नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमलों का सिलसिला 34वें दिन में प्रवेश कर चुका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी सेना ‘जल्द ही अपना काम पूरा कर देगी’ और आने वाले दो से तीन हफ्तों में हमले और तेज़ किए जाएंगे. अपने पहले राष्ट्रीय संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी रणनीतिक लक्ष्य ‘लगभग हासिल’ हो चुके हैं.
करीब 20 मिनट के इस संबोधन में ट्रंप ने कहा, ‘हम उन्हें बेहद कड़ी चोट पहुंचाने जा रहे हैं… हम उन्हें वापस पाषाण युग में पहुंचा देंगे, जो उनकी जगह है.’ हालांकि, अपने भाषण में उन्होंने कोई ठोस नई रणनीति या योजना सार्वजनिक नहीं की और पिछले बयानों को ही दोहराया.
ईरान ने ट्रंप के दावे को किया खारिज
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान ने युद्धविराम की मांग की है. बीबीसी के मुताबिक, ईरान ने इस बयान को ‘झूठा और बेबुनियाद’ बताया है.
ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार, यह प्रतिक्रिया विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने दी.
यह बयान उस समय आया, जब ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था, ‘ईरान के नए राष्ट्रपति, जो अपने पूर्व नेताओं की तुलना में कम कट्टरपंथी और ज्यादा समझदार हैं, उन्होंने अभी अमेरिका से युद्धविराम की मांग की है. हम इस पर तब विचार करेंगे, जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ खुला, सुरक्षित और पूरी तरह चालू होगा. तब तक हम ईरान पर जोरदार हमले जारी रखेंगे और उसे पूरी तरह तबाह कर देंगे, या जैसा कि कहा जाता है, उन्हें वापस पाषाण युग में पहुंचा देंगे.’
ध्यान रहे, तेहरान लगातार कहता रहा है कि युद्ध खत्म करने को लेकर फिलहाल कोई बातचीत नहीं चल रही है. ईरान के राष्ट्रपति पहले कह चुके हैं कि ईरान भी युद्धविराम की ‘इच्छा’ रखता है, लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि विरोधी देश यह गारंटी दें कि संघर्ष दोबारा शुरू नहीं होगा.
फिर जताई ईरान के ‘तेल पर कब्ज़े’ की इच्छा
संबोधन से कुछ घंटे पहले व्हाइट हाउस में ईस्टर लंच के दौरान ट्रंप ने ईरान के तेल को लेकर विवादित टिप्पणी की. उन्होंने वहां मौजूद लोगों से ईरान के बारे में कहा, ‘हम चाहें तो उनका तेल अपने कब्जे में ले सकते हैं. लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमारे देश के लोगों में इतना धैर्य है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘लोग चाहते हैं कि यह खत्म हो जाए. अगर हम वहां रहते, तो मैं तो उनका तेल ले लेना पसंद करता. हम यह बहुत आसानी से कर सकते हैं. मैं यही करना पसंद करता. लेकिन देश के लोग कहते हैं कि बस जीत हासिल करो और वापस आ जाओ. और यह भी ठीक है, क्योंकि हमारे पास वेनेजुएला और अपने देश में काफी तेल है.’
ईरान के तेल पर कब्जे की इच्छा ट्रंप पहले भी व्यक्त कर चुके हैं. दो दिन पहले ब्रिटिश अखबार ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ के साथ एक साक्षात्कार में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के तेल पर कब्जा करना चाहते हैं. साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो, मेरी पसंदीदा चीज ईरान के तेल पर कब्जा करना है. लेकिन अमेरिका में कुछ मूर्ख लोग कहते हैं, आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? लेकिन वे मूर्ख लोग हैं.’
यह युद्ध एक निवेश है- ट्रंप
ट्रंप ने अमेरिकियों से इस युद्ध को अपने भविष्य में किए गए एक ‘निवेश’ के रूप में देखने की अपील की. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक सदी में अमेरिका जिन युद्धों में शामिल रहा है, उनकी तुलना में यह संघर्ष कुछ भी नहीं है, क्योंकि वे युद्ध कहीं ज्यादा लंबे चले थे.
अपने संबोधन में ट्रंप ने पिछले युद्धों – पहला विश्व युद्ध, दूसरा विश्व युद्ध, कोरिया, वियतनाम और इराक – का हवाला देते हुए कहा कि ‘सिर्फ चार हफ्तों में अमेरिकी सेना ने निर्णायक जीत हासिल की है,’ हालांकि जमीनी हालात यह है कि ईरान द्वारा इज़रायल और खाड़ी क्षेत्र के अन्य देशों पर हमले जारी हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर संकट, 30 से अधिक देशों की बैठक
इस बीच, वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी चिंता फारस की खाड़ी से जुड़े स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर है, जहां संघर्ष के चलते लगभग पूरी समुद्री आवाजाही ठप हो गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया में तेल आपूर्ति के सबसे अहम मार्गों में से एक माना जाता है.
ब्रिटेन की पहल पर 30 से अधिक देशों की एक आपात बैठक बुलाई गई है, जिसमें इस समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के उपायों पर चर्चा होगी.
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि बैठक में ‘जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बहाल करने’ के विकल्पों पर विचार किया जाएगा.
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में रुकावट और बढ़ते सैन्य टकराव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है. तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति में बाधा ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है.
विरोधाभास और अनिश्चितता
ट्रंप के दावों और जमीनी स्थिति के बीच विरोधाभास भी सामने आ रहा है. एक ओर वे ईरान को ‘अब खतरा नहीं’ बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में हमले जारी हैं और तनाव कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है. इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन की ओर से स्पष्ट रणनीति सामने न आने और अलग-अलग मौकों पर भिन्न संकेत देने से भी स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
एक अलग इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जल्द ही ईरान में अपनी सैन्य कार्रवाई खत्म करने की उम्मीद कर रहा है, लेकिन उन्होंने कोई तय समयसीमा नहीं बताई. उन्होंने कहा, ‘मैं आपको ठीक-ठीक नहीं बता सकता… हम बहुत जल्द बाहर आ जाएंगे.’ साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका भविष्य में सीमित हमले कर सकता है.
