महाराष्ट्र: एकनाथ शिंदे का भाजपा पर सतारा ज़िला परिषद चुनाव में धांधली का आरोप, कहा- लोकतंत्र की हत्या

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने पिछले सप्ताह सतारा ज़िला परिषद के कुछ निर्वाचित सदस्यों के ख़िलाफ़ कथित तौर पर की गई पुलिस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ क़रार देते हुए भाजपा पर स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का आरोप लगाया. सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सरकार इसकी गहन जांच करेगी.

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे. (फोटो साभार: X/@mieknathshinde)

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सतारा जिला परिषद चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए इस मामले में पुलिस के कथित हस्तक्षेप को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है.

मालूम हो कि महाराष्ट्र की ‘महायुति’ सरकार में भाजपा, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) साझेदार हैं.

फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, सतारा जिला परिषद चुनाव के संबंध में सोमवार ( 23 मार्च) को विधानसभा में बोलते हुए एकनाथ शिंदे ने पुलिस पर स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के लिए प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में औपचारिक जांच का आश्वासन दिया.

उल्लेखनीय है कि यह विवाद बीते शुक्रवार को हुए जिला परिषद अध्यक्षीय चुनाव से उपजा है, जिसमें शिवसेना-एनसीपी गठबंधन के पास संख्यात्मक बढ़त होने के बावजूद भाजपा की प्रिया शिंदे ने यह पद हासिल कर लिया.

बताया गया कि मतदान से पहले कुछ जिला परिषद सदस्यों को कथित तौर पर पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद भाजपा ने गठबंधन को मामूली अंतर से पीथे छोड़ दिया, जिससे मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए.

विधानसभा में बोलते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को मतदान करने से रोकने का पुलिस का कथित प्रयास एक गंभीर अपराध है.

एकनाथ शिंदे ने आगे कहा कि उन्होंने सतारा पुलिस को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि वे किसी भी सदस्य के मतदान को बाधित न करें. पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते समेत वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासनों के बावजूद स्थानीय पुलिस ने कथित तौर पर सदस्यों को परिसर से बाहर निकाल दिया.

शिंदे ने पुलिस कार्रवाई के संदिग्ध समय पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ सदस्यों को मतदान समाप्त होने के बाद ही रिहा कर दिया गया, जो परिणाम को प्रभावित करने के जानबूझकर किए गए प्रयास का संकेत देते हैं.

राज्य विधानसभा के दोनों सदनों में इस राजनीतिक हंगामे की गूंज सुनाई दी. हंगामे पर प्रतिक्रिया देते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार गहन जांच करेगी और निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई करेगी.

हालांकि, इस बीच सत्ताधारी गठबंधन के बीच मतभेद खुलकर सामने देखने को मिले.

विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई, जो शिवसेना नेता और जिला संरक्षक मंत्री भी हैं, ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने उनके साथ बदसलूकी की.

एनसीपी नेता और राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद पाटिल ने भी दावा किया कि उनके साथ भी ऐसा ही बर्ताव किया गया. देसाई ने भाजपा के राजनीतिक दबाव का भी आरोप लगाया और प्रशासन पर भाजपा के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगाया.

उन्होंने दावा किया कि झूठे मामलों और विधायकों की खरीद-फरोख्त ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया.

उपाध्यक्ष नीलम गोरहे ने इस घटना को लेकर सतारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोषी को निलंबित करने का निर्देश दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया.

वहीं, भाजपा मंत्री जयकुमार गोर ने इस निर्देश का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इसे दूसरे पक्ष की बात सुने बिना जारी किया गया है.

इसके बाद अध्यक्ष राम शिंदे ने उपाध्यक्ष के निर्देश पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और पुलिस अधीक्षक का निलंबन स्थगित कर दिया गया.

इस पूरे मामले को लेकर शिवसेना (यूबीटी) नेता अनिल परब ने महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि अगर मंत्री खुद असुरक्षित हैं, तो सरकार आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे करेगी. अनिल परब ने सहयोगी दलों पर भाजपा के डर से चुप रहने का आरोप भी लगाया है.