महिला आरक्षण की आड़ में लोकसभा सीटें बढ़ाने की तैयारी, 2011 जनगणना के आधार पर सीटों का नया बंटवारा

केंद्र सरकार ने हाल के हफ्तों में इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों से संपर्क भी किया है, ताकि आरक्षण को जल्द लागू किया जा सके. हालांकि, प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा के लिए विपक्ष ने विधानसभा चुनावों के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, जिसे स्वीकार नहीं किया गया.

हैदराबाद: मार्च 2026 में महिला आरक्षण विधेयक को जल्द लागू करने की मांग को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संविधान के 131वें संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन कर लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है.

विधेयक में 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण का प्रावधान किया गया है. साथ ही, अनुच्छेद 82 में संशोधन करते हुए उसके खंड 3 को हटाने का प्रस्ताव है, जिसमें अगली परिसीमन प्रक्रिया 2026 की जनगणना के बाद करने की बात कही गई थी.

यह विधेयक संसद के 16 से 18 अप्रैल के बीच प्रस्तावित विशेष सत्र से ठीक पहले पेश किया जा रहा है, जिसमें मोदी सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को जल्द लागू करने की कोशिश कर रही है.

प्रस्तावित विधेयक अनुच्छेद 334ए में संशोधन कर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान करने की बात करता है, जिसे परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा.

सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित ‘नारी वंदन अधिनियम, 2023’ (128वां संविधान संशोधन अधिनियम) में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था, लेकिन इसे अगली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था.

वहीं, 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण का प्रस्ताव करता है, जबकि 2026 की जनगणना की प्रक्रिया फिलहाल जारी है.

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के विवरण में कहा गया है कि लोकसभा की सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर स्थिर (फ्रीज़) कर दी गई थी, जो उस समय महत्वपूर्ण नीतिगत उद्देश्यों को पूरा करता था. इसमें यह भी जोड़ा गया है कि तब से देश की जनसांख्यिकीय स्थिति में ‘महत्वपूर्ण बदलाव’ आए हैं, जैसा कि 2011 की जनगणना के आंकड़ों से स्पष्ट होता है.

विधेयक में कहा गया है कि राज्यों के बीच और राज्यों के भीतर जनसंख्या के ‘महत्वपूर्ण’ स्थानांतरण (माइग्रेशन), तेज़ शहरीकरण और कुछ क्षेत्रों में ‘असंतुलित वृद्धि’ के कारण जनसंख्या और निर्वाचन क्षेत्रों के बीच ‘व्यापक असमानताएं’ पैदा हो गई हैं.

विवरण में यह भी कहा गया है कि अगली जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया में ‘काफी समय लगेगा’, जिससे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की प्रभावी और समर्पित भागीदारी में देरी होगी.

‘इसलिए, प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाएं भी शामिल हैं, के लिए एक-तिहाई आरक्षण को लागू करना है.’

विधेयक में कहा गया है कि यह प्रक्रिया ‘नवीनतम प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किए जाने वाले परिसीमन’ के जरिए पूरी की जाएगी, जिसका संदर्भ 2011 की जनगणना से है.

इस प्रकार, विवरण में कहा गया है कि महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों के पुनः आवंटन तथा ‘परिसीमन आयोग द्वारा क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्निर्धारण’ की संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़ा होगा.

विधेयक में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित संशोधन क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन को संभव बनाएगा और ‘महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित प्रावधानों को लागू करेगा’, जिससे समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी.

131वें संविधान संशोधन विधेयक की प्रति मंगलवार (14 अप्रैल) को संसद सदस्यों के बीच वितरित की गई, साथ ही दो अन्य विधेयक, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026, भी साझा किए गए. यह कदम केंद्र सरकार द्वारा बुलाए जाने वाले विशेष सत्र से महज दो दिन पहले उठाया गया है.

विपक्षी सांसदों ने पहले कहा था कि सरकार महिलाओं के आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए विशेष सत्र बुला रही है, लेकिन 2023 के आरक्षण कानून के तहत मौजूदा व्यवस्था में किए जाने वाले प्रस्तावित बदलावों का कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है.

2023 के कानून में महिलाओं के आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था. इसमें प्रावधान था कि ‘महिलाओं के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित प्रावधान … उस पहली जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होने के बाद, इस उद्देश्य से किए जाने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होंगे.’

अब मोदी सरकार का प्रस्तावित संशोधन महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से अलग करने का लक्ष्य रखता है. केंद्र सरकार ने हाल के हफ्तों में इस मुद्दे पर सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों से संपर्क भी किया है, ताकि आरक्षण को जल्द लागू किया जा सके.

हालांकि, प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा के लिए विपक्ष ने विधानसभा चुनावों के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग की थी, जिसे स्वीकार नहीं किया गया. विपक्षी दलों का कहना है कि जब तक सरकार अपने प्रस्तावों का स्पष्ट विवरण नहीं देती, तब तक 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के मुद्दे पर कोई सार्थक चर्चा संभव नहीं है.

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