नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में है. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कुलपति एक साक्षात्कार के दौरान यह कहती हुईं नज़र आ रही हैं कि दलित और अश्वेत समुदाय (ब्लैक) ‘विक्टिमहुड यानी पीड़ित मानसिकता’ से ग्रस्त हैं.
वह आगे यह भी कहती हैं कि आप स्थायी रूप से पीड़ित बनकर या विक्टिम कार्ड खेलकर तरक्की नहीं कर सकते.
खबरों के मुताबिक, इस इंटरव्यू के दौरान कुलपति ने कहा कि किसी भी समाज या समुदाय के लिए लगातार स्वयं को पीड़ित मानते रहना प्रगति में बाधा बन सकता है. यह एक अस्थायी ‘ड्रग’ की तरह है. आप यह कहते रहिए कि यह दुश्मन है, आप इस पर चिल्लाते हैं और फिर आपको अच्छा लगता है.’
“Dalits and Blacks are drugged with victimhood.”
And she is the current Vice-Chancellor of JNU, appointed by the RSS and BJP.
And she also said “There is permanent Victimhood” pic.twitter.com/vQLnyqzU3s
— Dr. Kanchana Yadav (@Kanchanyadav000) February 20, 2026
वह आगे कहती हैं, ‘… ऐसा ही अश्वेतों के लिए किया गया था. यही चीज दलित के लिए लाई गई थी और किसी को शैतान बनाकर तरक्की करना आसान नहीं है. जब किसी समूह को बार-बार यह बताया जाता है कि उसकी समस्याओं का कारण कोई ‘दुश्मन’ है, तो यह सोच लंबे समय तक समाधान नहीं दे सकती.’
बताया गया है कि कुलपति इस साक्षात्कार में सामाजिक न्याय, पहचान आधारित राजनीति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर अपने विचार रख रही थीं और वायरल वीडियो इस इंटरव्यू का एक अंश बताया जा रहा है.
जाति और रंग आधारित उनकी यह टिप्पणी यूजीसी के नए उच्च शिक्षण संस्थानों में समता संवर्धन विनियम नियमों पर व्यापक चर्चा के दौरान आई है, जिसमें शिक्षा नीति, सामाजिक न्याय और पहचान आधारित राजनीति जैसे विषय शामिल थे. उन्होंने कहा कि समाज में स्थायी परिवर्तन के लिए सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि केवल किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने से समाधान संभव नहीं होता.
कुलपति के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर कई छात्रों, शिक्षकों, पत्रकारों , राजनेताओं समेत अन्य लोगों ने आपत्ति जताई है.
जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय(JNU) की VC साहिबा को ‘दलित और ब्लैक्स’ के बारे में की गई अपनी अनर्गल, अवास्तविक और अमानवीय टिप्पणी के लिए सदियों से वंचित और उत्पीड़ित रहे इन समाजों से फौरन माफी मांगनी चाहिए. ऐसे सोच वाले व्यक्ति को JNU जैसे संस्थान का कुलपति हरगिज नहीं होना चाहिए.
— urmilesh (@UrmileshJ) February 20, 2026
No crazy pseudo-journalist humiliating Dalits about drinking water, it’s the JNU VC saying Dalits are drugged with ‘victimhood’! If the Supreme Court is watching, this is evidence enough to infer why we need #UGCEquityRegulations and why this VC must be asked to quit forthwith. pic.twitter.com/7RC9sreo8B
— Dipankar (@Dipankar_cpiml) February 19, 2026
JNU VC का बयान और UGC विवाद: संस्थानों का वैचारिक कब्ज़ा?
JNU के कुलपति का यह कहना कि “दलित और ब्लैक्स विक्टिमहुड के नशे में हैं” केवल एक आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं है—यह उसी सोच का विस्तार है जो आज UGC से जुड़े विवादों में दिख रही है। जब उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता पर सवाल… pic.twitter.com/aZ2OuXWrF7
— Dr. Laxman Yadav (@DrLaxman_Yadav) February 19, 2026
JNU VC Santishree Pandit’s ‘victim card’ slang exposes her Brahmin-RSS bias.
Dalits know their pain! We demand justice, not lectures from the privileged! #Delhi pic.twitter.com/5vyn3Jo0d0
— Deepali_Salve (@deepali_writes) February 20, 2026
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने वीसी के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा, ‘जेएनयू की वीसी अब वही बातें सबके सामने दोहरा रहे हैं जो आरक्षण विरोधी आंदोलन को समर्थन देने वाले लोग करते रहे हैं। यह बहुत शर्मनाक है और जिस कैंपस की वह मुखिया हैं, वहां विद्यार्थी सुरक्षित नहीं हैं। इससे यह भी पता चलता है कि भारत के कैंपस को तुरंत एक मज़बूत भेदभाव-रोधी फ्रेमवर्क की ज़रूरत क्यों है।
जेएनयू की वीसी को तुरंत इस्तीफ़ा दे देना चाहिए!’
जेएनयू छात्रसंघ ने भी उनकी टिप्पणी की आलोचना करते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है.
वीसी की सफाई
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद कुलपति की सफाई भी सामने आई है. उनका कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई शब्द इस्तेमाल नहीं किया, जिससे किसी समुदाय का अपमान हो.
उनके मुताबिक, उनसे वोकिज्म यानी सामाजिक न्याय से जुड़े खुले विचारों पर सवाल पूछा गया था. इस संदर्भ में उन्होंने कहा था कि कुछ लेखन और विचारधाराओं में विक्टिमहुड पर अधिक जोर दिया जाता है, जिससे एक काल्पनिक दुनिया की छवि बनती है. उन्होंने यह भी कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है.
कुलपति ने बताया कि उन्होंने समता नियमों पर राय रखते हुए कहा था कि कई बार इन नियमों में वास्तविक समानता नज़र नहीं आती. उन्होंने साफ कहा कि वह खुद बहुजन समाज से आती हैं, इसलिए किसी भी समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का सवाल ही नहीं उठता.
उनके अनुसार, उनके विचारों को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया.
मालूम हो कि इससे पहले 2022 में भी उनका एक बयान चर्चा में आया था. उस समय उन्होंने कहा था कि कोई भी हिंदू देवी-देवता ऊंची जाति के नहीं हो सकते और भगवान शिव को अनुसूचित जाति या जनजाति से जोड़ा था. साथ ही मनुस्मृति का हवाला देते हुए महिलाओं को शूद्र बताए जाने की बात कही थी. उन बयानों पर भी काफी विवाद हुआ था.
