दिल्ली: एआई इम्पैक्ट समिट का पहला दिन अराजकता भरा रहा, लोगों ने बयां किया दर्द

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का पहला दिन अव्यवस्था और अराजकता से भरा रहा. समिट शुरू होने के कुछ घंटों बाद ही पीएम मोदी के आगमन का हवाला देकर प्रदर्शकों और दर्शकों को बाहर कर दिया गया, इस दौरान लोग भटकते रहे. एक स्टार्टअप सीईओ द्वारा प्रोडक्ट्स चोरी का दावा सामने आया है. विपक्ष ने आयोजन को ‘पीआर शो’ बताते हुए सरकार पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया है.

एआई समिट के दौरान पीएम मोदी. (फोटो साभार: डीडी न्यूज़)

नई दिल्ली: भव्य प्रचार, महीनों की योजना और समन्वय के बाद भारत के बहुचर्चित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का पहला दिन अव्यवस्था और अराजकता से भरा रहा. कहीं मोबाइल नेटवर्क और वाईफाई की खराब स्थिति, तो कहीं बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था में गड़बड़ी के चलते दुनियाभर से आए प्रतिभागी बीच में ही निराश हो गए.

एक सीईओ ने तो सामान चोरी होने का भी आरोप लगाया.

द मिंट की ख़बर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एआई एक्सपो के उद्घाटन को लेकर मची आपाधापी के बीच कड़े सुरक्षा इंतजाम के चलते हजारों आगंतुक, प्रदर्शक, विदेशी प्रतिनिधि और यहां तक ​​कि वीआईपी वक्ता को भी कार्यक्रम स्थल से बाहर कर दिया गया, जहां उन्हें पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते हुए भीड़भाड़ वाले गलियारों में लंबे समय तक फंसा रहना पड़ा.

इस संबंध में अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कई प्रदर्शकों ने अखबार को बताया कि जमीनी स्तर पर आयोजन और सुरक्षा कर्मचारियों की ओर से स्पष्टता की कमी, भीड़ के खराब प्रबंधन और यहां तक ​​कि नेटवर्क कनेक्टिविटी, भोजन और पानी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं तक पहुंच के लिए भी उन्हें तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ा.

अपना अनुभव बताते हुए चेन्नई स्थित युवर्स के सेल्स प्रमुख रोमिला रुंगटा ने कहा, ‘हमने एक बड़े पैमाने की प्रदर्शनी के लिए भारी भरकम शुल्क चुकाया, लेकिन दिनभर लगभग न के बराबर ही लोग आए क्योंकि प्रवेश नियमों को लेकर लोग असमंजस में थे. प्रधानमंत्री के आगमन के कारण हमें बीच में ही प्रदर्शनी बंद करने के लिए कहा गया. कुल मिलाकर, व्यवस्था संबंधी समस्याएं हैं, जहां पानी की एक बोतल खरीदने के लिए भी कोई अंदर या बाहर नहीं जा सकता, और यहां आने वाली भीड़ भी हमारे द्वारा लगाए गए पैसों के हिसाब से नहीं है.’

यहां पहले दिन विदेशी प्रतिभागियों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. केन्या के प्रतिनिधि डैनियल ओटिएनो, जो एआई साक्षरता विशेषज्ञ हैं, ने कहा कि आयोजन स्थल में इधर से उधर जाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था.

ओटिएनो ने आगे कहा, ‘सुरक्षाकर्मी वैश्विक प्रतिनिधियों को समझने और उनका मार्गदर्शन करने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम नहीं थे.’

वहीं, भारत मंडपम में नियोसैपियन के सीईओ धनंजय यादव भी पहुंचे थे, जिन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अपने खराब अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि भारत में हो रही इस समिट के लिए वह काफी ज्यादा उत्साहित थे लेकिन इस समिट के पहले दिन उनके साथ जो हुआ उसने उन्हें हैरान कर दिया. उन्होंने बताया पीएम मोदी के आगमन से पहले सिक्योरिटी के कहने पर उन्हें अपना सामान छोड़कर जाना पड़ा और लेकिन बाद उन्हें उनका सामान नहीं मिला.

यादव ने एक्स पर कुछ तस्वीर और वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा है:

एआई इम्पैक्ट समिट का पहला दिन हमारे लिए बेहद परेशान करने वाला साबित हुआ. मैं पूरे उत्साह के साथ वहां पहुंचा था. यह पहली बार था जब यह समिट भारत में आयोजित हो रहा था, और मैं व्यक्तिगत रूप से आकर इकोसिस्टम और सरकार की पहल को समर्थन देना चाहता था. लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह चौंकाने वाला था. दोपहर 12 बजे सुरक्षा कर्मी प्रधानमंत्री मोदी के 2 बजे के दौरे से पहले इलाके को सैनिटाइज़ करने और घेराबंदी करने पहुंचे. मैंने उन्हें बताया कि हम नियोसैपियन में भारत का पहला पेटेंटेड एआई वियरेबल बना रहे हैं और उसे प्रदर्शित करने का अवसर देने का अनुरोध किया. एक अधिकारी ने बाकी लोगों से कहा कि मुझे वहीं रहने दिया जाए, और वे चले गए. लेकिन थोड़ी देर बाद सुरक्षा कर्मियों का एक दूसरा दल आया और हमें तुरंत जगह खाली करने का आदेश दिया. ऐसा लगा कि खुद सुरक्षा व्यवस्था के भीतर ही समन्वय की कमी थी. मैंने पूछा, ‘क्या हमें अपने वियरेबल्स साथ ले जाने चाहिए?’ उन्होंने कहा कि दूसरे लोग तो अपने लैपटॉप तक छोड़कर जा रहे हैं, सुरक्षा इसका ध्यान रखेगी. उनकी बात पर भरोसा करते हुए मैं चला गया. यह उम्मीद थी कि हमारे वियरेबल्स सुरक्षित रहेंगे और अगर किस्मत साथ दे तो प्रधानमंत्री मोदी की नज़र भी उन पर पड़ सकती है. गेट दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक बंद रहे, जो उम्मीद से कहीं ज़्यादा समय था. बाद में हमें पता चला कि हमारे वियरेबल्स चोरी हो गए हैं. ज़रा सोचिए: हमने फ्लाइट, रहने, लॉजिस्टिक्स और यहां तक कि बूथ के लिए भी भुगतान किया था, और नतीजा यह कि एक हाई-सिक्योरिटी ज़ोन के भीतर से हमारे वियरेबल्स गायब हो गए. जब उस दौरान सिर्फ़ सुरक्षा कर्मियों और आधिकारिक एंटूराज की ही पहुंच थी, तो यह कैसे हो सकता है? यह बेहद निराशाजनक है.

धनंजय यादव के अलावा भी सोशल मीडिया एक्स पर शिखर सम्मेलन के पहले दिन को लेकर कई लोगों ने अपनी निराशा व्यक्त की है, जिसमें बताया गया है कि कैसे प्रधानमंत्री के आगमन के चलते उन्हें लंबी कतारों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और घंटों तक सैनिटाइजेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा.

रिस्किल के फाउंडर पुनीत जैन ने लिखा कि एक एआई शिखर सम्मेलन में उसी के लोगों को दरकिनार कर दिया गया. प्रदर्शक, प्रतिनिधि, स्टार्टअप संस्थापक बाहर रह गए. पानी तक की व्यवस्था नहीं थी. स्थिति स्पष्ट नहीं थी. मीडिया जश्न मना रहा है लेकिन जमीनी हकीकत देखें, तो यहां अफरा-तफरी मची हुई थी.

वॉयस एआई स्टार्टअप बोलना के फाउंडर मैत्रेय वाघ ने व्यंग्य करते हुए लिखा, ‘एआई समिट में गेट बंद होने के कारण मैं अपने बूथ तक नहीं पहुंच सका. अगर आप भी बाहर फंसे हुए हैं और हमारी टीम से मिलना चाहते हैं, तो मुझे डीएम करें. हम कनॉट प्लेस के किसी कैफे में एक छोटा सा बूथ लगा सकते हैं.’

 

विपक्ष इस पूरे मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर है.

कांग्रेस के पवन खेड़ा ने मोदी सरकार पर तंस कसते हुए कहा कि हर चमकती हुई चीज़ सोना नहीं होती. नाम बड़े और दर्शन छोटे.

उन्होंने आगे कहा, ‘संसद में हाल ही में हुई शर्मनाक हार के बाद एआई शिखर सम्मेलन में एक भव्य ‘प्रदर्शन’ करने के लिए सरकार इतनी बेताब थी कि उसने जनसंपर्क प्रबंधन पर दोगुना जोर दिया – जबकि जमीनी स्तर पर वास्तविक प्रबंधन अभी भी बेहद खराब है.’

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी एआई समिट की व्यवस्थाओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह आयोजन ‘भयावह अव्यवस्था’ में बदल गया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा व्यवस्था तथा फोटो-ऑप तक सीमित होकर रह गया.

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के दौरे से पहले मुख्य हॉल खाली करा दिया गया, प्रदर्शकों को उनके भुगतान किए गए स्टॉल से हटाया गया और कुछ स्टार्टअप संस्थापकों के प्रोडक्ट्स भी चोरी हो गए. उनके मुताबिक, इंटरनेट कनेक्टिविटी अस्थिर होने के कारण डेमो असफल रहे, प्रवेश के लिए एक-एक घंटे तक कतारें लगी रहीं, बाइक या कार से आने वालों को चाबियां ले जाने की अनुमति नहीं दी गई और तकनीकी आयोजन होने के बावजूद लैपटॉप व कैमरे अंदर ले जाने पर रोक थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि समिट में केवल नकद भुगतान स्वीकार किया जा रहा था.

श्रीनेत ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, जिसकी जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के पास है, को इस कथित अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने तंज करते हुए कहा कि यह कुप्रबंधन भारत और उसके वैश्विक एआई अभियान के लिए शर्मनाक है, और सवाल उठाया कि इसके लिए अश्विनी वैष्णव आखिर किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा, राहुल गांधी को या पंडित नेहरू को?.

वहीं, राज्यसभा सांसद और तृणमूल कांग्रेस नेता साकेत गोखले ने कहा कि कल दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का पहला दिन पूरी तरह से विफल रहा. एआई उद्यमियों का समर्थन करने के बजाय, पूरा आयोजन मोदी के निजी प्रचार अभियान में तब्दील हो गया. हालांकि, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है.

गौरतलब है कि बीते कई महीनों से इस एआई समिट को लेकर सरकार भव्य प्रचार-प्रसार के जरिए एक माहौल बनाने की कोशिश कर रही थी. ऐसे में पहले ही दिन पूरी व्यवस्था का बिखर जाना और इस तरह की अराजकता का सामने आना सरकारी प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है.