हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद इटली के बैंक ने अडानी समूह से जुड़े दो लोगों के खातों की जांच की, संदिग्ध लेनदेन: एफटी

हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद इटली के बैंक इंतेसा सानपाओलो ने अडानी समूह से जुड़े दो लोगों की जांच शुरू की. फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, बैंक को उनके खातों में बड़े निवेश और कुछ लेनदेन संदिग्ध लगे. रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लेनदेन का महत्व इसलिए है क्योंकि वे हिंडनबर्ग के दावे को मज़बूती देते हैं.

गौतम अडानी और विनोद अडानी. (इलस्ट्रेशन: द वायर)

नई दिल्ली: ब्रिटेन के अख़बार फाइनेंशियल टाइम्स (एफटी) की 17 फरवरी 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, इटली के सबसे बड़े बैंक इंतेसा सानपाओलो ने जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट सामने आने के तुरंत बाद अडानी समूह से जुड़े दो व्यक्तियों की जांच शुरू की थी. ये दोनों गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी के सहयोगी बताए गए हैं.

जनवरी 2023 में अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर शेयर कीमतों में हेरफेर, इनसाइडर ट्रेडिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे. इन आरोपों के बाद इंतेसा सानपाओलो ने अपने उन ग्राहकों की पड़ताल की, जिनका संबंध अडानी समूह से था.

एफटी के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद बैंक अधिकारियों ने संबंधित दोनों व्यक्तियों, ताइवान के कारोबारी चांग चुंग-लिंग और संयुक्त अरब अमीरात के नासेर अली शाबान अहली, से मुलाकात की. दोनों ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए एक बयान पर हस्ताक्षर किए. इसके बावजूद बैंक ने उनके खातों को संदिग्ध गतिविधि के दायरे में चिह्नित किया और उन पर कुछ प्रतिबंध लगाए.

रिपोर्ट में इंतेसा सानपाओलो के एक आंतरिक मेमो का हवाला दिया गया है, जिसमें बताया गया कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट जारी होने के अगले दिन तक चांग के पास लगभग एक अरब डॉलर और अहली के पास दो अरब डॉलर की राशि ऐसे हेज फंड्स में निवेशित थी, जिनकी मूल परिसंपत्तियां ‘संभावित रूप से’ अडानी समूह की कंपनियों में लगी हुई थीं.

एफटी के मुताबिक, यह मेमो उस समय तैयार किया गया जब बैंक कर्मचारियों को पता चला कि 2020 में अधिग्रहित किए गए स्विस निजी बैंक ‘रेयल एंड सी’ की दुबई शाखा में तीन ग्राहक एक ही ‘बिज़नेस इंट्रोड्यूसर’ के जरिए जुड़े थे, विनोद अडानी, चांग और अहली.

चांग की स्विट्ज़रलैंड में भी जांच चल रही है, जहां उन पर अडानी समूह के कथित ‘फ्रंटमैन’ होने का संदेह जताया गया है.

मेमो के अनुसार, चांग और अहली ने इंतेसा के वरिष्ठ अधिकारियों को बताया कि हेज फंड से जुड़े खातों पर उनका ही नियंत्रण था. उनका कहना था कि उनकी संपत्ति पेशेवर गतिविधियों से अर्जित हुई है और अडानी समूह में उनका निवेश ‘उस परिवार के सदस्यों की व्यावसायिक समझ पर भरोसे’ के आधार पर किया गया.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन लेनदेन का महत्व इसलिए है क्योंकि वे हिंडनबर्ग के उस दावे को मजबूती देते हैं, जिसमें कहा गया था कि सहयोगियों के जरिए गुप्त रूप से अडानी समूह के शेयर रखे गए, जिससे शेयर कीमतों में हेरफेर रोकने से जुड़े नियमों का संभावित उल्लंघन हो सकता है.

मेमो में यह भी उल्लेख है कि चांग के खाते से विनोद अडानी के खाते के साथ सीधा लेनदेन हुआ था, हालांकि रकम ‘बहुत अधिक महत्वपूर्ण’ नहीं बताई गई.

इससे पहले एफटी और ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (ओसीसीआरपी) की संयुक्त रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चांग और अहली ने कथित तौर पर विनोद अडानी के एक कर्मचारी की मदद से ऑफशोर फंड्स के जरिए अडानी समूह के शेयर खरीदे और बेचे, जबकि वास्तविक नियंत्रण किसके पास था, इसे छिपाया गया.

एफटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंतेसा द्वारा चांग और अहली को ‘उसी हेज फंड्स में बहुत बड़ी मात्रा में हिस्सेदारी रखने वाला’ बताया जाना पहले सामने आ चुकी संरचना से मेल खाता है. जिन ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स की कंपनियों के जरिए इन निवेशों को नियंत्रित किया गया, उनके शुरुआती अक्षर भी उन कंपनियों से मिलते हैं जिनका कथित तौर पर पहले इस्तेमाल किया गया था.

इस बीच, भारत के बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगाए गए धोखाधड़ी के आरोपों से अडानी समूह को क्लीन चिट दे दी है. हिंडनबर्ग रिसर्च अब भंग हो चुकी है.

एफटी के अनुसार, अडानी समूह, जो देश की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी, सबसे बड़े निजी बंदरगाह संचालक, सबसे बड़े निजी हवाई अड्डा संचालक और सबसे बड़ा निजी कोयला आयातक हैं, ने सभी आरोपों से सख्ती से इनकार किया है.