रिलायंस की सेज़ रिफाइनरी पर नहीं लागू होंगे डीज़ल और एविएशन टरबाइन फ्यूल पर लगे निर्यात शुल्क

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच सरकार ने विंडफॉल निर्यात कर फिर से लागू किया है. जुलाई 2022 में रूस यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार लगाया गया यह कर दिसंबर 2024 में हटा लिया गया था. अब इसे विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के रूप में लाया गया है, ताकि रिफाइनरियां घरेलू बाज़ार में बिक्री को प्राथमिकता दें. हालांकि विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की जामनगर रिफाइनरी पर यह शुल्क लागू नहीं होंगे.

(फोटो साभार: ril.com)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने गुरुवार (2 अप्रैल) को यह स्पष्ट किया है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड-सेज़) में स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी पर पिछले सप्ताह डीज़ल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लगाए गए शुल्क लागू नहीं होंगे. 

ज्ञात हो कि सरकार ने 26 मार्च से डीज़ल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर 29.50 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क फिर से लागू किया है, जबकि पेट्रोल के निर्यात को इससे बाहर रखा गया है. यह फैसला पेट्रोल और डीज़ल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती के साथ लिया गया है, ताकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके.

टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच सरकार ने विंडफॉल निर्यात कर को फिर से लागू किया है. यह कर पहली बार जुलाई 2022 में, रूस यूक्रेन युद्ध के बाद लगाया गया था और दिसंबर 2024 में हटा लिया गया था.

अब इसे विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) के रूप में दोबारा लागू किया गया है, ताकि रिफाइनरियां निर्यात के बजाय घरेलू बाजार में बिक्री को प्राथमिकता दें.

राजस्व विभाग की टैक्स रिसर्च यूनिट (टीआरयू-1) में संयुक्त सचिव जैनेंद्र सिंह कंधारी ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘इस मुद्दे पर न्यायिक फैसलों के अनुसार, विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और अतिरिक्त उत्पाद शुल्क एसईजेड रिफाइनरियों पर लागू नहीं होते हैं.’

रिलायंस गुजरात के जामनगर में दो रिफाइनरियां संचालित करती है, एक 33 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता की, जो घरेलू बाजार के लिए है, और दूसरी 35.2 एमटीपीए क्षमता की, जो केवल निर्यात के लिए एसईजेड में स्थित है.

सरकार ने पहले कहा था कि निर्यात कर की समीक्षा हर पंद्रह दिन में की जाएगी, ताकि इसे मौजूदा दरों के अनुरूप रखा जा सके. रिपोर्ट के अनुसार, इससे सरकारी खजाने पर दो हफ्तों में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का असर पड़ने का अनुमान है.

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, सिटी रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह निर्यात कर डीज़ल पर लगभग 36 डॉलर प्रति बैरल और एटीएफ पर 50 डॉलर प्रति बैरल के बराबर है.

रिपोर्ट में कहा गया  है, ‘वित्त वर्ष 2025 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के कुल डीज़ल उत्पादन का 75% और जेट फ्यूल उत्पादन का 35% उसकी एसईजेड रिफाइनरी से आया था, जिसे 2022 के उदाहरण के आधार पर इस कर से छूट मिल सकती है.’

पिछले सप्ताह जारी रिपोर्ट में कहा गया, ‘यदि हम यह मान लें कि निर्यात कर केवल गैर एसईजेड उत्पादन पर लागू होगा, तो इसका प्रभाव काफी हद तक संतुलित हो जाएगा.. क्योंकि डीज़ल और जेट फ्यूल के मार्जिन (क्रैक्स) अभी भी संघर्ष-पूर्व स्तरों की तुलना में ऊंचे हैं.’ 

सरकार ने 26 मार्च को अप्रैल 2022 के बाद पहली बार घरेलू पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में उल्लेखनीय कटौती की घोषणा की. इसका उद्देश्य तेल विपणन कंपनियों को राहत देना था, जो कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीज़ल के खुदरा दाम नहीं बढ़ा पाने के कारण भारी नुकसान उठा रही थीं.