित किया गया. ‘इंडिया’ गठबंधन के सभी सांसदों ने इसका विरोध किया और प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए.

अगले दिन, स्पष्ट रूप से सत्तारूढ़ दल के दबाव में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति का बचाव करते हुए, आपने कांग्रेस की महिला सांसदों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए. महोदय, हमारे सभी विरोध शांतिपूर्ण, दृढ़ और पूरी तरह लोकतांत्रिक दायरे में रहे हैं. हममें से अधिकांश साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं और कई पहली पीढ़ी की राजनेता हैं. हमने दशकों तक जनता के बीच संघर्ष करते हुए, विरोध और भेदभाव का सामना करते हुए अपनी जगह बनाई है. हमारी ईमानदारी पर सवाल उठाना सार्वजनिक जीवन में सम्मान और साहस के साथ आगे बढ़ने वाली हर महिला पर हमला है.

हमें केवल इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि हमने लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनविरोधी सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है और उनसे जवाबदेही मांगी है. प्रधानमंत्री का सदन में न आना हमारे किसी विरोध के कारण नहीं, बल्कि डर के कारण था. उनमें विपक्ष का सामना करने का साहस नहीं था.

हम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सांसद हैं, एक ऐसी पार्टी से, जो प्रेम, शांति, संवैधानिक मूल्यों और मानव गरिमा में विश्वास रखती है. हम हिंसा या डराने-धमकाने में विश्वास नहीं करते. हम निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि हैं, जो चुप नहीं कराई जा सकतीं. हमारा मानना है कि पारदर्शिता ही अध्यक्ष के पद की गरिमा और इस सदन की विश्वसनीयता बहाल करने का एकमात्र रास्ता है.

महोदय, हमें आपके पद और आपके प्रति पूरा सम्मान है. लेकिन यह साफ़ है कि आप सत्तारूढ़ दल के निरंतर दबाव में हैं. हम आपसे एक बार फिर आग्रह करते हैं कि आप लोकसभा के निष्पक्ष संरक्षक की भूमिका निभाएं. यदि आप संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा करने का निर्णय लेते हैं, तब हम आपको पूरा सहयोग देने का आश्वासन देते हैं.

इतिहास आपको ऐसे व्यक्ति के रूप में याद रखे, जिसने कठिन परिस्थितियों में सही का साथ दिया और देशहित में संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की. ऐसा न हो कि इतिहास आपको उन लोगों के दबाव में झुकने वाले के रूप में याद रखे, जो संविधान को कमजोर करना और देश के लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं.

धन्यवाद,

सादर,

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला सांसद