किश्तवाड़: स्टरलाइट बिजली परियोजना के लिए संरक्षित वन गलियारे को नुकसान पहुंचाया गया

द वायर द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित दर्जनों तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ ज़िले में एक निजी ठेकेदार ने सरकारी मंज़ूरी के बिना संरक्षित वन गलियारे को नुकसान पहुंचाया है. बताया गया है कि ऐसा 384 करोड़ रुपये की बिजली ट्रांसमिशन लाइन की निर्माण सामग्री लाने के उद्देश्य से सड़क बनाने के लिए किया गया.

किश्तवाड़ में वन गलियारे को नुकसान पहुंचाया गया. (फोटो: इमरान शाह)

श्रीनगर: द वायर को प्राप्त जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एक निजी ठेकेदार ने सरकारी मंजूरी के बिना जानबूझकर संरक्षित वन गलियारे को नुकसान पहुंचाया है. ऐसा 384 करोड़ रुपये की बिजली ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण सामग्री की ढुलाई के लिए सड़क बनाने के उद्देश्य से किया गया था.

सूत्रों के अनुसार, इस सप्ताह की शुरुआत में किश्तवाड़ के शक्ति नगर क्षेत्र में अज्ञात वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में वन क्षेत्र में भारी मशीनरी पहुंचाई गई, ताकि उस पहाड़ी क्षेत्र तक लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा सके, जहां दो ट्रांसमिशन टावर बनाए जाने हैं.

द वायर द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित दर्जनों तस्वीरों और वीडियो से पता चलता है कि बुलडोजर मशीनों ने जंगल के भूभाग पर कई जगहों पर गहरी दरारें पैदा कर दी हैं, और ठेकेदार द्वारा निकाली गई मिट्टी और पत्थरों के मिश्रण को सरकार द्वारा निर्मित वन बाड़ाबंदी पर लापरवाही से फेंक दिया गया है.

इस संबंध में किश्तवाड़ के एक अधिकारी ने बताया कि इस सड़क के बनने से ठेकेदार को चेनाब घाटी में स्टरलाइट पावर द्वारा निर्मित की जा रही 400 किलोवाट ट्रांसमिशन लाइन के दो टावरों के लिए निर्माण सामग्री सीधे ले जाने में सुविधा होगी.

क्षेत्र में तैनात वन विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को अपने वरिष्ठों के समक्ष उठाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें चुप रहने के लिए कहा गया.

उल्लेखनीय है कि 2022 में स्टरलाइट ने किश्तवाड़ पावर लिमिटेड का अधिग्रहण किया था- जो राष्ट्रीय जलविद्युत परियोजना के नेतृत्व वाली चेनाब घाटी विद्युत परियोजना लिमिटेड (सीवीपीपीएल) की एक विशेष प्रयोजन कंपनी है- जिसके तहत कंपनी पहाड़ी जिले में 37 किलोमीटर के भूभाग पर दर्जनों टावर बना रही है.

सीवीपीपीएल एनएचपीसी (51%) और जम्मू एवं कश्मीर राज्य विद्युत विकास निगम (49%) का संयुक्त उद्यम है.

यह ट्रांसमिशन लाइन 1000 मेगावाट पाकल दुल, 624 मेगावाट किरू विद्युत परियोजना और 540 मेगावाट क्वार विद्युत परियोजना को किश्तवाड़ के त्रिगम क्षेत्र में स्थित एक उप-स्टेशन से जोड़ती है, ताकि उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में ग्रिडों को बिजली की आपूर्ति की जा सके.

केंद्रीय विद्युत मंत्रालय और भारतीय वायु सेना के पश्चिमी वायु कमान से मंजूरी मिलने के बाद इस परियोजना पर काम पिछले साल 27 मई को शुरू हुआ था.

इस संबंध में वन विभाग के एक सूत्र ने बताया, ‘यह देखा गया है कि विद्युत ट्रांसमिशन लाइनों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारी निर्माण सामग्री को स्थलों तक पहुंचाने की व्यवहार्यता का आकलन किए बिना, केवल ट्रांसमिशन टावरों के गलियारे में आने वाली भूमि के अधिग्रहण को ही ध्यान में रखते हैं.’

जम्मू-कश्मीर और राष्ट्रीय कानूनों के तहत पर्यावरण क्षरण और वनों की कटाई को रोकने के लिए वन भूमि को कड़ाई से विनियमित किया जाता है, और गैर-वन उद्देश्यों के लिए भूमि के उपयोग हेतु केंद्र सरकार से पूर्व स्वीकृति आवश्यक है.

वन क्षेत्र को हुए नुकसान को स्वीकार करते हुए संभागीय वन अधिकारी (किश्तवाड़) महेश ठाकुर ने द वायर को बताया कि एक ‘आईआर मामला’ दर्ज किया गया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है.

हालांकि, उन्होंने मामले का विवरण और वन की ओर जाने वाली एक किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क पर भूनिर्माण गतिविधियों से हुए नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी.

ठाकुर ने कहा, ‘सरकार ने ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण की मंजूरी दे दी है, लेकिन संरक्षित वन क्षेत्र से होकर सड़क बनाने का कोई प्रावधान नहीं है. संबंधित फील्ड स्टाफ को कारण बताने के लिए कहा गया है और उनका वेतन रोक दिया गया है.’

यह अनियमितता का मामला है जिसमें सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजना में निर्धारित प्रक्रियात्मक नियमों या तकनीकी औपचारिकताओं से भटकाव पाया गया है.

किश्तवाड़ में वन गलियारे को नुकसान पहुंचाया गया. (फोटो: इमरान शाह)

आधिकारिक सूत्रों ने द वायर को बताया कि ट्रांसमिशन लाइन परियोजना के कुछ घटकों का उप-अनुबंध मुंबई स्थित ट्रांसरेल समूह को दिया गया था.

सूत्रों के अनुसार, कंपनी निर्माण सामग्री ढोने के लिए स्थानीय लोगों और उनके खच्चरों को काम पर रखने वाली थी, जिससे जम्मू-कश्मीर के सबसे गरीब और अल्पविकसित जिलों में से एक किश्तवाड़ के दूरदराज के इलाकों में भी काफी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होते.

किश्तवाड़ के एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया, ‘कंपनी ने जाहिर तौर पर डोडा से एक स्थानीय ठेकेदार को निर्माण स्थल तक रेत और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए काम पर रखा था. लागत कम करने के लिए ठेकेदार ने उन अधिकारियों को रिश्वत दी होगी जिन्होंने इस अंधाधुंध लूट को नजरअंदाज कर दिया.’

उन्होंने आगे कहा, ‘सड़क निर्माण की योजना ने न केवल जंगल को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका भी छीन ली है.’

रिपोर्ट्स के अनुसार, 37 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन पर 100 से अधिक टावर बनाने का प्रस्ताव है, जिनमें से दो टावर शक्ति नगर क्षेत्र में वन भूमि पर बनाए जा रहे हैं.

किश्तवाड़ के एक स्थानीय निवासी इमरान अहमद ने कहा, ‘अगर ठेकेदार ने सड़क निर्माण के लिए स्थानीय लोगों से जमीन अधिग्रहित की होती, तो उसे उन्हें भारी रकम चुकानी पड़ती. इसके बजाय, उसने वन भूमि को आसान विकल्प समझा. मुझे आश्चर्य होगा अगर वन विभाग को भारी मशीनों का इस्तेमाल करके की गई इस लूट की जानकारी न हो.’

किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने कहा कि वे ‘मामले की जांच करेंगे.’

द वायर ने किश्तवाड़ पुलिस के वरिष्ठ अधीक्षक, स्टरलाइट पावर और ट्रांसरेल से टिप्पणी के लिए संपर्क किया है. जैसे ही कोई जवाब मिलेगा, इस खबर को अपडेट किया जाएगा.

(इमरान शाह के सहयोग के साथ)

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