नई दिल्ली: असम की एक अदालत ने गुरुवार (12 फरवरी) को कांग्रेस नेताओं – गौरव गोगोई, जितेंद्र सिंह और भूपेश बघेल को हिमंता बिस्वा शर्मा और उनके परिवार की संपत्तियों पर टिप्पणी करने से रोक दिया है.
साथ ही, असमिया अख़बार ‘असमिया प्रतिदिन’ (Asomiya Pratidin) को भी इस मामले से जुड़ी कोई सामग्री प्रकाशित न करने का निर्देश दिया गया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शर्मा ने कहा कि वे अपनी संपत्तियों का ब्योरा भारतीय निर्वाचन आयोग के सामने घोषित करेंगे और सबको सच्चाई पता चल जाएगी. उन्होंने कांग्रेस से बिना सबूत आरोप लगाने से बचने को कहा. शर्मा ने कहा, ‘मैं कांग्रेस को सलाह देता हूं कि मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाने के बजाय ज्यादा अहम मुद्दों पर ध्यान दे.’
गौरव गोगोई ने कहा था कि शर्मा जनता के पास जाने के बजाय अदालत पहुंचे हैं. उन्होंने कहा, ‘इससे साफ होता है कि उन्हें असम की जनता पर भरोसा नहीं है.’
असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस और बाद की मीडिया रिपोर्टों में कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद मुख्यमंत्री ने अदालत का रुख किया.
उनके मुताबिक, कांग्रेस नेताओं ने दावा किया था कि शर्मा और उनके परिवार ने पूरे असम में करीब 1,200 बीघा जमीन हासिल की है. उन्होंने जमीन हड़पने, ‘एचबीएस टैक्स’ और कथित घोटालों से जुड़े होने जैसे आरोप भी लगाए थे, जिन्हें 5 फरवरी को कुछ स्थानीय अख़बारों ने प्रकाशित किया था.
सैकिया ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अदालत को बताया है कि उनके और उनके परिवार की सभी संपत्तियां चुनावी हलफनामों, आयकर रिटर्न और वैधानिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं और उनके नाम कोई भी अघोषित संपत्ति नहीं है. शर्मा ने अंतरिम आदेश की मांग की थी ताकि प्रतिवादी और कुछ मीडिया संस्थान इन आरोपों को दोहराने या छापने से रोके जाएं.
एडवोकेट जनरल के अनुसार, अदालत ने प्रथमदृष्टया मामला बनता हुआ पाया और कहा कि ऐसे आरोपों का लगातार प्रकाशन मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा को अपूरणीय नुकसान पहुंचा सकता है. इसी आधार पर अदालत ने अगली सुनवाई तक कांग्रेस नेताओं को ऐसे बयान देने से रोकते हुए अंतरिम राहत दी.
अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी.
4 फरवरी को असम कांग्रेस ने ‘हू इच एचबीएस’ नाम से एक अभियान शुरू किया था, जिसमें एक वेबसाइट और पर्चे के जरिए शर्मा की कथित जमीन और कारोबारी हितों पर सवाल उठाए गए थे. अभियान शुरू करते हुए असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा के परिवार ने पूरे राज्य में लगभग 12,000 बीघा ज़मीन हड़प ली है. यह रकबा 3,960 एकड़ से भी अधिक बैठता है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोगोई ने कहा था कि पार्टी मुख्यमंत्री द्वारा ‘ज़मीन हड़पने’ की जांच कर रही है और आरोप लगाया कि उन्हें राज्य के अलग-अलग हिस्सों में उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर नियमों का उल्लंघन करते हुए 12,000 बीघा ज़मीन हड़पे जाने के सबूत मिले हैं.
गोगोई की इस प्रेस वार्ता में असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव (असम प्रभारी) जितेंद्र सिंह और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी मौजूद थे.
शर्मा ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया और कहा था कि वे दीवानी और आपराधिक मानहानि की कार्रवाई करेंगे. इसके बाद शर्मा ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने 500 करोड़ का मुकदमा दायर कर दिया है.
उधर, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शर्मा राजनीतिक विरोध को दबाने की कोशिश कर रहे हैं और इसके खिलाफ पुलिस में शिकायतें दर्ज कराईं तथा विरोध प्रदर्शन भी किए.
