चुनाव आयोग ने एसआईआर के तीसरे चरण की घोषणा की: 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में होगा

तीसरे चरण का एसआईआर प्रक्रिया पहले से चल रही जनगणना की हाउस-लिस्टिंग प्रक्रिया के साथ-साथ चलेगी, इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घर-घर जाकर सर्वे करने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों को तैनात किया जाएगा. निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों से प्रत्येक मतदान केंद्र पर बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने को कहा गया है ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने गुरुवार (14 मई) को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण का आदेश जारी किया. इस चरण में 16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है. इस प्रक्रिया के तहत 3.94 लाख जमीनी स्तर के अधिकारी 36.73 करोड़ मतदाताओं की जांच करेंगे.

यह एसआईआर प्रक्रिया, चल रही जनगणना की हाउस-लिस्टिंग प्रक्रिया के साथ-साथ चलेगा, इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घर-घर जाकर सर्वे करने के लिए बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को तैनात किया जाएगा.

जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इसमें शामिल किया गया है, वे हैं- आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, दिल्ली, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड.

फिलहाल तीन क्षेत्रों- हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख – को इस चरण से बाहर रखा गया है. आयोग ने कहा कि इन क्षेत्रों का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा, जिसमें वहां जनगणना के दूसरे चरण की समाप्ति और ‘ऊंचाई वाले तथा बर्फबारी वाले इलाकों के मौसम’ को ध्यान में रखा जाएगा.

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने तीसरे चरण की शुरुआत पर कहा, ‘मैं सभी मतदाताओं से अपील करता हूं कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तीसरे चरण में उत्साहपूर्वक भाग लें और अपने गणना फॉर्म भरें. एसआईआर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र मतदाताओं के नाम ही मतदाता सूची में शामिल हों और कोई अपात्र नाम सूची में न आए.’

यह प्रक्रिया अलग-अलग समयसीमाओं में चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी. ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर उन राज्यों में से हैं जहां यह प्रक्रिया सबसे पहले शुरू होगी. यहां घर-घर जाकर सर्वे का काम 30 मई से शुरू होगा और अंतिम मतदाता सूची 6 सितंबर तक जारी होने की उम्मीद है.

महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली और झारखंड जैसे राज्यों में यह प्रक्रिया बाद में चलेगी और वहां अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर तक जारी होगी. त्रिपुरा में यह प्रक्रिया सबसे अंत में 23 दिसंबर तक पूरी होगी.

राजनीतिक दलों से प्रत्येक मतदान केंद्र पर बूथ लेवल एजेंट नियुक्त करने को कहा गया है ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे. अब तक लगभग 3.42 लाख ऐसे एजेंट नियुक्त किए जा चुके हैं. आयोग ने कहा कि यह पुनरीक्षण ‘मतदाताओं, राजनीतिक दलों और चुनाव अधिकारियों सहित सभी हितधारकों की भागीदारी वाला अभियान’ है.

पहले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया था, जहां लगभग 59 करोड़ मतदाताओं के लिए 6.3 लाख से अधिक बीएलओ और 9.2 लाख पार्टी-नियुक्त एजेंट इस प्रक्रिया में शामिल हुए थे.

इस चरण में शामिल राज्यों में महाराष्ट्र में सबसे अधिक मतदाता हैं, जहां 9.86 करोड़ से अधिक मतदाता हैं. इसके बाद कर्नाटक में 5.55 करोड़ और आंध्र प्रदेश में 4.16 करोड़ मतदाता हैं.

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया विवादों में घिर गई थी, जहां चुनाव से दो सप्ताह पहले 27 लाख मतदाताओं का भविष्य 19 न्यायिक न्यायाधिकरणों के फैसले पर निर्भर रह गया था. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. अंततः मतदान से पहले न्यायाधिकरण बहुत कम मामलों पर ही निर्णय दे पाए.

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 150 सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक थी, और इनमें भाजपा ने 99 सीटें जीतीं. 2021 में भाजपा ने इनमें से केवल 19 सीटों पर जीत हासिल की थी.