दिल्ली: तरुण हत्या के बाद तनावग्रस्त उत्तम नगर में हुए उग्र भाषण, विहिप ने 1,700 त्रिशूल बांटे

ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली के उत्तम नगर में विश्व हिंदू परिषद ने ‘त्रिशूल दीक्षा’ कार्यक्रम के तहत 1,700 त्रिशूल बांटे. संगठन ने कहा है कि उसकी योजना पूरे शहर में 30,000 से अधिक त्रिशूल वितरित करने की है. तरुण हत्याकांड के बाद तनावग्रस्त हुए इस इलाके में आयोजन के दौरान उग्र भाषणों के साथ नाबालिगों को भी त्रिशूल दिए गए.

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'त्रिशूल दीक्षा' कार्यक्रम के दौरान शपथ लेते विश्व हिंदू परिषद के नेता और तरुण कुमार के परिजन. (सभी फोटो: अंकित राज/द वायर हिंदी)

नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर के हस्तसाल स्थित अयप्पा पार्क में रविवार (12 अप्रैल 2026) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अनुषंगिक संगठन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने युवाओं के बीच बड़े पैमाने पर त्रिशूलों का वितरण किया.

विहिप ने अपने युवा संगठन बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के बीच 1,700 त्रिशूल बांटे. संगठन इसे ‘त्रिशूल दीक्षा’ कहता आया है. उनके मुताबिक, यह कार्यक्रम ‘संस्कार, सेवा और सुरक्षा’ का संकल्प दिलाने के लिए होता है, लेकिन जमीन पर इसके मायने कहीं अधिक जटिल दिखाई देते हैं.

द वायर हिंदी से बातचीत में विहिप (इंद्रप्रस्थ) के प्रचार-प्रसार प्रमुख संजीव कुमार ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम पूरी दिल्ली में आयोजित किए जाने की योजना है, जिनके तहत 30,000 से अधिक त्रिशूल वितरित किए जाने की संभावना है.

ध्यान रहे ‘त्रिशूल दीक्षा’ का यह कार्यक्रम एक ऐसे समय में हुआ, जब एक स्थानीय आपराधिक घटना पहले ही सांप्रदायिक तनाव में बदल चुकी है. अयप्पा पार्क उस जगह से कुछ ही दूरी पर है, जहां होली (4 मार्च) के दिन 26 वर्षीय तरुण कुमार की हत्या हुई थी.

एक मामूली विवाद से शुरू हुई इस घटना ने जल्द ही सांप्रदायिक तनाव का रूप ले लिया. हत्या का आरोप एक मुस्लिम परिवार पर लगा है, जिनके यहां पहले अज्ञात लोगों ने घुसकर तोड़फोड़ की थी, फिर नगर निगम की बुलडोज़र कार्रवाई हुई, और अब आरोपी परिवार इलाके से पलायन कर गया है.

तरुण हत्या मामले में आरोपी परिवार का घर. गली के बाहर तैनात एक महिला पुलिसकर्मी ने बताया कि घटना के बाद से पूरे इलाके में 24 घंटे पुलिस की तैनाती रहती है.

घटनास्थल और उसके आस-पास के इलाकों में अब भी भारी पुलिस बल मौजूद है. गली-गली में बैरिकेड्स लगे हैं. इसके बावजूद कुछ ही दूरी पर विहिप ने त्रिशूल वितरण किया, उग्र भाषण हुए और भावनात्मक लामबंदी का प्रयास किया गया.

जब द वायर हिंदी ने विहिप के प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना से कार्यक्रम स्थल के चुनाव को लेकर सवाल किया तो उनका कहना था कि ‘उत्तम नगर को इसलिए चुना गया क्योंकि इस जिले का नंबर आया है, और कोई कारण नहीं है.’

हालांकि, विहिप के मंच पर मृतक तरुण कुमार के माता-पिता और दादा भी मौजूद थे. पिता मेमराज और दादा मान सिंह ने भी त्रिशूल दीक्षा ली, यानी उन्हें भी विहिप की ओर से त्रिशूल प्रदान किया गया. मान सिंह ने विहिप के मंच से भाषण भी दिया.

विहिप के मंच से भाषण देते तरुण कुमार के दादा.

द वायर हिंदी से बातचीत में दोनों ने कहा कि उन्हें बजरंग दल का पूरा सहयोग मिल रहा है. उन्होंने न्याय की मांग करते हुए दोषियों को फांसी देने की बात कही और यह भी कहा कि यदि संभव हो तो उनका ‘एनकाउंटर’ किया जाए.

विहिप ने कार्यक्रम की प्रेस विज्ञप्ति में तरुण कुमार को ‘जिहादी हमले में बलिदान’ होने वाला बताया है.

त्रिशूल लेने वालों में नाबालिग भी

‘त्रिशूल दीक्षा’ कार्यक्रम में शामिल हुए नाबालिग.

त्रिशूल लेने वालों में कई नाबालिग भी शामिल थे. कक्षा पांच में पढ़ने वाले करीब दस साल के ऋषभ अपने 11 वर्षीय भाई के साथ कार्यक्रम में पहुंचे थे और दोनों के कंधों पर त्रिशूल टंगे हुए थे. दोनों बच्चों ने बताया कि वे दिल्ली के इंद्रप्रस्थ इलाके के रहने वाले हैं. इसी तरह उत्तम नगर के 12 वर्षीय पंकज ने भी त्रिशूल लिया.

जब इस बारे में द वायर हिंदी ने विहिप के प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना से सवाल किया, तो उन्होंने कहा, ‘त्रिशूल की दीक्षा संविधान सम्मत होती है. त्रिशूल केवल एक प्रतीक है, जो सेवा, संस्कार और सुरक्षा को दर्शाता है.’

हालांकि, कार्यक्रम के अंत में दिलाई गई शपथ में ‘भारत हिंदू राष्ट्र है’ जैसे वाक्य शामिल थे, जो भारतीय संविधान की मूल भावना से टकराते हैं. दिलचस्प यह भी है कि इसी शपथ में ‘संविधान की रक्षा’ की बात भी दोहराई गई.

खन्ना ने ‘त्रिशूल दीक्षा’ की तुलना स्कूल एडमिशन से की. उनके मुताबिक, यह बजरंग दल में शामिल होने की पहली सीढ़ी है, जहां युवाओं को राष्ट्र और धर्म की रक्षा का संकल्प दिलाया जाता है.

इस त्रिशूल को ख़ासतौर पर निर्मित किया गया है ताकि शस्त्र अधिनियम के दायरे में न आए. जून 2017 में अहमदाबाद मिरर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, विहिप के तत्कालीन महासचिव महादेव देसाई ने खुद यह बताया था कि ‘त्रिशूल को प्रतिबंधित हथियारों से एक सेंटीमीटर छोटा रखा गया है.’

उग्र भाषण और परोक्ष निशाने

विहिप के दिल्ली प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने तरुण को याद करते हुए मंच से उग्र लहजे में कहा, ‘भीड़ बनाकर गीदड़ों का झुंड शेरों के बच्चों को मारता है. मैं इस मंच से कहना चाहता हूं कि जो नौजवान चला गया, किसी की मां ने दूध नहीं पिलाया कि कोई अकेले और निहत्थे आकर उससे लड़ ले.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हिंदू का स्वभाव शांति का है. वह पेड़ों, पर्वतों और नदियों की पूजा करता है, यहां तक कि चींटियों को भी आटा खिलाता है. लेकिन तुम उसी हिंदू को डराना चाहते हो… वह हिंदू डरेगा नहीं. अब हिंदू इस त्रिशूल को, जो आज यहां वितरित किया गया है, संकल्प के साथ हाथ में लेकर खड़ा होगा.’

विहिप के दिल्ली प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कहा, ‘सुरक्षा भीख में नहीं मिलती, सुरक्षा शक्ति और संगठन से प्राप्त होती है.’

कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए भाषणों में तीखा और आक्रामक स्वर साफ तौर पर सुनाई दिया, जिसमें कई बार परोक्ष रूप से मुसलमानों को निशाना बनाया गया.

गुप्ता ने उत्तम नगर के ‘हिंदू समाज’ को बधाई देते हुए कहा कि ‘जब समाज जागता है तो हालात बदलते हैं.’

उन्होंने एक पुराने राजनीतिक बयान का संदर्भ देते हुए कहा, ‘जो लोग हैदराबाद में खड़े होकर 15 मिनट के लिए पुलिस हटाने की धमकी देते थे, आज वही सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं, और कह रहे हैं कि हमें अपना त्योहार मनाना है 15 मिनट के लिए पुलिस लगा दो. यह हिंदू समाज की शक्ति है.’

उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि ‘सालों पहले उनके पूर्वज यहां आए थे, तब यह क्षेत्र सुरक्षित था, अब असुरक्षित हो गया,’ और दिल्ली के त्रिनगर का एक उदाहरण सुनाते हुए यह दावा किया कि कैसे ‘कुछ घर मुसलमानों को बेचने के बाद’ इलाके का माहौल बदल गया और हिंदुओं को पलायन का डर सताने लगा. इस कथित कहानी के जरिए उन्होंने ‘पलायन न करने’ और ‘संघर्ष करने’ का संदेश दिया.

इसी क्रम में प्रांत अध्यक्ष कपिल खन्ना ने मंच से तरुण कुमार को ‘बलिदानी’ बताते हुए श्रद्धांजलि दी. उन्होंने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘मेरे बजरंगियों का संदेश है- मान जाओ, वरना सुधार दूंगा.’

खन्ना ने निर्देशक आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ का जिक्र करते हुए एक संवाद उद्धृत किया- ‘छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं.’

उन्होंने कहा कि इंद्रप्रस्थ (जिस नाम से विहिप दिल्ली को संबोधित करता है) के बजरंगी ‘विधर्मियों’ को यही संदेश दे रहे हैं- ‘छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं.’

बाएं से तरुण के पिता, माता, बजरंग दल प्रांत बजरंग दल संयोजक जगजीत (गोल्डी) और मान सिंह.

इसी तरह प्रांत बजरंग दल संयोजक जगजीत (गोल्डी) ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह ‘एक दिन का संकल्प नहीं है,’ बल्कि जहां-जहां ‘राष्ट्रविरोधी और धर्मविरोधी ताकतें चुनौती देंगी,’ वहां उनसे निपटने और जीत हासिल करने का संकल्प है.

उन्होंने आगे कहा कि यही संकल्प ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’ और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर ‘विजय प्राप्त करने की शक्ति’ देता है.

विहिप के केंद्रीय सह मंत्री मनोज वर्मा ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को ‘सैनिक’ बताते हुए संबोधित किया. उन्होंने रामजन्मभूमि आंदोलन में विहिप और बजरंग दल की ‘महत्वपूर्ण भूमिका’ का जिक्र करते हुए कहा, ‘हमने तब सौगंध खाई थी कि मंदिर वहीं बनाएंगे. आज रामलला वहीं हैं, जहां वह पहले थे और हमेशा-हमेशा रहेंगे.’

वर्मा ने आगे कहा, ‘आज कुछ लोग नई बाबरी बनाने की बात कर रहे हैं. ऐसे लोगों को औकात समझ में आनी चाहिए. जो थी, वो तो नहीं रही. बनाने की कोशिश करोगे तो तुम भी भारत की धरा पर नहीं रहोगे. केवल एक ही नारा रहेगा- जय श्रीराम. इस देश की धरती पर रहना है तो इस राष्ट्र की भावना के साथ चलना होगा.’

बजरंग दल के युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘इस देश में राम के सिद्धांतों को स्थापित करने का काम बजरंग दल का है.’ उन्होंने जोड़ा कि वे ‘राम को आदर्श’ मानते हैं और उनके सिद्धांतों पर चलते हैं- ‘हम रास्ता पाने के लिए समुद्र के सामने हाथ जोड़ना भी जानते हैं और रास्ता न मिलने पर धनुष पर बाण चढ़ाकर आगे बढ़ना भी जानते हैं.’

अपने संबोधन में वर्मा ने महाभारत और श्रीकृष्ण का उल्लेख करते हुए कहा, ‘हमें महाभारत को समझना होगा, कृष्ण के संदेश को समझना होगा. धर्म की स्थापना के लिए जो आवश्यक है, वह करना ही पड़ेगा. हम राम और कृष्ण के वंशज हैं- इसलिए जो करना है, उसके लिए तैयार रहना होगा.’

पुलिस की मौजूदगी और ‘नियंत्रित आक्रामकता’

कार्यक्रम के मंच पर लगे बड़े बैनर पर लिखा था, ‘हम बुद्ध को भी मानते हैं और युद्ध को भी मानते हैं’ – एक तरफ गौतम बुद्ध की तस्वीर और दूसरी ओर सुदर्शन चक्र. यह प्रतीकात्मक संयोजन पूरे कार्यक्रम की दिशा और संदेश को लगभग स्पष्ट कर देता है.

पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस की भारी तैनाती रही. इलाके को बैरिकेड कर रूट डायवर्ट किया गया था. एक दंगा नियंत्रण वाहन गेट के ठीक सामने खड़ा था. मौके पर मौजूद एसीपी संजीव कुमार ने बताया कि करीब 100 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल के कुछ जवान भी आए हैं.

कार्यक्रम समाप्त होने के उपरांत संवाददाता ने विहिप के पश्चिमी विभाग सह मंत्री सुमन झा को यह कहते सुना कि त्रिशूल वितरण केवल इसी आयोजन तक सीमित नहीं रहेगा. उत्तम नगर के एक व्यक्ति, जो देर से पहुंचे और उन्हें त्रिशूल नहीं मिल पाया, उन्हें आश्वस्त किया गया कि चिंता की बात नहीं है, आने वाले दिनों में अलग-अलग जगहों पर आयोजित किए जाने वाले हनुमान चालीसा पाठ के दौरान भी त्रिशूल वितरित किए जाएंगे.

त्रिशूल दीक्षा कार्यक्रम के दौरान शपथ लेते सुमन झा (नीले घेरे में).

झा ने पुलिस की मौजूदगी की ओर इशारा करते हुए यह भी कहा कि यहां इतनी बड़ी संख्या में त्रिशूल बांटना संभव नहीं था, इसलिए वितरण को अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए जारी रखा जाएगा.

भाषण के बाद क्या हुआ?

भाषणों के बाद कार्यक्रम में सामूहिक रूप से त्रिशूल के साथ शपथ दिलाई गई. उपस्थित लोगों ने अपने-अपने हाथों में त्रिशूल उठाकर मंच से दिलाई गई शपथ को दोहराया.

शपथ में प्रतिभागियों ने हनुमान और अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए हिंदू धर्म, संस्कृति और समाज की रक्षा का वचन लिया. साथ ही संविधान और मातृभूमि की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई. शपथ में यह भी कहा गया कि वे ‘भारत को हिंदू राष्ट्र’ मानते हुए अंतिम सांस तक उसकी रक्षा करेंगे और अपने जीवन का उद्देश्य ‘भारत माता’ की सुरक्षा, सम्मान और पुनर्निर्माण के लिए समर्पित रखेंगे.

इसके साथ ही प्रतिभागियों ने बजरंग दल के घटक के रूप में देश और धर्म के प्रति निष्ठावान रहने और निस्वार्थ सेवा करने का संकल्प भी लिया.

कार्यक्रम का समापन सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ, जिसका वीडियो शेयर करते हुए विहिप ने सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘चंद दिनों पहले ही उसी उत्तमनगर में उसी अयप्पा पार्क में ‘हनुमान चालीसा’ से साम्प्रदायिक सौहार्द बिगड़ने के खतरे बताए जा रहे थे! आज जब बजरंगियों ने हनुमान चालीसा से वातावरण को गुंजायमान किया तो सभी आत्मविभोर नजर आए!’

कार्यक्रम खत्म होने के बाद लौटते कार्यकर्ता.

शस्त्र वितरण का सिलसिला

उल्लेखनीय है कि दिल्ली में त्रिशूल वितरण कोई नई बात नहीं है. दिसंबर 2024 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विहिप ने लंबे अंतराल के बाद इस अभियान को फिर शुरू किया था. तब संगठन ने 200 से अधिक कार्यक्रमों के जरिए 50,000 त्रिशूल बांटने का लक्ष्य रखा था.

जनवरी 2025 में ‘शस्त्र दीक्षा समारोह’ के तहत विहिप के महिला संगठन ‘दुर्गा वाहिनी’ ने 20,000 लड़कियों को कटार बांटी थीं. इससे पहले 2012 या 2015 के बाद यह गतिविधि लगभग ठप थी, जिसे अब फिर से बड़े पैमाने पर सक्रिय किया गया है.