नई दिल्ली: 2026 के ब्रिटिश एकेडमी फिल्म अवॉर्ड्स (बाफ्टा) में भारत की एकमात्र नामित फिल्म मणिपुरी भाषा की फीचर फिल्म ‘बूंग’ ने रविवार (22 फरवरी) को ‘बेस्ट चिल्ड्रेन एंड फैमिली फिल्म’ श्रेणी में पुरस्कार जीत लिया.
फिल्म की निर्देशक लक्ष्मीप्रिया देवी, जिन्होंने इस फिल्म से निर्देशन में पदार्पण किया है, ने लंदन के रॉयल फेस्टिवल हॉल में पुरस्कार स्वीकार करते हुए मणिपुर में लंबे समय से चले आ रहे जातीय हिंसा की ओर ध्यान आकर्षित किया.
उन्होंने कहा, ‘बूंग एक ऐसी जगह की कहानी है जो बेहद अशांत है, जिसे भारत में लंबे समय से नजरअंदाज किया गया है और जिसका पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं हुआ. हम प्रार्थना करते हैं कि मणिपुर में शांति लौटे. हम चाहते हैं कि आंतरिक रूप से विस्थापित सभी बच्चे, जिनमें फिल्म के बाल कलाकार भी शामिल हैं, अपनी खुशी, मासूमियत और सपनों को फिर से पा सकें. हम प्रार्थना करते हैं कि कोई भी संघर्ष इंसान की सबसे बड़ी ताकत – क्षमा – को कभी नष्ट न कर सके.’
फिल्म का प्रीमियर 2024 के टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में हुआ था. इसके बाद इसे वारसॉ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2024, मामी मुंबई फिल्म फेस्टिवल 2024, 55वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) और 2025 के इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न में भी प्रदर्शित किया गया.
फिल्म की कहानी बूंग (गुगुन किपगेन) नाम के एक छोटे लड़के के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी मां को सरप्राइज देने के लिए अपने पिता की तलाश में निकल पड़ता है.
Lakshmipriya Devi accepts the #EEBAFTAs Children’s and Family Film award for Boong 💫 🗻 pic.twitter.com/TFBnBmDVSx
— BAFTA (@BAFTA) February 22, 2026
आलोचकों से सराहना मिलने के बावजूद सितंबर 2025 में भारत में फिल्म को सीमित सिनेमाघरों में ही रिलीज किया गया था.
भारत में रिलीज से पहले लक्ष्मीप्रिया देवी ने कहा था, ‘मणिपुर में दो साल से अधिक समय से जारी संघर्ष और मुख्यधारा भारत में पूर्वोत्तर को लेकर मौजूद उदासीनता के बीच मुझे अपने देशवासियों को हमारे बारे में बताने और संवेदनशील बनाने की गहरी जरूरत महसूस होती है, ताकि हम अधिक समावेशी समाज बना सकें.’
फिल्म के निर्माता फरहान अख्तर, विकेश भुटानी, एलन मैकएलेक्स, रितेश सिद्धवानी और शुजात सौदागर हैं.
गौरतलब है कि मई 2023 में मणिपुर में फिल्म की शूटिंग समाप्त होने के लगभग दो सप्ताह बाद मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी थी. तब से अब तक करीब 260 लोगों की मौत हो चुकी है और 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.
