नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में लाया गया प्रस्ताव सोमवार (6 अप्रैल) को खारिज कर दिया गया. इस प्रस्ताव पर 193 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति व उपराष्ट्रपति सीपी. राधाकृष्णन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. हालांकि, प्रस्ताव खारिज करने के पीछे कोई कारण नहीं बताया गया.
राज्यसभा में यह नोटिस 12 मार्च को 63 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ पेश किया गया था, और उसी दिन लोकसभा में 130 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित एक अलग नोटिस भी पेश किया गया.
सोमवार शाम दोनों सदनों ने लगभग समान बुलेटिन जारी कर इन नोटिसों को खारिज किए जाने की जानकारी दी.
राज्यसभा के बुलेटिन में कहा गया, ‘नोटिस पर विधिवत विचार और सभी संबंधित पहलुओं का सावधानीपूर्वक एवं निष्पक्ष आकलन करने के बाद, राज्यसभा के सभापति ने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.’
लोकसभा के बुलेटिन में भी लगभग यही शब्द दोहराए गए और कहा गया कि अध्यक्ष ने संबंधित प्रावधानों के तहत इस नोटिस को स्वीकार नहीं किया.
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल उसी प्रक्रिया और आधार पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है.
न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत, यदि लोकसभा में महाभियोग का नोटिस दिया जाता है, तब उस पर कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए, जबकि राज्यसभा में यह संख्या कम से कम 50 होनी चाहिए. इसके बाद अध्यक्ष या सभापति तय करते हैं कि प्रस्ताव को स्वीकार किया जाए या नहीं.
विपक्ष की प्रतिक्रिया
नोटिस खारिज होने के बाद विपक्षी सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी पर संसद का मजाक उड़ाने का आरोप लगाया.
तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने कहा कि विस्तृत नोटिस देने के बावजूद इसे बिना कारण बताए खारिज कर दिया गया.
उन्होंने कहा, ‘सीईसी के कथित दुराचार के संबंध में सटीक नियमों और तथ्यात्मक उदाहरणों के साथ एक विस्तृत नोटिस प्रस्तुत दिया गया था. इसके जवाब में महाभियोग नोटिस को बहुत संक्षिप्त तरीके से खारिज कर दिया गया. खारिज करने का कोई कारण नहीं बताया गया. हमें इसमें आश्चर्य क्यों नहीं हो रहा?’
The first of its kind impeachment notice signed by 193 MPs for the removal of the CEC Vanish Kumar rejected by both Rajya Sabha Chairman and Lok Sabha Speaker. A detailed notice giving exact rules and factual examples of the CEC’s misconduct was submitted. In response, the… https://t.co/tjmq1C0OXU
— Sagarika Ghose (@sagarikaghose) April 6, 2026
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने एक्स पर लिखा, ‘राज्यसभा सांसदों द्वारा सीईसी को हटाने का नोटिस खारिज. कारण? कोई कारण नहीं दिया गया. भाजपा हमारी संसद का मजाक उड़ा रही है. शर्मनाक.’
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने अपने बयान में पूर्व सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का जिक्र करते हुए कहा, ‘हमें पता है कि पिछली बार राज्यसभा के सभापति के साथ क्या हुआ था, जब उन्होंने विपक्षी सांसदों द्वारा लाए गए प्रस्ताव को स्वीकार किया था.’
पृष्ठभूमि
पिछले महीने द वायर ने एक रिपोर्ट में बताया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का यह अभूतपूर्व कदम चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया था.
पिछले साल अगस्त में ज्ञानेश कुमार ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें ‘जनता को गुमराह करने’ और ‘संविधान का अपमान’ बताया था. इसके बाद भी विपक्षी दल महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे थे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
