नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के उस आदेश पर दी गई अंतरिम रोक को आगे बढ़ा दिया है, जिसमें कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था. इनमें उस समय के सर्किल ऑफिसर (सीओ) अनुज कुमार चौधरी भी शामिल हैं.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार (24 मार्च) को मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत में जवाबी हलफनामा दाखिल किया. इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील को इस पर जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया.
अदालत ने पहले दी गई अंतरिम राहत को जारी रखते हुए अगली सुनवाई की तारीख 21 अप्रैल तय की.
यह मामला पिछले महीने संभल के तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर द्वारा दिए गए आदेश से संबंधित है.
इससे पहले जस्टिस समित गोपाल ने संभल के तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए 9 जनवरी के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें सीजेएम ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था.
अनुज चौधरी के अलावा राज्य सरकार ने भी सीजेएम के आदेश को चुनौती दी थी. अदालत ने दोनों याचिकाओं को एक साथ जोड़ दिया है.
शिकायतकर्ता यामीन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173(4) के तहत याचिका दायर की थी, जिसे तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर के समक्ष प्रस्तुत किया गया.
संभल के खग्गू सराय अंजुमन इलाके के निवासी यामीन ने आरोप लगाया था कि उनका 24 वर्षीय बेटा आलम 24 नवंबर, 2024 को शाही जामा मस्जिद इलाके के पास हुई हिंसा के दौरान पुलिस की गोलीबारी में घायल हुआ. याचिका के अनुसार, आलम मस्जिद के पास पापड़ और बिस्कुट बेच रहा था, तभी पुलिस ने उस पर गोली चला दी.
यामीन की याचिका में संभल के सर्किल ऑफिसर अनुज चौधरी और संभल कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर का नाम शामिल था.
9 जनवरी को संभल के पूर्व सीजेएम ने संभल हिंसा के संबंध में अनुज चौधरी, संभल कोतवाली के प्रभारी अनुज कुमार तोमर और 10 अज्ञात पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था. हालांकि, संभल पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार करते हुए कहा था कि वह कोर्ट के इस आदेश के विरुद्ध अपील करेगी.
अपने 11 पन्नों के आदेश में सीजेएम सुधीर ने कहा था कि पुलिस ‘आधिकारिक कर्तव्य’ का हवाला देकर आपराधिक कृत्यों से बच नहीं सकती.
हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए सीजेएम ने कहा कि किसी व्यक्ति पर गोली चलाना आधिकारिक कर्तव्य का निर्वहन नहीं माना जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया यह एक संज्ञेय अपराध है और सच्चाई का पता केवल उचित जांच के माध्यम से ही लगाया जा सकता है.
उल्लेखनीय है कि सीजेएम सुधीर द्वारा यह आदेश पारित किए जाने के ठीक एक हफ्ते बाद हाईकोर्ट ने उनका तबादला सुल्तानपुर कर दिया था.
ज्ञात हो कि 24 नवंबर 2024 को कोर्ट के आदेश पर संभल स्थित मुग़लकालीन शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दूसरे दिन हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें 5 लोग मारे गए थे. तब से संभल सुर्खियों में है.
19 नवंबर 2024 को मस्जिद के सर्वे के लिए याचिका दायर की गई, उसी दिन अदालत ने सर्वे की अनुमति भी दे दी और रात के अंधेरे में मस्जिद का पहला सर्वे भी कर लिया गया था. लेकिन 24 नवंबर को सर्वे के दूसरे दिन, सर्वेक्षण का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई. हालांकि पुलिस इस बात से इनकार करती है कि किसी भी शख्स की मौत उनकी गोलियों से हुई थी.
याचिकाकर्ताओं का दावा है कि शाही जामा मस्जिद को मुग़ल काल के दौरान ‘हरिहर मंदिर को तोड़कर बनाया’ गया था. हिंदू पक्ष की मांग है कि उस स्थान पर फिर से मंदिर बनवाया जाए.
उल्लेखनीय है कि हिंसा के बाद तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी को एक ‘सख्त’ और ‘सुपर कॉप’ के रूप में भी पेश किया जाता रहा है. बीते वर्ष होली के दौरान भी वह सुर्खियों में रहे थे, जब होली और जुमे की नमाज़ एक दिन होने पर उन्होंने मुसलमानों को घर के अंदर रहने की सलाह देते हुए कहा था कि जुमा साल में 52 बार आता है और होली एक बार. और अगर किसी को होली से तकलीफ़ है तो वह उस दिन अपने घर पर ही रहे.
