ज़ी तेलुगु की गिरफ़्तार लोगों की ट्रांसजेंडर पहचान फ़र्ज़ी बताने वाली ख़बर पर 1 लाख रुपये का जुर्माना

ज़ी तेलुगु न्यूज़ ने नवंबर 2024 में प्रसारित एक कार्यक्रम में एक मामले में गिरफ़्तार किए गए कुछ लोगों की ट्रांसजेंडर पहचान को ‘फ़र्ज़ी’ बताया था. इसे लेकर न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन ने 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए प्रसारण में इस्तेमाल की गई तस्वीरें हटाने का निर्देश भी दिया है.

(साभार: ज़ी समूह)

नई दिल्ली: न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (एनबीडीएसए) ने ज़ी तेलुगु न्यूज़ पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. चैनल ने एक कार्यक्रम प्रसारित किया था जिसमें गिरफ्तार किए गए कुछ लोगों की ट्रांसजेंडर पहचान को ‘फर्जी’ बताया गया था और प्रसारण में इस्तेमाल की गई तस्वीरों के स्रोत के बारे में भी वह स्पष्ट जानकारी नहीं दे सका.

यह स्व-नियामक संस्था नवंबर 2024 में प्रसारित कार्यक्रम के खिलाफ इंद्रजीत घोरपड़े द्वारा दायर शिकायत पर सुनवाई कर रही थी. मंगलवार (17 फरवरी) को जारी अपने आदेश में एनबीडीएसए ने ज़ी तेलुगु न्यूज़ को प्रसारण में इस्तेमाल की गई तस्वीरें हटाने का निर्देश भी दिया.

मालूम हो कि बीते मंगलवार को ही ज़ी समूह के खिलाफ जारी एक अन्य एनबीडीएसए आदेश – जिसमें चैनल ने गलत तरीके से यह दावा किया था कि जम्मू-कश्मीर में एक ट्रक चालक ने अपने वाहन की छत पर नमाज़ पढ़कर ट्रैफिक जाम कर दिया – को मिलाकर मीडिया समूह पर कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

घोरपड़े, जिनकी शिकायतों पर अक्सर एनबीडीएसए कार्रवाई करता है, ने कहा कि ज़ी तेलुगु न्यूज़ के कार्यक्रम में नवंबर 2024 में हैदराबाद में कथित रूप से सार्वजनिक उपद्रव के आरोप में गिरफ्तार किए गए ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के एक समूह की लैंगिक पहचान को ‘फर्जी’ बताया गया था. उन्होंने इसे ‘स्पष्ट रूप से ट्रांसफोबिक, अप्रमाणित और गलत’ बताया.

आदेश के अनुसार, घोरपड़े ने यह भी सवाल उठाया कि ज़ी तेलुगु न्यूज़ ने किन आधारों पर इन व्यक्तियों की ट्रांसजेंडर पहचान को ‘फर्जी’ कहा. उन्होंने आरोप लगाया कि चैनल ने इस मामले से असंबंधित ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया.

ज़ी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि ‘फर्जी’ शब्द का उपयोग ‘अनजाने में हुई गलती’ थी, जिसे ध्यान में लाए जाने के तुरंत बाद सुधार लिया गया. चैनल ने यह भी दावा किया कि उसने अपने कार्यक्रम में इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया और न ही यह संकेत दिया कि संबंधित व्यक्तियों की ट्रांसजेंडर पहचान ‘फर्जी’ थी.

चैनल ने यह भी कहा कि उसका प्रसारण पूरी तरह स्थानीय प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित था और अन्य प्रतिष्ठित समाचार एजेंसियों द्वारा इसकी पुष्टि की गई थी.

हालांकि, घोरपड़े ने आरोप लगाया कि ज़ी ने इस शब्द का इस्तेमाल ‘जानबूझकर मामले को सनसनीखेज बनाने और असहाय तथा हाशिये पर मौजूद लोगों को निशाना बनाने’ के लिए किया तथा चैनल ‘पूर्वाग्रहग्रस्त कानून-प्रवर्तन एजेंसियों का मुखपत्र बनकर रह गया.’ इसके बाद उन्होंने 26 नवंबर 2024 को मामला एनबीडीएसए के पास भेज दिया.

एक वर्ष बाद जब स्वैच्छिक नियामक संस्था ने दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया, तो ज़ी ने कहा कि शुरुआती स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार गिरफ्तार लोग ‘ट्रांसजेंडर होने का नाटक करने वाले पुरुष’ बताए गए थे, लेकिन स्पष्टीकरण मिलने के बाद ‘फर्जी’ शब्द हटा दिया गया. चैनल ने यह भी कहा कि इस्तेमाल की गई तस्वीरें स्थानीय कानून-प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराई गई थीं.

दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए एनबीडीएसए के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश ए.के. सिकरी ने कहा कि कार्यक्रम में इस्तेमाल की गई ‘तस्वीरें/फोटोग्राफ फर्जी प्रतीत होती हैं, क्योंकि इस तथ्य पर प्रसारक ने विवाद नहीं किया.’ ज़ी ने भले ही कहा कि तस्वीरें उसे कानून-प्रवर्तन एजेंसियों से मिली थीं, लेकिन ‘इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया.’

‘फर्जी’ शब्द के इस्तेमाल पर एनबीडीएसए ने निष्कर्ष निकाला कि ज़ी तेलुगु न्यूज़ को ‘सावधानी बरतनी चाहिए’ और किसी भी सामग्री के प्रसारण से पहले तथ्यों का सत्यापन करना चाहिए.

आदेश में कहा गया, ‘कार्यक्रम में तस्वीरें दिखाने और ‘फर्जी’ शब्द के इस्तेमाल से जिन लोगों की तस्वीरें दिखाई गईं उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है. इस लापरवाही को देखते हुए एनबीडीएसए 1,00,000 रुपये का जुर्माना लगाता है.’ साथ ही चैनल को सात दिनों के भीतर तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया गया.

अपनी वेब रिपोर्ट के वर्जन में भी ज़ी ने कहा था कि नवंबर 2024 में गिरफ्तार किए गए कई लोग ‘नकली हिजड़े’ थे.