महाराष्ट्र के मंत्री बोले- लाडकी बहिन योजना से विभागों पर वित्तीय दबाव, पर यह जारी रहेगी

महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने बीते शुक्रवार विधान परिषद में कहा कि राज्य सरकार की प्रमुख योजना मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना से ऐसी परिस्थितियां पैदा हो रही हैं जिनसे अन्य विभागों के साथ अन्याय हो रहा है, बावजूद इसके सरकार का इस योजना को बंद करने का कोई इरादा नहीं है.

विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले जून 2024 में शुरू की गई इस योजना में लगभग 2.41 करोड़ महिला लाभार्थी हैं. (फोटो: एक्स)

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के मंत्री गणेश नाइक ने शुक्रवार (27 फरवरी) को कहा कि मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना से सरकारी विभागों पर वित्तीय दबाव पड़ रहा है, लेकिन इसे बंद नहीं किया जाएगा.

द हिंदू के अनुसार, नाइक ने विधान परिषद में कहा, ‘वित्तीय दबाव के बावजूद सरकार का इस योजना को बंद करने का कोई इरादा नहीं है.’

उल्लेखनीय है कि जून 2024 में शुरू की गई इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की उन महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की राशि हस्तांतरित की जाती है जिनके परिवारों की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है.

ऐसा माना जाता है कि लाडकी बहिन योजना ने नवंबर 2024 में 288 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन की 230 सीटें जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

इंडियन एक्सप्रेस ने वन मंत्री के हवाले से बताया कि सरकार ने लाडकी बहिन योजना को स्वीकार कर लिया है. भले ही इससे अन्य विभागों में अन्याय की स्थिति उत्पन्न हो, यह योजना जारी रहेगी.

मंत्री की यह टिप्पणी कांग्रेस एमएलसी द्वारा कोल्हापुर जिले के वन क्षेत्रों में स्थित धनगर और आदिवासी बस्तियों तक सड़क संपर्क की कमी के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में आई.

गौरतलब है कि लाडकी बहिन योजना राज्य के वित्त पर पड़ने वाले दबाव के कारण विवादों में घिरी हुई है. मासिक जांच में अपात्र नामांकनों के कई मामले भी सामने आए हैं.

राज्य सरकार इस योजना के तहत हर महीने 2.4 करोड़ लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए 3,700 करोड़ रुपये खर्च करती है.

अक्टूबर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और राज्य मंत्री छगन भुजबल ने दावा किया था कि लाडकी बहिन योजना के कारण सभी सरकारी विभाग निधि संकट का सामना कर रहे हैं.

जुलाई में योजना की समीक्षा में पाया गया कि महाराष्ट्र में 14,000 से अधिक पुरुषों को कथित तौर पर 10 महीनों तक इस योजना के तहत मासिक भुगतान प्राप्त हुआ था.

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि 14,298 पुरुषों ने अपनी पहचान गलत बताकर इस योजना में पंजीकरण कराया था, जिससे राज्य के खजाने को 21.4 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. उनके खातों में भुगतान रोक दिया गया है.