हाईवे पर नमाज़ से जाम लगने की झूठी ख़बर चलाने के मामले में ज़ी न्यूज़ पर 1 लाख रुपये का जुर्माना

जम्मू-कश्मीर में ट्रक चालक द्वारा हाईवे पर नमाज़ पढ़ने के कथित वीडियो को बिना पुष्टि प्रसारित करने पर ज़ी न्यूज़ पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. एनबीडीएसए ने इसे गंभीर चूक मानते हुए सोशल मीडिया सामग्री के उपयोग को लेकर सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं.

(फोटो साभार: ज़ी न्यूज़)

नई दिल्ली: करीब एक साल पहले ज़ी न्यूज़ ने यह आरोप लगाया था कि जम्मू-कश्मीर में एक व्यक्ति ने हाईवे के बीचोंबीच अपना ट्रक रोककर नमाज़ अदा की, जिससे ट्रैफिक जाम लग गया. बाद में स्पष्ट हुआ कि वह चालक खुद भी अन्य वाहनों के साथ जाम में फंसा हुआ था. अब इस मामले में ‘सोशल मीडिया पर उपलब्ध अपुष्ट सामग्री का इस्तेमाल’ करने के लिए चैनल पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

मंगलवार (17 फरवरी) को जारी आदेश में न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीडीएसए) ने कहा कि ज़ी न्यूज़ ने आवश्यक सावधानी नहीं बरती, जो एक ‘स्पष्ट और गंभीर चूक’ है. एनबीडीएसए ने सोशल मीडिया से जुड़ी खबरों के प्रसारण के लिए छह नए दिशानिर्देश भी जारी किए. इसमें साफ कहा गया है कि केवल यह कह देना कि ‘वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की जा सकती’ पर्याप्त नहीं होगा.

एनबीडीएसए, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन द्वारा स्वेच्छा से बनाए गए आचार संहिता और प्रसारण मानकों को लागू करने वाली स्व-नियामक संस्था है. एसोसिएशन की वेबसाइट के अनुसार, इसके 125 समाचार और सामयिक विषयों से जुड़े चैनल सदस्य हैं.

यह आदेश एनबीडीएसए के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस ए.के. सीकरी ने जारी किया. यह 3 मार्च 2025 को प्रसारित ज़ी न्यूज़ के कार्यक्रम के खिलाफ दर्ज तीन शिकायतों पर सुनवाई के बाद आया. शिकायतें इंद्रजीत घोरपड़े, उत्कर्ष मिश्रा और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वकील सैयद काब राशिदी ने की थीं.

कार्यक्रम में ट्रक चालक का एक वीडियो दिखाया गया था, जिसमें वह अपने वाहन की छत पर नमाज़ अदा करता दिखाई दे रहा था. चैनल ने आरोप लगाया कि उसने ट्रक सड़क के बीच खड़ा कर दिया, जिससे जाम लग गया, और वह पूरे समय ‘पूरी तरह बेफिक्र’ बना रहा.

एंकर ने कहा, ‘हाईवे के दूसरी ओर सड़क पूरी तरह खाली दिख रही है, क्योंकि इस ड्राइवर की तरह वहां किसी ने नमाज़ नहीं पढ़ी.’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नमाज़ का समय आने पर चालक ने वाहन को किनारे लगाने के बजाय बीच सड़क में ही खड़ा कर दिया.

एंकर ने आगे कहा, ‘ज़ी न्यूज़ इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन जिसने भी इसे सोशल मीडिया पर देखा है, उसने ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई की मांग जरूर की है.’

हालांकि, कुछ दिनों बाद ऑल्ट न्यूज़ ने एक अधिक स्पष्ट वीडियो का हवाला देते हुए बताया कि संबंधित चालक स्वयं भी वाहनों की लंबी कतार में फंसा हुआ था. उस समय जारी परामर्श में जम्मू के रामबन क्षेत्र में एक लेन से यातायात चलने और पत्थर गिरने की चेतावनी भी दी गई थी, जहां कथित रूप से यह जाम लगा था.

शिकायतकर्ता घोरपड़े ने आरोप लगाया कि अपुष्ट वीडियो प्रसारित कर और मुस्लिम ट्रक चालक को गलत तरीके से दोषी ठहराकर ज़ी न्यूज़ ने आचार संहिता और प्रसारण मानकों का उल्लंघन किया है.

शिकायतों के जवाब में, लिखित स्पष्टीकरण और नवंबर में आयोजित सुनवाई के दौरान ज़ी न्यूज़ ने कहा कि उसने वीडियो को अपुष्ट बताया था और उसे तथ्यात्मक या सत्यापित के रूप में पेश नहीं किया था. चैनल ने किसी भी नियम के उल्लंघन से इनकार किया.

लेकिन जस्टिस सीकरी ने अपने आदेश में कहा कि एनबीडीएसए की राय में सोशल मीडिया पर उपलब्ध अपुष्ट सामग्री का इस्तेमाल करना प्रसारक की ओर से स्पष्ट और गंभीर लापरवाही है. यह आचार संहिता में निहित सटीकता के सिद्धांत के विपरीत है.

आदेश में कहा गया, ‘उल्लंघन की प्रकृति को देखते हुए एनबीडीएसए भारी जुर्माना भी लगा सकता था. लेकिन चूंकि प्रसारक ने बाद में विवादित वीडियो हटा दिया, इसलिए उस पर 1,00,000 रुपये का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया गया.’

जस्टिस सीकरी ने यह भी कहा कि आजकल प्रसारक और डिजिटल समाचार मंच रिपोर्टिंग में सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग कर रहे हैं. हालांकि, इससे गलत सूचना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार सामग्री के प्रसार का खतरा बढ़ जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए एसोसिएशन के सदस्यों के लिए छह दिशानिर्देश जारी किए गए हैं.

इन दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि:

  1. सोशल मीडिया से प्राप्त किसी भी जानकारी, तस्वीर या वीडियो को प्रसारित या प्रकाशित करने से पहले उसकी सटीकता की पुष्टि करना अनिवार्य है.
  2. जहां तक संभव हो, ऐसी सामग्री की पुष्टि जमीनी रिपोर्टिंग और अन्य विश्वसनीय स्रोतों, जैसे प्रत्यक्षदर्शियों, पुलिस या सरकारी अधिकारियों, से की जानी चाहिए.
  3. तस्वीरों और वीडियो की तथ्य-जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि उनमें किसी प्रकार की छेड़छाड़, तोड़-मरोड़ या एआई द्वारा तैयार की गई सामग्री शामिल न हो.
  4. किसी भी सामग्री को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए. भले ही वह असली हो, लेकिन गलत संदर्भ में दिखाए जाने पर वह भ्रामक साबित हो सकती है.
  5. सैन्य अभियान, सशस्त्र संघर्ष, आंतरिक अशांति, सांप्रदायिक हिंसा, सार्वजनिक अव्यवस्था, अपराध या इसी तरह की संवेदनशील परिस्थितियों से जुड़ी खबरों में सोशल मीडिया सामग्री का उपयोग करते समय उसे ‘जनहित’ और ‘सटीकता’ की कसौटी पर परखा जाना चाहिए.
  6. केवल यह कह देना कि तस्वीर या वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की जा सकती, आचार संहिता के तहत जिम्मेदारी से बचने का आधार नहीं बन सकता.

इस तरह एनबीडीएसए ने साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया की सामग्री का उपयोग करते समय समाचार संस्थानों को पूरी जिम्मेदारी और सावधानी बरतनी होगी.