महाराष्ट्र: हाईकोर्ट ने पेंशन में देरी पर सरकार को फटकारा, लाड़की बहिन योजना के ख़र्च पर उठाए सवाल

बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिटायर सरकारी कर्मचारियों को पेंशन भुगतान न करने पर महाराष्ट्र को फटकार लगाते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार को पैसों की तंगी का सामना करना पड़ रहा है, तो उसे 'लाड़की बहिन योजना' बंद करने और पेंशन देने को प्राथमिकता देने पर विचार करना चाहिए. अदालत ने कहा कि यदि राज्य वास्तव में आर्थिक तंगी से गुज़र रहा है, तो उसे बकाया भुगतान के लिए कार्यालय की संपत्तियां और गाड़ी बेच देने चाहिए.

महाराष्ट्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस. (फोटो साभार: X/@CMOMaharashtra)

नई दिल्ली: बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिटायर सरकारी कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान न करने पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की पीठ ने कहा कि अगर राज्य सरकार को पैसों की तंगी का सामना करना पड़ रहा है, तो उसे ‘लाड़की बहिन योजना’ को बंद करने और पेंशन देने को प्राथमिकता देने पर विचार करना चाहिए.

ज्ञात हो कि यह योजना, जिसे 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से पहले पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुरू किया था, पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये देती है. बताया जाता है कि राज्य सरकार इस योजना पर हर साल करीब 40,000 करोड़ रुपये खर्च करती है.

यह मामला अदालत में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के शिक्षा विभाग की एक कर्मचारी की याचिका के ज़रिए आया, जिसने सातवें वेतन आयोग के मुताबिक अपने प्रॉविडेंट फंड (पीएफ) और पेंशन के भुगतान की मांग की थी. बीएमसी ने पैसों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि देरी राज्य सरकार से पर्याप्त फंड न मिलने की वजह से हुई है.

अदालत ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई कि उसने निगम को समय पर धन जारी नहीं किया, जिससे कर्मचारियों पर असर पड़ा. अदालत ने जोर दिया कि सरकार को पेंशन, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए.

अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार वित्तीय संकट का सामना कर रही है, तो वह ‘लाड़की बहिन योजना’ पर भारी खर्च क्यों जारी रखे हुए है. अदालत ने सुझाव दिया कि कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए इस योजना को रोका जाए.

कड़ी टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा कि यदि राज्य वास्तव में आर्थिक तंगी से गुजर रहा है, तो उसे याचिकाकर्ता के बकाया भुगतान के लिए कार्यालय की संपत्तियां जैसे टेबल, एयर कंडीशनर, कुर्सियां और फर्नीचर तक बेच देने चाहिए. यहां तक कि जरूरत पड़े तो बीएमसी आयुक्त की आधिकारिक गाड़ी बेचने का भी सुझाव दिया गया, ताकि महिला को उसका हक मिल सके.

अदालत ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तक एक हलफ़नामा दायर करें, जिसमें वे बकाया भुगतान करने का वादा करें.

अखबार के अनुसार, इस बीच, राज्य सरकार ने लाड़की बहिन योजना के तहत पात्रता मानदंड सख्त करने शुरू कर दिए हैं, जिससे लाभार्थियों की संख्या कम हो गई है. 2023 में योजना शुरू होने पर 2.43 लाख लाभार्थी थे, जो अब घटकर 1.72 लाख रह गए हैं, जिससे कई लोग योजना के लाभ से वंचित हो गए हैं.

हालांकि, हाल के वर्षों में इस योजना के तहत कई अनियमिताएं सामने आई हैं, जिनमें अपात्र लाभार्थियों का नाम शामिल होना और यहां तक कि कुछ पुरुषों द्वारा महिलाओं के नाम पर लाभ उठाना भी पाया गया.