अरुंधति रॉय ने गाज़ा मुद्दे पर जूरी की टिप्पणी के बाद बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्ट में जाने से इनकार किया

प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय ने गाज़ा पर बर्लिनाले जूरी की टिप्पणी को ‘चौंकाने वाला’ और 'निराशाजनक' बताते हुए 2026 के महोत्सव में शामिल होने से इनकार कर दिया है. उनकी फिल्म ‘इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वन्स’ क्लासिक्स सेक्शन में चुनी गई थी.

अरुंधति रॉय. (फोटो: द वायर)

नई दिल्ली: प्रसिद्ध लेखिका अरुंधति रॉय ने गाज़ा को लेकर बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (बर्लिनाले) की जूरी की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए 2026 के महोत्सव में शामिल होने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा कि जब जूरी सदस्य यह कहते हैं कि कला को राजनीति से दूर रहना चाहिए, तो यह ‘चौंकाने वाला’ और ‘निराशाजनक’ है.

रॉय की लिखी 38 वर्ष पुरानी फिल्म ‘इन विच एनी गिव्स इट दोज़ वन्स’ को बर्लिनाले 2026 के ‘क्लासिक्स’ सेक्शन में दिखाने करने के लिए चुना गया था. उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक भावनात्मक और सुखद क्षण था. हालांकि, जर्मन सरकार और वहां की सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपनाए गए रुख से वे पहले से ही व्यथित थीं.

‘फिर भी, जब भी मैंने जर्मन दर्शकों के सामने गाज़ा में हो रहे जनसंहार पर अपने विचार रखे हैं, मुझे उनसे राजनीतिक एकजुटता मिली है. इसी कारण मैंने बर्लिनाले में ‘एनी’ की स्क्रीनिंग में शामिल होने के बारे में सोचा था.’

अरुंधति रॉय द्वारा लिखी फिल्म का पोस्टर.

उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि गाज़ा में जो हुआ है और जो जारी है, वह फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ इज़राइल राज्य द्वारा किया जा रहा ‘जनसंहार’ है. रॉय ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका और जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों की सरकारें इस कार्रवाई का समर्थन और वित्तपोषण कर रही हैं, जिससे वे भी इस अपराध में सहभागी बनते हैं.

रॉय ने कहा कि कलाकारों, लेखकों और फिल्मकारों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे समय में चुप न रहें. ‘अगर हमारे समय के सबसे बड़े फिल्मकार और कलाकार भी यह कहने का साहस नहीं दिखा सकते, तो इतिहास उन्हें कठघरे में खड़ा करेगा.’ उन्होंने कहा. अंत में उन्होंने ‘गहरे खेद’ के साथ बर्लिनाले में न जाने का निर्णय घोषित किया.

यह विवाद उस समय उभरा जब बर्लिनाले की लाइव प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकार टिलो युंग ने महोत्सव की ‘सेलेक्टिव सॉलिडैरिटी’ पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि ईरान और यूक्रेन के मुद्दों पर तो समर्थन दिखाया जाता है, लेकिन फिलिस्तीन के मामले में ऐसा क्यों नहीं है. इस पर जूरी अध्यक्ष और ऑस्कर-नॉमिनेटेड निर्देशक विम वेंडर्स ने जवाब दिया, ‘हमें राजनीति से दूर रहना चाहिए.’


गौरतलब है कि विम वेंडर्स ने 2024 में बर्लिनाले की राजनीतिक पहचान की सराहना करते हुए कहा था कि यह महोत्सव परंपरागत रूप से प्रमुख फिल्म समारोहों में सबसे अधिक राजनीतिक रहा है और भविष्य में भी अपनी बात कहता रहेगा. ऐसे में इस वर्ष दिया गया उनका बयान पहले के रुख से अलग माना जा रहा है.