दिल्ली: पूर्वोत्तर की महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, नस्लीय भेदभाव के आरोप; एफआईआर दर्ज

दिल्ली के मालवीय नगर में पूर्वोत्तर की तीन महिलाओं, जिनमें से एक दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा हैं, के साथ कथित नस्लीय दुर्व्यवहार और धमकाने की घटना सामने आई है. आरोप है कि पड़ोसी दंपति ने उनकी पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं. सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो सामने आने के बाद मेघालय के सीएम ने कहा है कि पूर्वोत्तर के लोगों के ख़िलाफ़ भेदभाव बंद होना चाहिए.

(फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नई दिल्ली: दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में पूर्वोत्तर की तीन युवतियां, जिनमें से एक दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा भी हैं, के साथ कथित नस्लीय दुर्व्यवहार और धमकी की घटना सामने आई है.

लड़कियों ने आरोप लगाया है कि बीते सप्ताह जब वे अपने किराए के घर में बिजली का कुछ काम करवा रही थीं, तभी उनके नीचे रहने वाले दंपति ने इससे उड़ने वाली धूल को लेकर हुए विवाद के दौरान उन्हें धमकाया और नस्लीय तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, यह जानकारी पुलिस ने रविवार (22 फरवरी) को दी. बताया जा रहा है कि इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें देखा जा सकता है कि एक महिला तीन लड़कियों के खिलाफ अपमानजनक और नस्लीय टिप्पणी करती सुनाई दे रही हैं. वह तीनों को चेतावनी देती हैं कि ‘मुझसे पंगा मत लेना’ क्योंकि उनका आदमी (पति)  एक ‘कस्टम अधिकारी’ का बेटा है. इसके बाद वह उन्हें डंडे से पीटने की धमकी भी देती हैं.

वीडियो में आरोपी महिला सीढ़ियों पर खड़ी दिखाई दे रही हैं और उनके साथ एक आदमी भी नज़र आ रहा है.आरोपी महिला कथित तौर पर पूर्वोत्तर की महिलाओं के लिए ‘गटर-छाप’ और ‘नॉर्थईस्टर्न लोग गंदे होते हैं’ जैसे अपमानजनक शब्दों प्रयोग करती नज़र आ रही हैं.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह वीडियो किसने बनाया। अखबार और द वायर दोनों ही इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सके हैं.

इस मामले में आरोपी के तौर पर पुलिस ने बहुमंजिला अपार्टमेंट में इन लड़कियों के एक मंजिल नीचे रहने वाले मीडिया सलाहकार हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी की पहचान की है और बताया है कि इन महिलाओं में से एक की शिकायत के आधार पर शनिवार (21 फरवरी) को दंपति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

स्क्रोल के अनुसार, आरोपी दंपति हर्ष सिंह और उनकी पत्नी रूबी जैन उसी इमारत में निचली मंजिल पर रहते हैं. घटना के दौरान रूबी जैन ने महिलाओं पर ‘मसाज पार्लर में काम करने वाली’ और ‘मोमोज बेचने’ जैसी आपत्तिजनक और नस्लीय टिप्पणियां कीं.

वीडियो में एक पुलिसकर्मी को दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश करते हुए भी देखा गया.

इंडियन एक्स्प्रेस ने बताया है कि पीड़ित महिलाओं का यह भी कहना है कि उन्होंने धूल गिरने को लेकर आरोपी दंपति माफी भी मांगी थी, फिर भी उन्होंने नस्लीय और अपमानजनक टिप्पणियां जारी रखीं.

इस संबंध में पुलिस उपायुक्त (डीसीपी-दक्षिण) अंकित चौहान ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 79 (महिलाओं की गरिमा भंग करना), 351(2) (आपराधिक धमकी), 3(5) और 196 (शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

पहले से कोई विवाद तो नहीं था, इसकी जांच कर रहे हैं: पुलिस

पुलिस के अनुसार, यह घटना शुक्रवार को दोपहर लगभग 3:30 बजे घटी, जब 19 से 23 वर्ष की आयु की तीन लड़कियां अपने घर में बिजली का काम करवा रही थीं. इस दौरान कथित तौर पर कुछ धूल और मलबा नीचे वाले फ्लैट में रहने वाले दंपति के घर में गिर गया.

अपनी शिकायत में लड़कियों ने आरोप लगाया है कि दंपति उनके घर आए और झगड़ा शुरू कर दिया. उनकी पहचान को निशाना बनाते हुए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया और धमकियां दीं.

उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित और अपमानित किया गया. पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और घटनाक्रम की पुष्टि के प्रयास जारी हैं.

पुलिस बिल्डिंग के अन्य निवासियों से भी पूछताछ कर रही है. एक अधिकारी ने कहा, ‘उचित जांच के बाद कानून के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.’ पुलिस ने बताया कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या किराएदारों और आरोपी दंपति के बीच पहले से कोई विवाद था.

आरोपी दंपति फिलहाल फरार हैं और पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी किया है. पीड़ित महिलाओं ने औपचारिक माफी की मांग की है और कहा है कि यह केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर समुदाय की गरिमा पर हमला है.

घटना के बाद बिल्डिंग के ब्रोकर ने महिलाओं को दो महीने के भीतर फ्लैट खाली करने के लिए भी कहा, जिससे उनकी सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है.

जांचकर्ताओं ने कहा है कि वे यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मामला और न बढ़े और शिकायतकर्ताओं को सुरक्षा का एहसास हो.

इस मामले पर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ भेदभाव बंद होना चाहिए.

गौरतलब है कि बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसरों की तलाश में पूर्वोत्तर से ज्यादातर युवा राजधानी दिल्ली का रुख करते हैं. लेकिन हाल के वर्षों में इनके खिलाफ नस्लीय हमलों और दुर्व्यवहार की कई घटनाएं सामने आई हैं. खासकर महिलाओं के लिए दिल्ली एक ऐसी जगह बन गई है, जहां नस्लवाद, लिंगभेद और सांस्कृतिक अलगाव से उन्हें एक साथ गुजरना पड़ रहा है, साथ ही सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है, और अक्सर इसकी कीमत चुकानी पड़ती है.

खबरों के मुताबिक दिल्ली में रहने वाले उत्तर-पूर्व के लगभग 50-60% नागरिकों ने कभी न कभी किसी न किसी रूप में भेदभाव या नस्लीय टिप्पणियों का सामना किया है. मालवीय नगर और मुनिरका जैसे इलाकों में ऐसी घटनाएं अक्सर रिपोर्ट की जाती हैं.