नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 मई) को सिकंदराबाद में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए देश के लोगों से कई अपीलें की थीं. इनमें से एक अपील एक साल तक सोना ख़रीदने से बचने की भी थी. पीएम की इस अपील के बाद सर्राफा बाज़ार में चिंता का माहौल है. उद्योग संगठन और व्यापारियों का कहना है कि इससे कारोबार और एक करोड़ों लोगों के रोज़गार पर असर पड़ सकता है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, पीएम की इस अपील के खिलाफ लखनऊ आभूषण व्यापारियों ने एक दिन व्यापार बंद कर विरोध प्रदर्शन भी किया.
इस संबंध में लखनऊ सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि सर्राफा बाजार पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में यह एक साल तक सोना न खरीदने की अपील करना इस उद्योग से जुड़े व्यपारियों के लिए बेहद निराश करने वाली बात है.
उन्होंने देश भर के सर्राफा व्यापारियों से एकजुट होकर इस विरोध मुहिम में शामिल होने का निवेदन किया है.
वहीं, ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन (एआईजेजीएफ) के प्रदेश संयोजक विनोद माहेश्वरी ने बताया कि सर्राफा कारोबार में सिर्फ बड़े शोरूम नहीं है, बल्कि इसमें लाखों छोटे सोनार कारीगर जुड़े हुए हैं, जिनकी आजीविका इस अपील के बाद संकट में पड़ गई है, जिसके चलते वे इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए हैं.
सीएनबीसी के अनुसार, प्रधानमंत्री की अपील को आभूषण उद्योग संघों और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के अधिकारियों के बीच एक बैठक भी होने की ख़बर है, जिसमें सरकार से संतुलित नीति अपनाने और व्यापारिक हितों पर पुनर्विचार करने की मांग उठाए जाने की संभावना है.
इससे पहले वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में एआईजेजीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा है कि विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते आयात बिल पर सरकार की चिंता समझ में आती है, लेकिन बिना किसी संरचनात्मक विकल्प के सोने की खरीद को हतोत्साहित करने वाली सार्वजनिक अपील से आभूषण उद्योग को भारी नुकसान होने का खतरा है.
अरोड़ा ने आगे कहा है, ‘विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करने का इरादा सही है, लेकिन इसका समाधान मांग को खत्म करना नहीं होना चाहिए। इसका समाधान घरेलू सोने का फिर से इस्तेमाल और भारत के बिना उपयोग वाले स्वर्ण भंडार को उत्पादक प्रचलन में लाना होना चाहिए.’
फेडरेशन ने चेतावनी दी कि उपभोक्ता धारणा में अचानक नकारात्मक बदलाव से खरीदारी कम हो सकती है, विनिर्माण घट सकता है और छोटे स्वर्णकार तथा कारीगरों की आय प्रभावित हो सकती है.
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री के रविवार को दिए गए इस संदेश का असर सोमवार को शेयर बाज़ार खुलते ही सर्राफा बाज़ार से जुड़ी सभी बड़ी कंपनियों के शेयर्स पर देखने को मिला. टाइटन कंपनी के शेयर 7% गिरे, जबकि कल्याण ज्वेलर्स के शेयर 9% से ज़्यादा गिर गए. सेंको गोल्ड, थंगामयिल ज्वेलरी और पीएन गाडगिल ज्वेलर्स के शेयर भी 6% से 8% तक गिरावट देखी गई.
वहीं, मंगलवार दूसरे दिन भी इन कंपनियों के शेयर्स में बिकवाली का सिलसिला जारी रहा और करीब 50,000 करोड़ रुपये का नुकसान देखा गया. इससे पहले सोमवार को इन कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन से करीब 35,000 करोड़ रुपये कम हो गए थे.
गौरतलब है कि पीएम मोदी ने देश से ऐसे समय में सोना न खरीदने की अपील की है, जब भारत के सोने के आयात में पहले ही भारी गिरावट आ चुकी है. विश्व के दूसरे सबसे बड़े सोने के उपभोक्ता भारत ने वित्त वर्ष 2026 में औसतन प्रति माह लगभग 60 टन सोने का आयात किया, जिसका मासिक मूल्य लगभग 6 अरब डॉलर था.
उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में आयात में काफ़ी गिरावट आई है. जनवरी 2026 में लगभग 100 टन तक पहुंचने के बाद, फरवरी में आयात गिरकर लगभग 65–66 टन और फिर मार्च में लगभग 20–22 टन रह गया.
अप्रैल में आयात लगभग 15 टन रहने का अनुमान है, जो महामारी के दौर को छोड़कर, पिछले लगभग तीन दशकों में दर्ज किए गए सबसे कम मासिक स्तरों में से एक है.
इस उद्योग से जुड़े लोगों ने इस गिरावट का कारण सोने की ऊंची कीमतों के साथ ही इसके व्यापार में आ रही बाधाओं को भी बताया है.
खबरों के अनुसार, कस्टम क्लीयरेंस में देरी, टैक्स से जुड़े नियमों को लेकर अनिश्चितता और अधिकृत आयात करने वाले बैंकों के लाइसेंस रिन्यूअल की प्रक्रिया ने इस पर नकारात्मक असर डाला है.
इस बीच, रिद्धि सिद्धि बुलियंस लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का मांग पर ‘ढांचागत के बजाय मनोवैज्ञानिक’ असर पड़ने की संभावना है.
कोठारी के अनुसार, भारत में शादियों के मौके पर सोने की खपत हमारी संस्कृति में इतनी गहराई से बसी हुई है कि इसके प्रति आकर्षण कम होने के बावजूद, इसकी खरीदारी में अचानक कोई बड़ी गिरावट आने की संभावना कम ही है.
हालांकि, उन्होंने कहा कि पीएम के संदेश से कुछ ऐसे खरीदार जो अपनी मर्ज़ी से खरीदारी करते हैं, वे हल्के गहनों, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की ओर मुड़ सकते हैं; जिससे सोने के तत्काल आयात पर पड़ने वाला दबाव कुछ कम हो सकता है.
