अडानी की रेजोल्यूशन प्लान पर रोक की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची वेदांता, जेपी एसोसिएट्स मामले में बढ़ा विवाद

वेदांता ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की दिवालिया समाधान योजना को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. कंपनी ने प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जबकि एनसीएलएटी पहले ही अंतरिम रोक देने से इनकार कर चुका है. मामले में कानूनी विवाद तेज हो गया है.

अनिल अग्रवाल और गौतम अडानी (दाएं). (फोटो: वेदांता और पीटीआई)

नई दिल्ली: वेदांता लिमिटेड ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की ‘दिवालिया समाधान योजना पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

बार एंड बेंच के मुताबिक, वेदांता ने 24 मार्च को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अडानी की योजना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था. एनसीएलएटी ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि वेदांता द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सभी पक्षों को सुनने के बाद विस्तृत विचार की आवश्यकता है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि योजना का क्रियान्वयन अपील के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा.

इससे पहले रविवार को उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा था कि वेदांता को लिखित रूप में पुष्टि मिली थी कि उसने जेपी ग्रुप की एक संपत्ति के लिए बोली जीत ली है, लेकिन बाद में इस फैसले को बदल दिया गया, और अडानी समूह के पक्ष में कर दिया गया, हालांकि उन्होंने अडानी समूह का नाम नहीं लिया. वेदांता के सीईओ अग्रवाल ने इसके कारणों पर विस्तार से कुछ नहीं कहा और कहा कि वे ‘विवरण में नहीं जाना चाहते.’

कर्ज में डूबी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स को 3 जून 2024 को आईसीआईसीआई बैंक की याचिका पर राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) की इलाहाबाद पीठ ने दिवालिया प्रक्रिया में शामिल किया था. कंपनी के खिलाफ कुल स्वीकृत दावे 57,000 करोड़ रुपये से अधिक थे.

नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) 85 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा वित्तीय लेनदार बनकर उभरा. लेनदारों की समिति ( सीओसी) में कुल 27 सदस्य शामिल थे, जिनमें बैंक, वित्तीय संस्थान और घर खरीदारों का एक वर्ग भी था. समाधान प्रक्रिया के तहत 28 अभिरुचि अभिव्यक्तियां (ईओआई) प्राप्त हुईं, जिनमें से 25 आवेदकों को शॉर्टलिस्ट किया गया.

बार एंड बेंच के मुताबिक, अंततः छह कंपनियों, अडानी एंटरप्राइजेज, वेदांता, डालमिया सीमेंट (भारत), जिंदल पावर, पीएनसी इंफ्राटेक और जेपी इंफ्राटेक, ने समाधान योजनाएं प्रस्तुत कीं. अडानी एंटरप्राइजेज और वेदांता प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आए. स्वतंत्र मूल्यांकन में अग्रिम भुगतान और कुल वित्तीय मूल्य के आधार पर अडानी की योजना बेहतर पाई गई. नवंबर 2025 में हुई सीओसी की 23वीं बैठक में अडानी की योजना को 93.81 प्रतिशत वोट के साथ मंजूरी दे दी गई. इसके बाद 17 मार्च को एनसीएलटी ने इस योजना को स्वीकृति दे दी.

वेदांता ने अपनी संशोधित बोली को खारिज किए जाने को चुनौती देते हुए कहा कि दिवालिया प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और इससे लेनदारों के लिए अधिकतम मूल्य हासिल नहीं हो सका. चुनौती प्रक्रिया समाप्त होने के बाद वेदांता ने 8 नवंबर 2025 को अपनी योजना में एक परिशिष्ट (एडेंडम) भी जमा किया, जिसे सीओसी ने यह कहते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि बोली प्रक्रिया के बाद वित्तीय प्रस्तावों में बदलाव की अनुमति नहीं है.

लेनदारों की समिति ने वेदांता की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह एडेंडम तब दिया गया, जब वेदांता को पता चल गया था कि उसका अग्रिम भुगतान सफल बोलीदाता से कम है. समिति ने कहा कि प्रक्रिया समाप्त होने के बाद ऐसे संशोधन की अनुमति देना बोली प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को कमजोर करेगा.

अनिल अग्रवाल ने अपने एक्स पोस्ट में 5 सितंबर 2025 की एक खबर साझा की, जिसमें वेदांता द्वारा 17,000 करोड़ रुपये की बोली जीतने का जिक्र था. इस रिपोर्ट के अनुसार, बोली प्रक्रिया में कई कंपनियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन वेदांता और अडानी समूह ही अंतिम रूप से ठोस बोली देने वाली दो कंपनियां थीं. अन्य प्रतिभागियों में डालमिया भारत, जिंदल पावर और पीएनसी इंफ्राटेक शामिल थे.

अग्रवाल ने जेपी समूह के संस्थापक जयप्रकाश गौर के साथ अपनी मुलाकातों को याद करते हुए लिखा कि गौर चाहते थे कि उनके द्वारा खड़ी की गई संपत्तियां ‘सुरक्षित हाथों’ में जाएं. उन्होंने कहा, ‘कुछ साल पहले जयप्रकाश गौर मुझसे लंदन में मिले थे. उन्होंने जीवन भर की मेहनत और दूरदृष्टि से एक साम्राज्य खड़ा किया था. उन्होंने कई बार मुझसे संपर्क किया. उन्होंने मुझे हिंदी में पत्र लिखे और मुझ पर भरोसा जताया कि उनकी संपत्तियां सही हाथों में जाएं. उस समय हम आगे नहीं बढ़ पाए.’

अग्रवाल ने आगे कहा कि सार्वजनिक नीलामी के दौरान उन्हें गौर की बात याद आई और अंततः वे सबसे ऊंची बोली लगाने वाले घोषित हुए. उन्होंने कहा, ‘यह एक पारदर्शी प्रक्रिया थी. हमें लिखित रूप से बताया गया कि हम जीत गए हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद फैसला बदल दिया गया.’

पीटीआई के अनुसार, लेनदारों की समिति ने सभी प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के बाद अडानी की बोली को मंजूरी के लिए एनसीएलटी के पास भेजा था, जिसे इलाहाबाद पीठ ने स्वीकार कर लिया. इसके खिलाफ वेदांता ने एनसीएलएटी में चुनौती दी है. 

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुई सुनवाई में एनसीएलएटी ने अडानी की बोली को मंजूरी देने वाले एनसीएलटी के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.