नई दिल्ली: रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने शुक्रवार (27 मार्च, 2026) को ऊर्जा मंत्रालय को 1 अप्रैल से पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है.
सरकारी बयान के मुताबिक, कच्चे तेल के प्रसंस्करण (रिफाइनिंग) का स्तर पिछले वर्ष के बराबर बना हुआ है, जिससे तेल उत्पादों की आपूर्ति स्थिर बनी हुई है.
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी टीएएसएस ने पहले बताया था कि यह प्रतिबंध 31 जुलाई तक लागू रह सकता है.
सामाचार एजेंसी रॉयटर्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, नोवाक ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि विदेशी बाजारों में रूसी ऊर्जा संसाधनों की ऊंची मांग एक सकारात्मक पहलू है.
पिछले साल रूस के कई क्षेत्रों और रूस के नियंत्रण वाले यूक्रेन के हिस्सों में पेट्रोल की कमी की खबरें सामने आई थीं. इसकी वजह यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों में तेजी और मौसमी मांग में बढ़ोतरी को माना गया था.
ईंधन की बढ़ती कीमतों पर काबू पाने और घरेलू कमी से निपटने के लिए रूस समय-समय पर पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाता रहा है.
उद्योग सूत्रों के अनुसार, रूस ने पिछले वर्ष लगभग 50 लाख मीट्रिक टन पेट्रोल का निर्यात किया था, जो करीब 1,17,000 बैरल प्रतिदिन के बराबर है.
