हैदराबाद: रविवार (10 मई) को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैदराबाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं की एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे, उसी समय पार्टी दो दिन पहले दर्ज किए गए बंडी साई भागीरथ के खिलाफ बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) 2012 के तहत दर्ज मामले से हिल गई थी. भागीरथ केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे हैं.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सीवी आनंद को तलब किया, ताकि जांच की प्रत्यक्ष जानकारी ली जा सके. रेड्डी के निर्देश पर डीजीपी ने आईपीएस अधिकारी रितिराज के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया. रितिराज कुकटपल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हैं.
एसआईटी को 8 मई को एक 17 वर्षीय लड़की की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत की गहन जांच का जिम्मा सौंपा गया है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पिछले वर्ष 31 दिसंबर को हैदराबाद के बाहरी इलाके मोइनाबाद स्थित एक फार्महाउस में भागीरथ ने उनकी बेटी का यौन शोषण किया. दूसरी ओर, भागीरथ ने भी लड़की और उसके परिवार के खिलाफ एक जवाबी शिकायत दर्ज कराई है.
शिकायतों का विवरण
शिकायतकर्ता महिला का कहना है कि उनकी बेटी के विरोध करने के बावजूद उसे शराब पीने के लिए मजबूर किया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि भागीरथ लड़की के कमरे में घुसा और उसके साथ गलत व्यवहार किया. साथ ही, उसे पांच अन्य लड़कों और दो लड़कियों के साथ रातभर फार्महाउस में रुकने के लिए मजबूर किया गया. महिला ने अपनी शिकायत में कहा कि छह महीने पहले आपसी जान-पहचान के ज़रिए उनकी बेटी को भागीरथ के साथ ‘रिश्ते’ में आने के लिए मनाया गया था.
शिकायत के अनुसार, भागीरथ ने लड़की को भरोसा दिलाया था कि जब वह 18 साल की हो जाएगी, तो वह उससे शादी कर लेगा. शिकायत में कहा गया है कि फार्महाउस वाली घटना से पहले वह कथित तौर पर लड़की को निजी जगहों पर ले गया था- जिनमें रिहायशी इलाके भी शामिल थे – और वहां उसने लड़की का ‘यौन और शारीरिक शोषण’ किया.
शिकायत में कहा गया है कि एक सप्ताह बाद भागीरथ ने अचानक रिश्ता खत्म कर दिया और अपने किए की कोई ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया. शिकायत में कहा गया, ‘लगातार शोषण और छोड़ दिए जाने के परिणामस्वरूप मेरी बेटी गंभीर मानसिक आघात से गुजरी और उसने 19 तथा 26 जनवरी को आत्महत्या का प्रयास किया.’
लड़की का परिवार हैदराबाद के कोम्पल्ली क्षेत्र में रहता है, जो पेट बशीराबाद थाने के अधिकार क्षेत्र में आता है. महिला ने पेट बशीराबाद पुलिस थाने को भेजे गए पत्र में लिखा, ‘जब हमने मार्च में कानूनी कार्रवाई शुरू करने की कोशिश की, तब हमें मामला वापस लेने के लिए फोन आने लगे और हम पर परोक्ष रूप से दबाव डाला जाने लगा.’
उसी दिन (8 मई) भागीरथ ने करीमनगर के टू टाउन पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने कहा कि महिला, उसके पति और बेटी के ‘मेरे और मेरे दोस्तों के समूह के साथ दोस्ताना संबंध बन गए थे.’ शिकायत में यह भी कहा गया कि वह ‘दोस्तों के समूह के साथ विजयवाड़ा मंदिर, अरुणाचलम मंदिर और तिरुमला मंदिर गया था.’
भागीरथ की शिकायत में कहा गया, ‘कुछ समय बाद उनके व्यवहार में बदलाव आया और लड़की के माता-पिता ने मुझे फोन कर उनकी बेटी से शादी करने के लिए दबाव डालना और धमकाना शुरू कर दिया. जब मैंने मना किया, तो उन्होंने मेरे खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दर्ज कराने की धमकी दी, जिनमें उत्पीड़न और शारीरिक संबंधों के आरोप शामिल थे. उन्होंने मुझसे बड़ी रकम की मांग भी की. डर के कारण मैंने उसके पिता को 50,000 रुपये दिए और मुझे अकेला छोड़ने का अनुरोध किया.’
भागीरथ की शिकायत में यह दावा किया गया है, ‘उसके बाद माता-पिता लगातार मुझे मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं और मुझ पर दबाव डाल रहे हैं, यह कहकर कि अगर मैंने उन्हें पांच करोड़ रुपये नहीं दिए, तो वह महिला (लड़की की मां) आत्महत्या कर लेगी.’
भागीरथ ने आरोप लगाया है कि लड़की के परिवार और उसके दोस्तों के बीच पहले से ही कोई विवाद चल रहा था, जिसके कारण अप्रैल में निर्मल पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया था. हालांकि, लड़की के परिवार ने 8 मई को पेट बशीराबाद स्टेशन के अधिकारियों को लिखे अपने पत्र में इस शिकायत को झूठा बताया है.
महिला की शिकायत पर पेट बशीराबाद पुलिस ने भागीरथ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74 (महिला की शील भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग), धारा 75 (यौन उत्पीड़न से संबंधित अपराध) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 11 और 12 (बच्चे के यौन उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया.
वहीं, भागीरथ की शिकायत पर करीमनगर में लड़की के परिवार के खिलाफ बीएनएस की धारा 308 (जबरन वसूली) और धारा 351 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया.
पुलिस कार्रवाई
दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और संभावित राजनीतिक प्रतिक्रिया को देखते हुए मुख्यमंत्री रेड्डी ने कथित तौर पर डीजीपी से कहा कि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश न छोड़ी जाए. उन्होंने मामले की प्रगति की रोजाना रिपोर्ट भी मांगी है.
मंगलवार (12 मई) को रितिराज की निगरानी में उन स्थानों के सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए गए, जहां कथित तौर पर लड़की और भागीरथ गए थे.
खबरों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने व्यापक जांच के लिए विशेष टीमें गठित करने के निर्देश भी दिए, क्योंकि मामला राजनीतिक रंग लेने लगा है.
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसी बीच डीसीपी रितिराज ने मंगलवार को कहा, ‘अगर भागीरथ के खिलाफ अपराध सिद्ध होता है तो हम उसे गिरफ्तार करेंगे. हम कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य तरीकों से आरोपी के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं. पहचान हो जाने के बाद उसे हिरासत में लिया जाएगा. यह एक पंजीकृत पॉक्सो मामला है और पीड़िता को न्याय दिलाना हमारा कर्तव्य है. हम शिकायत के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं और गहन पड़ताल कर रहे हैं.’
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने अपने बेटे पर लगे आरोपों को उनके राजनीतिक विरोधियों की ‘साजिश’ बताया. उन्होंने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है.
उन्होंने 9 मई को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, ‘समय हर आरोप का जवाब देगा और हर साजिश का पर्दाफाश करेगा. यह स्पष्ट है कि यह मेरे खिलाफ व्यक्तिगत रूप से चलाया गया राजनीतिक षड्यंत्र है, जिसका उद्देश्य माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की कल की जनसभा से पहले मुझे बदनाम करना है. कुछ ताकतें एक पिछड़ा वर्ग नेता के केंद्रीय मंत्री बनने को पचा नहीं पा रही हैं, इसलिए मोदी जी की यात्रा की पूर्व संध्या पर मुझे निशाना बनाया गया.’
भागीरथ के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने भी एक्स पर प्रतिक्रिया दी और उन्होंने लिखा, ‘क्या हमारे देश के इतिहास में यह पहली बार है कि किसी केंद्रीय गृह मंत्री का बेटा फ़रार है?’
उन्होंने उन खबरों के जवाब में यह बात लिखी थी, जिनमें कहा गया था कि भागीरथ पर मामला दर्ज होने के बाद से ही वह फ़रार हैं. भागीरथ के वकीलों ने मंगलवार (12 मई) को तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनके लिए अग्रिम ज़मानत की मांग की. इस मामले की सुनवाई गुरुवार (14 मई) को तय की गई है.
बीआरएस के अन्य नेता और पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने आरोप लगाया कि पॉक्सो आरोपी को मामला दर्ज होने के चार दिन बाद भी खुला घूमने दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के दबाव में मामले को कमजोर करने के लिए एसआईटी बनाई गई.
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने मीडिया से कहा कि यह ‘पारिवारिक मामला’ है और पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि कानून अपना काम करेगा. उन्होंने द वायर से कहा कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अब तक इस मुद्दे पर चुप है और विपक्षी दल ‘बेवजह इसे मुद्दा बना रहे हैं.’
बीआरएस के महिला और छात्र संगठनों ने पेट बशीराबाद पुलिस स्टेशन और डीजीपी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.
भागीरथ पहले भी विवादों में रह चुका है
भागीरथ से जुड़ा यह दूसरा बड़ा विवाद है जिसने मंत्री बंडी संजय को असहज स्थिति में डाल दिया है. तीन साल पहले भागीरथ पर महिंद्रा यूनिवर्सिटी कैंपस में अपने एक बैचमेट के साथ कथित तौर पर मारपीट करने का आरोप लगा था. उस समय बंडी संजय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे. उस समय यह आरोप लगाया गया था कि विवाद की जड़ भागीरथ के एक दोस्त से जुड़ी महिला का पीछा करना था.
इस घटना का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें भागीरथ को एक युवक को थप्पड़ मारते और गाली-गलौज करते देखा गया था. यूनिवर्सिटी ने उसे निलंबित कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी. उसे अपनी परीक्षा में बैठने की इजाज़त दे दी गई, क्योंकि उसने यह दावा किया था कि सस्पेंशन से पहले उसे अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया था. बाद में पीड़ित ने एक लोक अदालत में कहा कि वह भागीरथ के खिलाफ इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता.
8 मई के बाद बढ़े तनाव के बीच बंडी संजय के समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं ने करीमनगर विधायक और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) नेता गंगुला कमलाकर के कैंप कार्यालय में तोड़फोड़ की. एक अन्य बीआरएस विधायक पाडी कौशिक रेड्डी की कार का शीशा भी तोड़ दिया गया. गुस्साई भीड़ से बचाने के लिए पुलिस को कौशिक रेड्डी को एक कमरे में बंद करना पड़ा.
यह घटना रेड्डी द्वारा केंद्रीय मंत्री पर की गई एक व्यक्तिगत टिप्पणी के बाद हुई, जिसका उनके बेटे के खिलाफ दर्ज मामले से कोई संबंध नहीं था.
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