गुजरात में दो साल में 322 एशियाई शेरों की मौत, बढ़ते मृत्यु दर से संरक्षण पर सवाल

गुजरात सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत किए गए एशियाई शेरों की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक 31 जनवरी 2026 तक गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 हो गई है, लेकिन पिछले दो वर्षों में 322 शेरों की मौत भी हो चुकी है.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: गुजरात में पिछले दो वर्षों में 322 शेरों की मौत हो चुकी है. 31 जनवरी, 2026 तक गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 हो गई है, लेकिन ये उत्साहजनक आंकड़े आबादी में वृद्धि और मृत्यु दर के बीच एक गंभीर संतुलनहीनता को उजागर करता है.

891 शेरों की इस कुल संख्या में 255 नर शेर, 405 शेरनियां और 231 शावक शामिल हैं. यह संरचना जनसंख्या विस्तार का संकेत देती है, लेकिन लगातार बढ़ रहे मृत्यु दर चिंता के संकेत हैं.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई शेरों की जनगणना के ये आंकड़े गुजरात सरकार द्वारा राज्य विधानसभा में प्रस्तुत किए गए हैं. 

कांग्रेस विधायक शैलेंद्र परमार के सवाल के जवाब में वन मंत्री अर्जुन मोधवाड़िया ने बताया कि 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2025 के बीच राज्य में 313 शेरों की मौत हुई, वहीं इस वर्ष 31 जनवरी तक 9 मौतें हुईं. 

मृत्यु का सिलसिला वर्ष 2024 से शुरू होता है, जहां 40 नर शेर, 44 शेरनियां और 79 शावकों की मौत हुई, साथ ही दो अज्ञात शव भी मिले. इस वर्ष शावकों की अधिक मौतों ने संकेत दिया कि पारिस्थितिक तथा आवास संबंधी दबाव सबसे अधिक असर आबादी के सबसे कम उम्र के हिस्से पर डाल रहे हैं.

वर्ष 2025 में भी यह प्रवृत्ति कम नहीं हुई. इस दौरान 32 नर शेर, 44 शेरनियां और 66 शावकों की मौत हुई, साथ ही छह अज्ञात शव मिले. इससे यह स्पष्ट होता है कि यह मौतें किसी एक वर्ष की घटना नहीं, बल्कि लगातार जारी रहने वाली संरचनात्मक समस्या है.

अख़बार के अनुसार, साल 2026 के पहले महीने में भी यह रुझान जारी रहा. जनवरी के अंत तक तीन नर शेर, तीन शेरनियां और तीन शावकों की मौत हो चुकी थी, जो दर्शाता है कि मृत्यु दर की गति में कोई स्पष्ट कमी नहीं आई है.

पिछले तीन वर्षों में प्राकृतिक कारणों से 258 मौतें हुईं. इनमें 2024 में 28 नर शेर, 28 शेरनियां और 68 शावक; 2025 में 28 नर शेर, 38 शेरनियां और 55 शावक; तथा जनवरी 2026 में छह मौतें शामिल हैं. यह क्रम वृद्ध होती आबादी, क्षेत्रीय संघर्ष, बीमारियों और पारिस्थितिक दबावों को लगातार बने रहने वाले जोखिम के रूप में दर्शाता है.

लेकिन अधिक चिंता का विषय अप्राकृतिक मौतें हैं, जिनकी संख्या तीन वर्षों में 64 तक पहुंच गई है. 2024 में 12 नर शेर, 16 शेरनियां और 11 शावकों की अप्राकृतिक मौत हुई; 2025 में 4 नर शेर, 6 शेरनियां, 11 शावक और एक अज्ञात शव मिला; जबकि 2026 के पहले महीने में तीन और मौतें दर्ज की गईं. ये आंकड़े मानव-वन्यजीव संघर्ष, दुर्घटनाओं और आवास क्षेत्र में बढ़ते हस्तक्षेप जैसे खतरों की ओर संकेत करते हैं.

वन मंत्री ने कहा कि सरकार ने अप्राकृतिक मौतों को रोकने और संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं. इनमें विभिन्न स्थानों पर वन्य पशुओं के लिए उपचार केंद्र स्थापित करना, पशु चिकित्सकों की नियुक्ति करना और समय पर चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए एंबुलेंस सेवा शुरू करना शामिल है.