नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (16 फ़रवरी) को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए वीडियो ट्रांसक्रिप्ट की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में सटीकता बेहद अहम है.
वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि लद्दाखी कार्यकर्ता वांगचुक से जुड़ी कुछ टिप्पणियां ऐसी हैं, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं. इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह वांगचुक के भाषणों के वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट पेश करे.
मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और पी.बी. वराले की पीठ ने कहा, ‘मिस्टर सॉलिसिटर, हमें भाषण का वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट चाहिए. जिस पर उन्होंने भरोसा किया है और जो आप कह रहे हैं, वह अलग-अलग है. हम तय करेंगे. यह जरूरी है कि उन्होंने वास्तव में क्या कहा, उसका वास्तविक ट्रांसक्रिप्ट मौजूद हो. कम से कम, उन्होंने जो कहा है, उसका सही अनुवाद तो होना ही चाहिए. आपका अनुवाद सात से आठ मिनट का है, जबकि भाषण तीन मिनट का है. हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में हैं; अनुवाद में कम से कम 98 प्रतिशत सटीकता होनी चाहिए.’
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सिब्बल ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार ने वांगचुक की हिरासत के आदेश उन पंक्तियों के आधार पर दिए, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं. सिब्बल ने कहा, ‘वांगचुक ने अपना आंदोलन जारी रखा और नेपाल का संदर्भ देकर युवाओं को उकसाया. यह पंक्ति कहां से आई? यह एक बेहद अनोखा हिरासत आदेश है, आप किसी ऐसी बात पर भरोसा करते हैं, जो अस्तित्व में ही नहीं है, और फिर कहते हैं कि यह ‘व्यक्तिपरक संतोष’(subjective satisfaction) पर आधारित है.’
इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने जवाब दिया कि ट्रांसक्रिप्ट तैयार करने की जिम्मेदारी एक अलग विभाग की है. उन्होंने कहा, ‘हम इसके विशेषज्ञ नहीं हैं.’
अब इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी.
किसान संगठन ने वांगचुक की रिहाई की मांग की
महाराष्ट्र के मिराज स्थित किसान संगठन शेतकरी संघटना ने एक प्रस्ताव पारित कर जलवायु कार्यकर्ता की रिहाई की मांग की और उनकी कथित मनमानी व अवैध हिरासत की निंदा की है.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन उनकी रिहाई की मांग को लेकर कई गांवों में होर्डिंग्स भी लगाएगा.
शेतकरी संघटना के कार्यकारी अध्यक्ष कालीदास आपेट ने अख़बार से कहा, ‘सरकार कृतघ्न और गलत है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने 2019 के घोषणापत्र में खुद लद्दाख को अलग राज्य का दर्जा देने का वादा किया था, सोनम वांगचुक केवल वही मांग कर रहे थे, जो पहले से वादा की जा चुकी थी. हम भाजपा से अपील करते हैं कि सरकार उन्हें तुरंत रिहा करे. साथ ही, हम सभी सामाजिक संगठनों से भी अपील करते हैं कि वे एकजुट होकर सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग करें.’
आपेट ने लद्दाख में शिक्षा को आगे बढ़ाने और वैज्ञानिक नवाचार में वांगचुक के योगदान का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा, ‘वांगचुक वह व्यक्ति हैं जिन्होंने हमारे जवानों के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले टेंट बनाए. वह खुद एक सैनिक के बेटे हैं. उन्होंने भारतीय सेना के जवानों का इतना ख्याल रखा है. ऐसे व्यक्ति को देशद्रोही कहना न सिर्फ कृतघ्नता है, बल्कि उकसावे वाला भी है. उनकी एकमात्र मांग यही है कि सरकार अपना वादा निभाए.’
क्या है मामला?
वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था. यह कार्रवाई लद्दाख को राज्य के दर्जे और संवैधानिक सुरक्षा की मांग को लेकर लेह, लद्दाख में हुए प्रदर्शनों के हिंसक हो जाने के बाद की गई थी. प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में चार लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे.
वांगचुक शिक्षा और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अपने नवाचारों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते हैं. उनकी हिरासत ने दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों का ध्यान खींचा था, जिन्होंने उनकी गिरफ्तारी की परिस्थितियों की समीक्षा की मांग की है.
11 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि वांगचुक की सेहत स्थिर है. यह जानकारी गीतांजलि अंगमो द्वारा अपने पति की रिहाई की मांग को लेकर दायर याचिका के जवाब में दी गई थी.
सरकार की ओर से यह भी कहा गया था कि वांगचुक की सेहत ऐसी नहीं है, जिसके आधार पर उन्हें विशेष राहत दी जाए, और उनकी हिरासत के कारण अब भी वैध हैं. सरकार ने अदालत से स्वास्थ्य आधार पर उनकी शीघ्र रिहाई पर विचार न करने का आग्रह किया था.
