नई दिल्ली: अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी की ताज़ा वार्षिक खतरा आकलन (थ्रेट असेसमेंट) रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने में मदद की थी, और फिलहाल दोनों देशों की तरफ से फिर से खुले संघर्ष में लौटने की कोई मंशा नहीं दिखाई गई है.
हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि उग्रवादी हमलों के चलते क्षेत्र अचानक किसी संकट की चपेट में आ सकता है.
राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के कार्यालय (ओडीएनआई) ने 18 मार्च को जारी अपनी 2026 की वार्षिक खतरा आकलन (एटीए) रिपोर्ट में कहा है कि दक्षिण एशिया अमेरिका के लिए अब भी ‘स्थायी सुरक्षा चुनौतियां’ पेश करता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में दो परमाणु-संपन्न पड़ोसियों के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम लगातार बना रहता है. इसमें यह भी रेखांकित किया गया है कि पिछले टकराव दिखाते हैं कि बड़ी संख्या में जान-माल के नुकसान वाली घटनाओं के बाद हालात कितनी तेजी से बिगड़ सकते हैं.
रिपोर्ट में पहलगाम के पास हुए आतंकी हमले का उल्लेख किया गया है, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी. इसे इस बात का उदाहरण बताया गया है कि किस तरह आतंकवादी हमले दो परमाणु-संपन्न देशों के बीच संघर्ष को भड़का सकते हैं, जो स्वतंत्रता के बाद कई बार युद्ध लड़ चुके हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘राष्ट्रपति ट्रंप के हस्तक्षेप ने हालिया परमाणु तनाव को कम किया, और हमारा आकलन है कि दोनों देशों में से कोई भी खुले संघर्ष में लौटना नहीं चाहता. हालांकि, ऐसे हालात बने हुए हैं जिनका फायदा उठाकर आतंकी तत्व संकट पैदा कर सकते हैं.’
यह आकलन ऐसे समय में सामने आया है जब ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से यह दावा कर चुके हैं कि उन्होंने मई 2025 में पहलगाम हमले के बाद चार दिनों तक चले भारत-पाकिस्तान टकराव को खत्म कराया था.
ट्रंप ने भाषणों, सोशल मीडिया और इंटरव्यू में 70 से अधिक बार दोहराया है कि उन्होंने 10 मई को 200% टैरिफ लगाने की धमकी देकर दोनों देशों के बीच युद्धविराम करवाया और संभावित परमाणु युद्ध को टाल दिया. उन्होंने यह भी दावा किया है कि इस दौरान पांच से दस लड़ाकू विमान मार गिराए गए थे.
वहीं, भारत ने लगातार कहा है कि तनाव में कमी नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच सीधे संवाद के जरिए आई थी, और उसने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार करने से इनकार किया है.
उधर, पाकिस्तान ने ट्रंप के दावों का खंडन नहीं किया है, बल्कि उनका स्वागत किया है और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित भी किया.
द्विपक्षीय तनाव के अलावा रिपोर्ट में भारत के रणनीतिक माहौल से जुड़े व्यापक सुरक्षा मुद्दों का भी जिक्र किया गया है. इसमें कहा गया है कि आईएसआईएस-के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए हुए है और बाहरी हमले करने की मंशा रखता है, हालांकि ‘तालिबान अपनी सुरक्षा सेवाओं को मजबूत कर रहा है और उसके खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर रहा है.’
रिपोर्ट के अनुसार, ‘भारत नए और लंबी दूरी तक वार करने वाले परमाणु डिलीवरी सिस्टम विकसित कर रहा है,’ जिससे वह चीन, रूस, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान जैसे उन देशों की श्रेणी में आ जाता है जो अपने परमाणु हथियार भंडार का आधुनिकीकरण या विस्तार कर रहे हैं. रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 2035 तक अमेरिका के लिए वैश्विक स्तर पर मिसाइलों से खतरा मौजूदा 3,000 से बढ़कर 16,000 से अधिक हो सकता है.
रिपोर्ट में पाकिस्तान के सैन्य विकास पर भी प्रकाश डाला गया है. इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ‘तेजी से उन्नत मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है,’ जो भविष्य में दक्षिण एशिया से बाहर तक पहुंच सकती है और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकती है.
एक अलग खंड में रिपोर्ट ने वैश्विक मादक पदार्थ आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका का भी जिक्र किया है. इसमें कहा गया है कि ‘चीन और भारत अवैध फेंटानिल के प्रीकर्सर रसायनों और गोली बनाने के उपकरणों के प्रमुख स्रोत देश बने हुए हैं.’ साथ ही यह भी जोड़ा गया है कि ‘पिछले एक वर्ष में भारत ने मादक पदार्थ विरोधी प्रयासों को तेज किया है’ और भारतीय सरकार ने ‘इस क्षेत्र में अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है.’
